रायबरेली- कांग्रेस को साख , भाजपा को प्रतिष्ठा व सपा को जमीन बचाने की चुनौती

रायबरेली- कांग्रेस  को साख , भाजपा को प्रतिष्ठा व सपा को जमीन बचाने की चुनौती

-:विज्ञापन:-

स्पेशल रिपोर्ट

रोहित मिश्र

मो -- 7618996633

रायबरेली - रायबरेली जिले की बड़ी पंचायत पर कब्जा करने के लिए सियासी दलों ने गोटियां बिछानी शुरू कर दी । तीन प्रमुख दलों के लिए रायबरेली जिला पंचायत अध्यक्ष का पद बड़े सियासी मायने रखता है । इसलिए हर पार्टी इस पर न सिर्फ पूरी ताकत लगाएगी अपितु इस सीट पर जीत हार का संदेश भी राष्ट्रीय पटल पर सुनाई देगा ।


रायबरेली में जिला पंचायत अध्यक्ष पद की सीट है अनुसूचित जाति

    रायबरेली जिला पंचायत अध्यक्ष पद अनुसूचित वर्ग के लिए आरक्षित है । इसलिए करीब करीब हर पार्टी में उसी अनुरूप अपने उम्मीदवार जिला पंचायत सदस्य के लिए मैदान में उतारे थे । जिसमे अधिकांश को सफलता भी मिली है । केवल भाजपा के संभावित दावेदारों में पूर्व विधायक राजाराम त्यागी को असफलता मिली है । जबकि कांग्रेस नेता मनीष सिंह की पत्नी आरती सिंह व सपा के पूर्व विधायक रामलाल अकेला के पुत्र विक्रांत अकेला ने विजय हासिल करके इस पद पर अपनी दावेदारी पेश की है । उधर भाजपा अपने किसी विश्वासपात्र को मैदान उतारने की तैयारी कर रही है । इन तीन राजनैतिक दलों से इतर जिले के एमएलसी दिनेश सिंह जिनके परिवार का दस साल से जिला पंचायत पर कब्जा रहा है , उनकी भी इसमें अपने खास की दावेदारी को अहम माना जा रहा है ।

कांग्रेस महासचिव प्रियंका वाड्रा की रहेगी इस चुनाव में सीधी नजर

   राजनैतिक रूप से देखा जाए तो कांग्रेस के लिए रायबरेली की जिला पंचायत पर कब्जा उसकी जिले में साख को बचाना होगा । कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी इसमें सीधे रूप से शामिल होंगी और कांग्रेस की पूरी कोशिश होगी कि रायबरेली की सीट पर उनका कब्जा हो । जिससे न सिर्फ कांग्रेस छोड़ने वाले एमएलसी दिनेश सिंह को शिकस्त दी जाए अपितु राष्ट्रीय स्तर पर भी ये संदेश दिया जाए कि रायबरेली कांग्रेस का अभी भी अभेद किला है । दूसरी ओर भाजपा रायबरेली जिला पंचायत अध्यक्ष सीट पर कब्जा करके कांग्रेस को उसके गढ़ में पटकनी देने की पुरजोर कोशिश करेगी , इसके लिए भाजपा हर सम्भव कोशिश करेगी । जो कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती होगी । उधर जिले में अपनी जमीन मजबूत करके के लिए सपा भी पूरी ताकत से जिला पंचायत अध्यक्ष पर काबिज होने का प्रयास करेगी ।

एमएलसी दिनेश अपना प्रताप दिखाने से भी नही रहेंगे पीछे

     इन सबके बीच एमएलसी दिनेश प्रताप सिंह का पंचवटी परिवार जिले की प्रमुख कुर्सी पर अपने खास को बैठाने के लिए हर कोशिश में लगा हुआ है । इतिहास गवाह है कि इसके लिए यदि पंचवटी परिवार को अपनी पार्टी भाजपा से अलग होना पड़े , तो वह यह कदम उठाने में पीछे नहीं होंगे । उनके लिए चुनावी सफलता ही उनका भावी राजनैतिक भविष्य तय करेगा । इसलिए पंचवटी परिवार अपनी झोली में अध्यक्ष की कुर्सी लेकर भाजपा व कांग्रेस दोनों बड़े दलों को संदेश देने की कोशिश करेगा कि जिले में आज भी उनका दबदबा है ।

धन बल व बाहुबल का होगा चुनाव !

       इस जोड़तोड़ और राजनैतिक बिसात पर सबसे अहम रोल निर्दल जीते जिला पंचायत सदस्यों का होगा । बड़ी संख्या में निर्दलीय चुनाव जीतकर आए सदस्यों में कई सदस्य पंचवती परिवार के करीबी बताते जाते है । इनके अलावा अन्य दलों के जीतने वाले सदस्यों का अपने दल के प्रति समर्पण कब तक रहता है ? यह कहना मुश्किल है । क्योंकि जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव पूरी तरह रुपया और प्रबंधन पर निर्भर करता है । और जहां रुपया हो , वहां जब विधायक व सांसद अपने दलों से गद्दारी कर जाते है तो जिला पंचायत सदस्य की क्या बिसात है ।