मायके में क्यों करवाई जाती थी पहली डिलीवरी? डॉक्टर ने बताईं 3 वजहें, जिन्हें सुन हर महिला की आंखें नम हो जाएंगी
प्रेग्नेंसी से लेकर डिलीवरी तक हमारे समाज में कई तरह की मान्यताएं और परंपराएं चली आ रही हैं। इन्हीं में से एक है पहली डिलीवरी मायके में होनी चाहिए। आइए डॉक्टर से समझने की कोशिश करते हैं कि आखिर क्यों कहा जाता है कि पहली डिलीवरी मायके में ही होनी चाहिए।
अक्सर बड़े-बुज़ुर्गों से ये बात सुनने को मिलती है कि पहली डिलीवरी तो मायके में ही होनी चाहिए। नई मां बनने वाली हर लड़की ने ये बात ज़रूर कभी न कभी सुनी होगी। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर ऐसा क्यों कहा जाता है? अगर नहीं, तो फिर आपको एक बार पीडियाट्रिशन डॉक्टर माधवी भारद्वाज की बात जरूर सुननी चाहिए, क्योंकि उन्होंने हाल ही में एक इंस्टाग्राम वीडियो में विस्तार से बताया कि इस सलाह के पीछे बुज़ुर्गों का असली मकसद क्या रहा होगा।
क्यों वो कहते थे कि पहली डिलीवरी जच्चा के मायके में ही होनी चाहिए। वहीं, डॉक्टर की बताई हुई बातों को जानने के बाद संभव है कि हर महिला इमोशनल हो जाए, तो चलिए जानते हैं कि आखिर ऐसा क्या एक्सपर्ट ने।
इंस्टाग्राम वीडियो में पीडियाट्रिशन डॉक्टर माधवी भद्राज कहती हैं, 'क्या आपने कभी सोचा है कि पहले ऐसा क्यों कहा जाता था कि पहली डिलीवरी तो मायके में ही होगी?' शायद इसके पीछे एक नहीं बल्कि कई कारण होते होंगे।
एक्सपर्ट आगे बताती हैं कि दरअसल ऐसा इसलिए कहा जाता था क्योंकि, जो महिला पहली बार मां बनने जा रही है, उसने अपनी जिंदगी के कई बड़े चैलेंज- जैसे स्कूल का पहला दिन, दसवीं की परीक्षा, कॉलेज का एंट्रेंस एग्जाम, सब कुछ वहीं फेस किए होते हैं। इसीलिए, मायका उसके लिए एक तरह से कंफर्ट जोन होता है, जहां उसका अपना पूरा सपोर्ट सिस्टम मिलता है।
डॉक्टर भारद्वाज बताती हैं कि जब कोई महिला मां बनती है तो यह उसकी जिंदगी का अब तक का सबसे मुश्किल 'गेम' होता है। इसलिए कहा जाता था कि पहली डिलीवरी मायके में ही होनी चाहिए, ताकि वह अपने होमग्राउंड पर ही खेले। अब जैसे हम अपने बच्चे की शक्ल देखकर समझ जाते हैं कि उसे भूख लगी है या नींद आ रही है, ठीक वैसे ही 26 या 27 साल की जच्चा की मां भी तुरंत समझ जाती है कि बेटी को इस वक्त क्या जरूरत है।
चाइल्ड स्पेशलिस्ट बताती हैं कि नई मां अपने इमोशंस को अपने सपोर्ट सिस्टम के साथ बेहतर तरीके से संभाल पाती है, बिना ये सोचे कि किसी को बुरा लगेगा या नहीं। शायद इन्हीं इमोशनल चैलेंजेज को ध्यान में रखते हुए पहले कहा जाता था कि पहली डिलीवरी मायके में ही होनी चाहिए।
एक्सपर्ट कहती हैं कि पोस्टपार्टम पीरियड एक बेहद मुश्किल दौर होता है। इस समय महिला के हार्मोन में बहुत ज्यादा अप एंड डाउन होता है। कभी गुस्सा आता है, कभी रोने का मन करता है, कभी किसी पर चिल्ला देने का मन करता है। कई बार ससुराल में वह अपने मन की बात खुलकर नहीं कह पाती और सब कुछ अंदर ही दबा लेती है। अंदर ही अंदर कुढ़ती रहती है। ऐसे में वह खुद अपने को भी इफेक्ट करती है और बच्चे को भी परेशान करती है।
डॉक्टर अंत में कहती हैं कि अगर कोई महिला अपने मायके में डिलीवरी करवाना चाहती है या प्रसव के बाद वहां जाना चाहती है, तो उसे जाने देना चाहिए। इसमें बुरा मानने की नहीं, मन जानने की बात है। बस जरूरत है थोड़ा नजरिया बदलने की।
डिस्केलमर: इस लेख में दी गई सूचना पूरी तरह इंस्टाग्राम रील पर आधारित है। एनबीटी इसकी सत्यता और सटीकता की जिम्मेदारी नहीं लेता है। किसी भी जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

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