रायबरेली-7वां राष्ट्रीय तंबाकू एवं स्वास्थ्य सम्मेलन (NCTOH) 2026

रायबरेली-7वां राष्ट्रीय तंबाकू एवं स्वास्थ्य सम्मेलन (NCTOH) 2026

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रिपोर्ट-ओम द्विवेदी(बाबा)
मो-8573856824

7वां राष्ट्रीय तंबाकू एवं स्वास्थ्य सम्मेलन (NCTOH) 2026, जो 30 जनवरी से 1 फरवरी 2026 तक सामुदायिक चिकित्सा विभाग, एम्स रायबरेली के तत्वावधान में एम्स रायबरेली में आयोजित किया गया, सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। सम्मेलन में तंबाकू महामारी से निपटने हेतु रोकथाम, नीतिगत कार्रवाई, नवाचार और सामुदायिक सहभागिता पर सशक्त और स्पष्ट संदेश दिए गए। यह सम्मेलन डॉ. भोला नाथ (आयोजन अध्यक्ष) एवं डॉ. सौरभ पॉल (आयोजन सचिव) के नेतृत्व में आयोजित किया गया, जिसमें देशभर से जनस्वास्थ्य विशेषज्ञों, नीति-निर्माताओं, चिकित्सकों, वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं तथा नागरिक समाज के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
सम्मेलन की शुरुआत इस सशक्त आह्वान के साथ हुई कि तंबाकू नियंत्रण को एक राष्ट्रीय जनआंदोलन के रूप में देखा जाना चाहिए, जिसमें दीर्घकालिक प्रयास, सशक्त नेतृत्व और सक्रिय सामुदायिक भागीदारी को परिवर्तन की आधारशिला बताया गया। उद्घाटन सत्र को डॉ. (प्रो.) भोला नाथ ने संबोधित किया। इसके पश्चात “भारत में तंबाकू नियंत्रण हेतु समुदाय-नेतृत्वित नवाचार” विषय पर एक पैनल चर्चा आयोजित की गई, जिसमें विशेषज्ञों ने जमीनी स्तर की सफल पहलों, नीतिगत दृष्टिकोणों और स्थायी तंबाकू नियंत्रण में नागरिक समाज की अहम भूमिका पर प्रकाश डाला।
MPOWER+ – भूत, वर्तमान और भविष्य विषय पर आयोजित एक उच्चस्तरीय प्लेनरी सत्र में विश्व स्वास्थ्य संगठन की तंबाकू नियंत्रण रणनीतियों के अंतर्गत भारत की प्रगति की समीक्षा की गई और भविष्य की प्राथमिकताओं पर चर्चा की गई। इसके साथ ही राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर पर तंबाकू निवारण में नवाचार विषयक संगोष्ठी आयोजित की गई, जिसमें तंबाकू नियंत्रण को स्वास्थ्य प्रणालियों में एकीकृत करने, स्वास्थ्यकर्मियों की क्षमता सुदृढ़ करने तथा चिकित्सा एवं दंत चिकित्सा अभ्यास में तंबाकू नियंत्रण की भूमिका पर चर्चा हुई। विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत एक फ्लैश मॉब ने तंबाकू के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता बढ़ाई, वहीं एक अंतरराष्ट्रीय केस स्टडी ने समुदाय-आधारित तंबाकू नियंत्रण के प्रभाव को दर्शाया।
उद्घाटन समारोह के दौरान उत्तर प्रदेश के माननीय उपमुख्यमंत्री डॉ. ब्रजेश पाठक ने विशेष रूप से संवेदनशील युवाओं में प्रथम बार तंबाकू सेवन की रोकथाम पर बल दिया, विशेषकर सहकर्मी दबाव, तनाव और मनोरंजन से जुड़े परिवेश में। उन्होंने शारीरिक श्रमिकों के अवकाश समय में तंबाकू उपयोग के स्थान पर स्वस्थ विकल्प अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया और युवाओं को सक्रिय जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने नागरिकों से तंबाकू के बजाय स्वास्थ्य को चुनने का आह्वान किया।
एक विशेष संदेश में माननीय केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री श्री जे. पी. नड्डा ने कहा कि जमीनी स्तर पर नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन से तंबाकू-मुक्त भारत का लक्ष्य पूर्णतः संभव है। उन्होंने चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों से तंबाकू नियंत्रण को केवल स्वास्थ्य विषय नहीं बल्कि एक व्यापक सामाजिक आंदोलन के रूप में देखने का आग्रह किया तथा विशेष रूप से युवाओं सहित समाज के सभी वर्गों तक सही संदेश पहुँचाने की आवश्यकता पर बल दिया।
सम्मेलन के दूसरे दिन नीतिनिर्धारित, रोकथाम-केंद्रित एवं बहु-क्षेत्रीय रणनीतियों पर विशेष ध्यान दिया गया। “तंबाकू कराधान को सुदृढ़ बनाना: साक्ष्य, नीति एवं वैश्विक परिप्रेक्ष्य” विषय पर आयोजित प्लेनरी सत्र में विशेषज्ञों ने तंबाकू कराधान को सेवन में कमी लाने और नई शुरुआत को रोकने का सबसे प्रभावी उपाय बताया। वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं, नीतिगत कमियों और जनस्वास्थ्य के अनुरूप मज़बूत कर नीतियों की आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा हुई।
इसके पश्चात “स्वास्थ्य क्षेत्र से आगे: संपूर्ण-सरकार एवं संपूर्ण-समाज दृष्टिकोण” विषयक संगोष्ठी आयोजित की गई, जिसमें नागरिक समाज, प्रवर्तन एजेंसियों, शिक्षा एवं शासन क्षेत्रों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। वक्ताओं ने इस बात पर ज़ोर दिया कि तंबाकू नियंत्रण के लिए स्वास्थ्य प्रणाली से आगे बढ़कर समन्वित बहु-क्षेत्रीय कार्रवाई आवश्यक है, जिससे कानूनों का प्रभावी अनुपालन हो, तंबाकू उद्योग के हस्तक्षेप को रोका जा सके और युवाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
एक अन्य प्रमुख प्लेनरी सत्र “स्टेज ज़ीरो को लक्ष्य करना – कैंसर के राजा के लिए एक समेकित दृष्टिकोण” में तंबाकू जनित कैंसर की रोकथाम हेतु प्रारंभिक हस्तक्षेप और समेकित रणनीतियों को सबसे प्रभावी उपाय बताया गया।
सम्मेलन के तीनों दिनों में डॉक्टरों, वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, जनस्वास्थ्य पेशेवरों एवं विद्यार्थियों द्वारा बड़ी संख्या में मौखिक एवं पोस्टर प्रस्तुतियाँ दी गईं। मौखिक प्रस्तुतियों में तंबाकू निवारण एवं स्वास्थ्य प्रणाली एकीकरण, युवा रोकथाम, मीडिया एवं व्यवहार परिवर्तन हस्तक्षेप, नीति एवं शासन, तथा संवेदनशील आबादी पर तंबाकू के प्रभाव जैसे विषय शामिल रहे। पोस्टर प्रस्तुतियों में तंबाकू जनित रोग, निवारण कार्यक्रम, उद्योग हस्तक्षेप, किशोर एवं व्यावसायिक तंबाकू उपयोग, हृदय रोग जोखिम, तंबाकू उपभोक्ताओं में एनीमिया, विद्यालय-आधारित रोकथाम, स्वास्थ्य प्रणाली सुदृढ़ीकरण, प्रारंभिक स्क्रीनिंग एवं स्वास्थ्यकर्मी प्रशिक्षण से जुड़े शोध प्रदर्शित किए गए।
समापन दिवस पर आयोजित सत्रों में उभरती चुनौतियों पर केंद्रित चर्चा की गई। भारत में निकोटीन लत के बदलते स्वरूप पर पैनल चर्चा में पारंपरिक तंबाकू उत्पादों से इलेक्ट्रॉनिक निकोटीन डिलीवरी सिस्टम (ENDS) एवं हीटेड उत्पादों की ओर बढ़ते रुझान पर चिंता व्यक्त की गई। विशेषज्ञों ने भ्रामक उद्योग प्रचार, नियामक कमियों और तत्काल निगरानी एवं नीतिगत हस्तक्षेप की आवश्यकता पर बल दिया।
इसके साथ ही “तंबाकू एंडगेम: तंबाकू-मुक्त भविष्य के लिए वैश्विक रणनीतियाँ” विषयक उच्चस्तरीय पैनल में भारत की तैयारी की समीक्षा की गई, जहाँ साहसिक, साक्ष्य-आधारित नीतियों, सशक्त प्रवर्तन, उद्योग हस्तक्षेप से सुरक्षा तथा सतत राजनीतिक प्रतिबद्धता की आवश्यकता को रेखांकित किया गया।
समापन (वैलेडिक्टरी) सत्र में विशिष्ट अतिथियों एवं निर्णायकों ने तीन दिवसीय सम्मेलन के सुव्यवस्थित, प्रभावशाली और सफल आयोजन के लिए आयोजन टीम की सराहना की। उन्होंने आयोजन समिति को विविध हितधारकों को एक मंच पर लाने और उच्च शैक्षणिक एवं जनस्वास्थ्य महत्व का सम्मेलन आयोजित करने के लिए बधाई दी। वक्ताओं ने विश्वास व्यक्त किया कि सम्मेलन की रिपोर्ट एवं सिफारिशें, जब औपचारिक रूप से प्रस्तुत की जाएँगी, तो उत्तर प्रदेश तथा पूरे भारत में महत्वपूर्ण नीतिगत एवं कार्यक्रमगत परिवर्तन लाने में सहायक होंगी। उन्होंने सामुदायिक चिकित्सा विभाग एवं एम्स रायबरेली, मंत्रालय, सहयोगी संस्थाओं, संकाय सदस्यों तथा सभी भागीदारों को उनके सहयोग के लिए धन्यवाद देते हुए राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण प्रयासों को आगे बढ़ाने में आयोजन टीम के योगदान की प्रशंसा की।
समग्र रूप से, यह तीन दिवसीय सम्मेलन इस निष्कर्ष पर पहुँचा कि रोकथाम-केंद्रित रणनीतियाँ, मज़बूत वित्तीय एवं नियामक नीतियाँ, समुदाय-नेतृत्वित पहलें, नवाचार और बहु-क्षेत्रीय सहयोग ही तंबाकू जनित रोगों के बोझ को कम करने और भारत को तंबाकू-मुक्त भविष्य की ओर तेज़ी से ले जाने का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं।