रायबरेली-चार साल के मासूम ने गरीबी को महसूस करने लिए रखा रोजा,,,

रायबरेली-चार साल के मासूम ने गरीबी को महसूस करने लिए रखा रोजा,,,

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रिपोर्ट-सागर तिवारी 

ऊंचाहार -रायबरेली -कहते हैं कि पूत के पांव पालने में ही नजर आ जाते है ।ऐसा ही कुछ क्षेत्र के कजियाना गांव निवासी समाजसेवी इरफान इदरीशी के बेटे चार वर्षीय अली इदरीशी में देखने को मिला। खुदा की इबादत के लिए उम्र नहीं हौसले की दरकार होती है. रमजान के पाक मौके पर नन्हे रोज़ेदार अली ने रमजान में जीवन का पहला रोजा रखकर इबादत की अनुकरणीय मिसाल पेश की है।
         रमज़ान मुबारक पर पहला रोज़ा रखने वाले अली ने कहा कि वह स्वप्रेरणा से रोजा रखे हैं। उनसे पूछा गया कि आपने इतनी कम उम्र में रोज़ा रखा तो उन्होंने कहा कि रोज़ा इसलिए रखते हैं  ताकि हम भी उन गरीबों की परेशानी महसूस करें जिन्हें एक वक़्त का खाना भी नसीब नहीं होता. उनका अहसास करते हैं और जो भूखे सोते हैं. उन्होंने कहा कि रोज़ा रख कर उन मुसलमानो को ये बताना चाहता हूं जो लोग रोज़ा नही रखते हैं कि जब मैं सिर्फ चार वर्ष का होकर रख सकता हूँ तो आप भी रख सकते हैं और अल्लाह को राज़ी कर सकते हैं. रोज़ा हर मुसलमान पर फर्ज़ हैं।  ऊंचाहार तहसील के ग्राम पंचायत कजियाना निवासी हाजी मोहम्मद इदरीश के पोते एवं इदरीसी ब्रदर्स के संचालक इरफान इदरीसी के पुत्र 4 वर्षीय अली इदरीसी ने तपती धूप की परवाह किए बिना अपने जीवन का पहला रोजा रखकर लोगों को हैरत में डाल दिया ।पिछले  वर्ष भी रमजान के पवित्र महीने में रोजा रखने की  ज़िद्द कर रहा था, लेकिन मां की ममता उसे ऐसा करने पर रोक देती थी । लेकिन इस वर्ष अली इदरीसी रोजा रखने के साथ-साथ मस्जिद में पांच वक्त की नमाज अदा कर रहे हैं।
 परिवार एवं रिश्तेदारों से मिल रहे बधाई संदेश से अली का मनोबल बढ़ रहा है। आने वाले रमजान में वह पूरे 30 रोजे रखने की कोशिश करेगा।