रायबरेली-गुटखा के शौकीन लोगों को कौन लूट रहा है निर्माता या थोक विक्रेता

रायबरेली-गुटखा के शौकीन लोगों को कौन लूट रहा है निर्माता या थोक विक्रेता

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जिम्मेदार अधिकारी क्यों है इस मामले में मौन, प्रतिदिन करोडो रुपए की हो रही है लूट

रिपोर्ट:- ऋषि मिश्रा
मो०न०:-9935593647


बछरावां रायबरेली। गुटखा मसाला खाने वाले शौकीन लोगों की जेब पर कौन डाका डाल रहा है, निर्माता अथवा थोक विक्रेता! इस धंधे के अंदर पूरे उत्तर प्रदेश में करोडों रूपयों की लूट प्रतिदिन हो रही है, परंतु जिम्मेदार अधिकारी व शासन प्रशासन पूरी तरह मौन नजर आ रहा है। दरअसल सरकार द्वारा जब बजट पेश किया गया तो गुटखा मसाला में टैक्स बढ़ाने की बात कही गई, फिर क्या था मसाला बनाने वाली फैक्ट्रीयों ने तमाशा बाजी करना शुरू कर दिया और यह बताया की टैक्स इतना ज्यादा बढ़ गया है कि अब वह लोग गुटखा मसाला बनाने में असमर्थ है, बाजार के अंदर अभाव पैदा कर दिया गया। बड़े व्यापारियों ने जिनके पास स्टॉक था उन्होंने रेट बढ़ा दिया और ₹170 के बदले यह लोग 210 का पैकेट बेचने लगे। हालात जब कुछ सामान्य हुए तो कमला पसंद के निर्माता द्वारा जिस पैकेट के अंदर 39 पाऊच होते थे 34 कर दिए गए और अपने पैकेट पर बिक्री दर 136 रुपए छपवाई गई तथा प्रति पाउच ₹4 छपवा दिया गया, परंतु जब यह निर्माता के यहां से थोक विक्रेता के यहां आया तो थोक विक्रेताओं ने फुटकर विक्रेताओं के लिए के इसकी दर 200 से 210 रुपए प्रति पैकेट कर दी, नतीजा यह हुआ की कमला पसंद 7 रुपए बिकने लगा, ग्रामीण क्षेत्रों में आठ रूपए की बिक्री शुरू कर दी गई। लगभग यही स्थिति राजश्री की रही, 30 पाउच का पैकेट ₹200 में थोक व्यापारियों द्वारा बेचा जाने लगा। सवाल यह उठता है की फिर कंपनी द्वारा अपनी बिक्री दर कम क्यों छपवाई गई और अगर निर्माता अपनी लिखी हुई दरों पर थोक व्यापारियों को गुटखा मसाला दे रहा है, तो क्या यह थोक व्यापारी लूट रहे है आखिर इस प्रतिदिन करोड़ों रुपए की लूट का जिम्मेदार कौन है, अधिकारी वर्ग क्यों इस प्रकरण की जांच नहीं कर रहा है, क्या मसला निर्माता द्वारा टैक्स की चोरी करने के लिए कम दरें छपाई गई और ज्यादा दरों पर बेचा जा रहा है, क्या यह निर्माता इस तरह सरकार को चूना लगा रहे हैं और अगर निर्माता यह फ्रॉड नहीं कर रहा है तो क्या थोक विक्रेता डकैती डाल रहा है। तत्काल प्रभाव से इसकी जांच होनी चाहिए थोक व्यापारियों के यहां छापा डाला जाना चाहिए तथा थोक व्यापारियों से पूछताछ करनी चाहिए की क्या निर्माता उन्हें कम दरें छपवाकर ऊंची दरों पर माल दे रहा है। अगर ऐसा है तो इन फैक्ट्रियों पर कार्यवाही होनी चाहिए क्योंकि उपभोक्ता की जेब पर तो डाका पड़ ही रहा है, सरकार के टैक्स की चोरी ही बचाई जा सके, क्या संबंधित अधिकारी कुंभकर्णी नींद से जागने का कष्ट करेंगे।