रायबरेली-परिवार रजिस्टर की नकल को गलत बताकर तीन हजार मांगने का आरोप, ग्राम पंचायत सचिव पर गंभीर आरोप
रिपोर्ट-ओम द्विवेदी(बाबा)
मो-8573856824
रायबरेली- योगी सरकार की भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के बीच ग्राम पंचायत स्तर पर सरकारी कामकाज को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हुए हैं। डलमऊ तहसील क्षेत्र के पूरे कलिका बक्श मजरे ऐहार गांव में ग्राम पंचायत सचिव पर जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए परिवार रजिस्टर की नकल को गलत बताकर नया रिकॉर्ड तैयार कराने के नाम पर तीन हजार रुपये मांगने का आरोप लगा है। मामले में शिकायतकर्ता धर्मेंद्र कुमार साहू पुत्र स्व. राकेश कुमार साहू ने लालगंज कोतवाली में तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की है।
शिकायतकर्ता धर्मेंद्र कुमार साहू के मुताबिक उनकी बहन नीलम साहू का आधार कार्ड किसी कारणवश निलंबित हो गया है। आधार अपडेट कराने के लिए उन्हें जन्म प्रमाण पत्र की आवश्यकता बताई गई, जिसके बाद उन्होंने प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया शुरू की। आरोप है कि 18 सितंबर को डाक के माध्यम से आवश्यक कागजात ग्राम पंचायत सचिव के पास भेजे गए थे। डाक का नंबर 3323 बताया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि कई बार फोन से संपर्क करने के बावजूद जन्म प्रमाण पत्र जारी नहीं किया गया।
29 सितंबर की नकल पर सचिव के हस्ताक्षर, फिर बताया गलत
धर्मेंद्र के अनुसार बीते बुधवार को ग्राम पंचायत सचिव सुनील कुमार ने उन्हें परिवार रजिस्टर की नकल लेकर पंचायत भवन बुलाया। उनका आरोप है कि परिवार रजिस्टर की यह नकल 29 सितंबर को तैयार की गई थी और उस पर ग्राम पंचायत सचिव के हस्ताक्षर भी थे। इसके बावजूद पंचायत भवन पहुंचने पर सचिव ने कथित तौर पर उसी नकल को गलत बताते हुए नया परिवार रजिस्टर तैयार कराने की बात कही।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि नया रिकॉर्ड तैयार कराने के नाम पर उनसे तीन हजार रुपये की मांग की गई। रकम मांगने को लेकर दोनों के बीच विवाद हो गया। मामला बढ़ने पर धर्मेंद्र ने डायल-112 पर सूचना दी। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और शिकायतकर्ता को कोतवाली में तहरीर देने के लिए कहा गया। इसके बाद धर्मेंद्र ने लालगंज कोतवाली में शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की।
‘सरकारी वेतन से भी नहीं भरता पेट?’—उठे सवाल
मामले ने पंचायत स्तर पर सरकारी दस्तावेज तैयार कराने की प्रक्रिया और कथित वसूली को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि शिकायतकर्ता के आरोप जांच में सही पाए जाते हैं तो यह मामला महज तीन हजार रुपये की कथित मांग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सरकारी दस्तावेज जारी करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी गंभीर सवाल खड़े होंगे।
वहीं, यदि आरोप निराधार पाए जाते हैं तो शिकायत की सत्यता पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है। ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच ही सच्चाई सामने ला सकती है।
सचिव ने आरोपों को बताया बेबुनियाद
उधर ग्राम पंचायत सचिव सुनील कुमार ने अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों को निराधार बताया है। सचिव का कहना है कि जन्म प्रमाण पत्र जारी करने के लिए आंगनबाड़ी और आशा बहू के पास उपलब्ध जन्म संबंधी रिकॉर्ड, टीकाकरण कार्ड सहित अन्य आवश्यक दस्तावेज मांगे गए थे। उनका कहना है कि उन्होंने किसी भी प्रकार की रकम की मांग नहीं की।
सचिव ने शिकायतकर्ता पर अभद्रता करने और आवश्यक दस्तावेज मांगे जाने पर दबाव बनाने का आरोप लगाया है।
अब जांच से खुलेगा तीन हजार की कथित मांग का राज
फिलहाल मामला शिकायतकर्ता के आरोप और ग्राम पंचायत सचिव के खंडन के बीच खड़ा है। तीन हजार रुपये की कथित मांग हुई थी या नहीं, 29 सितंबर को तैयार परिवार रजिस्टर की नकल सही थी या उसमें कोई त्रुटि थी और जन्म प्रमाण पत्र जारी करने के लिए कौन-कौन से दस्तावेज अनिवार्य थे—इन सभी सवालों का जवाब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
यदि जांच में रिश्वत मांगने के आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है। वहीं आरोप गलत पाए जाने पर शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए आरोपों की जिम्मेदारी भी तय हो सकती है। फिलहाल शिकायत के बाद पुलिस और संबंधित विभाग की जांच पर सभी की निगाहें टिकी हैं।

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