रायबरेली-शियाओं के पहले इमाम जानशीन-ए-रसूले खुदा का निकला ताबूत"

रायबरेली-शियाओं के पहले इमाम जानशीन-ए-रसूले खुदा  का निकला ताबूत"

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रिपोर्ट-सागर तिवारी 

लोगों ने नम आंखों से दिया पुरसा

ऊंचाहार - रायबरेली ,ग़मगीन माहौल में शियाओं के पहले इमाम जानशीन-ए-रसूले खुदा  का जुलूस वार्ड नम्बर 9 फाटक भीतर से भीतरी गाँव के लिये निकाला गया। जुलूस में हैदर मौला या अली मौला की सदाओं से पूरा नगर गूंज उठा।
     अन्जुमने नक़वीया ने अपना पुरसा पेश किया। यह जुलूस करीब एक सौ एक वर्षीय पुराना है । यहां ताबूत का जुलूस,1923 से उठता आ रहा है ।मरहूम अनीस हैदर अंछू बाबा के हाका यह जुलूस-ए-ताबूत मौला अली की याद में हर साल 21,रमज़ान की शब  ऐतिहासिक जुलूस निकाला जाता है।बताते चलें हज़रत अली  प्राफिट मोहम्मद साहब के दामाद और अबू तालिब के पुत्र थे। जुलूस में हज़ारो की संख्या में शिया समुदाय के साथ हर धर्म के लोग शिरकत करते हैं । इस जुलूस में बड़ी संख्या में महिलाए और बच्चे शिरकत कर हज़रत अली को पुरसा दिया। ज्ञात हो कि  हज़रत अली ने अपना जीवन जन सेवा में बिताया और उनकी जनसेवा में कभी मज़हब देखकर कोई काम नहीं किया। बताया जाता है की रात के अंधेरे में जब लोग सो रहे होते थे तब अपनी रियाया की छुपकर गरीबों की मदद एवं उनको खुद रोटी पहुंचाया करते थे। धर्म के जानकारों का कहना है कि  हज़रत अली इल्म का समंदर थे वे लोगों को इल्म बांटते थे और उनका पसंदीदा काम इल्म बांटना ही था वह लोगों से कहते थे जो प्रश्न पूछना है पूछ लो,सिवाए मौत के,नहजुल बलाग़ा उनके खुतबों और खतों की एक किताब है,जो कि अनेक भाषाओं में अनुवाद हो चुकी है।
     यह जुलूस वार्ड नंबर 9 इमामबाड़ा मौलवी मोहम्मद मेंहदी  निकल कर वार्ड नम्बर10 मे इमामबाड़ा अबू तालिब पर रुख कर छोटी कर्बला मे संपन्न हुआ। जुलूस के मद्देनज़र प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किये गए ।चप्पे चप्पे पर पुलिस की पैनी रही।शासन प्रशासन के आला अधिकारी भी मौके पर मौजूद रहे।इस प्रोग्राम को सफल बनाने के लिये अन्जुमने नक़वीया के सर्द और सेक्रेटरी  फ़वाद नक़वी और सुल्तान अब्बास साहब ने शासन और प्रशासन का शुक्रिया अदा किया है।