रायबरेली-बीईओ बछरावां की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल, जांच न होने से महासंघ आक्रोशित

रायबरेली-बीईओ बछरावां की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल, जांच न होने से महासंघ आक्रोशित

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गंभीर वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं की क्यो नही हो रही जांच


शिक्षिका रेनू सिंह,नीलम त्रिपाठी एवम विद्या सोनकर के साथ न्याय होने तक जारी रहेगा संघर्ष: वीरेंद्र सिंह


बीएसए रायबरेली द्वारा गठित जांच समिति ने तय समय सीमा पूरी होने के बावजूद नही की कोई कार्यवाही


लंबित सेवापुस्तिकाओं और अटकी शिकायतों के कारण कर्मचारियों के वैधानिक अधिकार प्रभावित



महासंघ ने 15 मार्च को बैठक कर धरना-प्रदर्शन की तिथि घोषित करने और आंदोलन को व्यापक बनाने की दी चेतावनी

रिपोर्ट:- ऋषि मिश्रा
मो०न०:-9935593647


बछरावां रायबरेली। खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय बछरावां में सामने आए भ्रष्टाचार, प्रशासनिक अनियमितताओं और जांच में हो रही देरी को लेकर राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ में गहरा आक्रोश व्याप्त है। संगठन का आरोप है कि गंभीर वित्तीय और प्रशासनिक गड़बड़ियों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे शिक्षकों और कर्मचारियों में असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है। संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि बेसिक शिक्षा अधिकारी रायबरेली द्वारा गठित जांच समिति (बीईओ शिवगढ व नगर क्षेत्र) को एक माह के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया था, लेकिन डेढ़ माह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद जांच शुरू नहीं हो सकी। महासंघ ने सवाल उठाया है कि जब जांच की समयसीमा समाप्त हो गई तो जांच अधिकारियों से देरी का कारण क्यों नहीं पूछा गया और न ही कोई स्मरण पत्र जारी किया गया। संगठन ने आशंका जताई है कि कहीं न कहीं बीईओ बछरावां को संरक्षण देने के कारण ही जांच प्रक्रिया को जानबूझकर लंबित रखा जा रहा है। संगठन के जिलाध्यक्ष वीरेंद्र सिंह के अनुसार बीईओ कार्यालय बछरावां में अभिलेखीय व्यवस्था अत्यंत खराब स्थिति में है और शिक्षकों व कर्मचारियों की मूल सेवापुस्तिकाओं की सुरक्षा तक सुनिश्चित नहीं है। 23 जून 2025 को सभी सेवापुस्तिकाओं की अद्यतन सूची तैयार करने का निर्देश दिया गया था, लेकिन महीनों बाद भी सूची उपलब्ध नहीं कराई गई, जिससे शिक्षक अपनी सेवापुस्तिका की जानकारी के लिए बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। संगठन ने कंपोजिट विद्यालय सरौरा के अनुचर विद्या सोनकर को लगभग तीन वर्ष से एसीपी लाभ न मिलने, प्राथमिक विद्यालय कुर्री की प्रधानाध्यापिका नीलम त्रिपाठी की सेवा पुस्तिका वर्ष 2016 से गायब बताए जाने को सत्य से परे बताते हुए इसे महिला शिक्षिका का मानसिक उत्पीड़न बताया है। साथ ही आरटीआई में दिसंबर 2024 में सभी सेवापुस्तिकाएं सुरक्षित बताए जाने के बाद भी ऐसे दावे सामने आना कार्यालयीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
महासंघ ने 15 अक्टूबर 2025 की उस घटना को भी गंभीर बताया जिसमें एक बाहरी व्यक्ति को बीईओ कक्ष की अलमारी खोलकर सेवापुस्तिकाएं जमीन पर बिखेरते हुए देखा गया था और उस समय कक्ष में कुछ अनधिकृत लोग भी मौजूद थे। शिकायत और सीसीटीवी फुटेज की जांच की मांग के बावजूद अब तक कोई कार्यवाही नहीं हुई। इसके अलावा विद्यालय भवन निर्माण की धनराशि का उपयोग न होना, शिक्षकों की लंबित शिकायतों का निस्तारण न होना तथा बिना सक्षम आदेश विद्यालय संचालन प्रभावित होने जैसे मामलों को भी प्रशासनिक लापरवाही का उदाहरण बताया गया है। संगठन का कहना है कि एक ओर गंभीर शिकायतों की जांच लंबित रखी जा रही है, वहीं दूसरी ओर समाधान दिवस के नाम पर शिक्षकों की समस्याओं का केवल औपचारिक निस्तारण दिखाया जा रहा है, जिससे पीड़ितों में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर उन्हें न्याय कब मिलेगा और समस्याओं से मुक्ति कब मिलेगी। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के महामंत्री संजय कन्नौजिया ने कहा कि यदि एक सप्ताह के भीतर निष्पक्ष जांच प्रारंभ कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई तो संगठन 15 मार्च को बैठक कर धरना-प्रदर्शन की तिथि घोषित करेगा और आंदोलन को व्यापक रूप दिया जाएगा। संगठन का कहना है कि शिक्षकों और कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा तथा शिक्षा विभाग में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए उनका संघर्ष जारी रहेगा।