रायबरेली-गंदगी से गोकना घाट पर सिसक रहा मां गंगा का आंचल

रायबरेली-गंदगी से गोकना घाट पर सिसक रहा मां गंगा का आंचल

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रिपोर्ट-सागर तिवारी

ऊंचाहार - रायबरेली-  गंगाजल की मान्यता अमृत जैसा पावन और निर्मल जल की है। लोग इस जल को घर में रखकर महीनों तक इसे पीते थे , गंगा तटों पर लोग इस स्वच्छ जल को पेयजल के रूप में खूब प्रयोग करते थे , किंतु अब मां का आंचल मैला हो गया है , जल इतना दूषित है कि लोग नहाने से भी झिझक रहे है । नदी में प्रवाह के साथ आने वाली गंदगी से गंगा मां का आंचल सिसक रहा है ।
    इस समय गंगा का जलस्तर काफी कम है । विगत तीन दिनों से इसमें कुछ पानी छोड़ा गया तो करीब डेढ़ फिट जलस्तर बढ़ा है । इसी के साथ जल में जलीय वनस्पतियां और कीचड़ बहकर तटों के किनारे एकत्र हो गया है । सड़ी हुई जलीय वनस्पतियों से उठती दुर्गंध गंगा तटों के वातावरण को दूषित कर रही है । क्षेत्र के गोकना गंगा घाट पर गंगा का प्रवाह दक्षिण वाहिनी है । इसलिए पश्चिम से आने वाला कल  गोकना घाट पर टकराकर दक्षिण को बहता है । इस कारण से जल के साथ आने वाली गंदगी गोकना तट पर  एकत्र हो जाती है । 
 

इनसेट
स्नान तक से झिझक रहे लोग 

गंगा नदी में स्नान करके पुण्य लाभ अर्जित करने श्रद्धालुओं के लिए गंगा का दुर्गंध युक्त जल बड़ी समस्या बना हुआ है । हालात यह है कि तट पर स्नान करने से लोग झिझक रहे है । गंगा घाट पर आने वाले स्नानार्थी जलस्तर कम होने के कारण तट से काफी अंदर गहरे जल में जाकर स्नान कर रहे है । जिससे दुर्घटना की संभावना बनी हुई है । 


खतरनाक जलीय जंतुओं का बढ़ा खतरा 

गोकना गंगा घाट के पास कुछ माह पूर्व मगरमच्छ देखा गया था । यह मगरमच्छ करीब एक घंटे तक गोकना गांव के पास गहरे जल में रुका हुआ था । उसके बाद जल प्रवाह के साथ आगे बढ़ गया था । इस समय गंगा तट का किनारा गंदगी से पटा हुआ है , ऐसे में लोग गहरे जल में जाकर स्नान कर रहे है , जिससे जलीय जंतुओं का खतरा बढ़ गया है । गोकना गंगा घाट के वरिष्ठ पुरोहित जितेंद्र द्विवेदी बताते हैं कि स्नानार्थियों को सचेत करके ही गहरे जल में स्नान के लिए जाने की अनुमति दी जा रही है । साथ ही स्मानार्थियों की बराबर निगरानी भी की जाती है । साथ ही गंगा तट की स्वच्छता के बारे में भी लोगों को निरंतर जागरूक किया जाता है ।