मंडराता है प्रदूषण का खतरा जिम्मेदार मौन

मंडराता है प्रदूषण का खतरा जिम्मेदार मौन

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रायबरेली/घोरवारा-डलमऊ

डलमऊ कोतवाली  क्षेत्र में घोरवारा में प्राकृतिक दोहन और पर्यावरण प्रदूषण की दोहरी चपत लगाई जा रही है। कोयला भट्टी अधिनियमाें को दरकिनार कर गांव में मानकाें के विपरीत भट्टियाें का संचालन शुरू हो गया है। वन विभाग महकमा भी इस कारोबार पर हो रही नियमित अनदेखी से खामोश है एक भट्टी से एक महीने में औसतन 18 से 20 क्विंटल कोयला तैयार होता है। वन क्षेत्र से पेड़ों की अवैध रूप से कटाई तो हो रही है, दिन-रात निकलने वाला धुआं भी हानिकारक है गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश कोयला भट्टी अधिनियम नियमावली के तहत वन क्षेत्र से दस किलोमीटर दूर भट्यिाें का संचालन किए जाने का प्रावधान है। इनको आबादी से एक किलोमीटर दूर रखते हुए अधिकतम  मानकाें पर बनाने का लाइसेंस दिया जाता है लेकिन डलमऊ कोतवाली क्षेत्र में घोरवारा में अवैध तरीक़े से चलाई जा रही भट्टियां और निकलने वाला धुँवा से प्रदूषण फैलता है सूत्रों की माने तो अधिकारियो के  संरक्षण से चल रही कोयले का अवैध कारोबार कोयला भट्टियां अनदेखी के चलते फल फूल रहा है कोयले का अवैध कारोबार भट्टियां सबसे बड़ी इतने सालों से चल रही कोयले की भट्टियों पर क्या किसी की नज़र नही पड़ी या फिर जान के अनदेखी की जा रही है भट्टियाें में कोयला के लिए प्रयुक्त होने वाली लकड़ियों में मार्का लगाने के लिए वन महकमा भी नहीं पहुंचता। बगैर अनुमति के ही लकड़ी का कटान करवाकर वाहनाें से लाकर भट्टियाें में झाेंका जा रहा है अब देखना यह कि क्या जिम्मेदार अधिकारी कार्यवाही करते है कि नही।।