रायबरेली-कौड़ियों के भाव बिकती रही बिजली विभाग की सरकारी जमीन, साजिश में शामिल थे जिम्मेदार,,,,

रायबरेली-कौड़ियों के भाव बिकती रही बिजली विभाग की सरकारी जमीन, साजिश में शामिल थे जिम्मेदार,,,,

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 रिपोर्ट-सागर तिवारी


ऊंचाहार -रायबरेली -नगर के मध्य में स्थित बिजली विभाग की सरकारी बेस कीमती जमीन पर आज दर्जनों भवन बन गए है । सरकारी जमीन का सौदा वर्षों से हो रहा था , उस पर कब्जा करके भवन खड़े हो रहे थे , किंतु जिम्मेदार कार्रवाई करने के स्थान पर खुद इस सौदेबाजी में शामिल थे । इस सारे खेल में पूर्व में तैनात रहे एक लेखपाल की भूमिका जांच के दायरे में है , तो बन चुके भवनों पर खतरा मंडरा रहा है ।
         राजस्व अभिलेखों में नगर की भूमि संख्या 3732, 3733, 3734, 3735 क, 3736 क और 3737 में बिजली विभाग के चीफ इंजीनियर के नाम दर्ज है। इस भूमि का कुल रकबा करीब साढ़े तीन बीघा है। जबकि वर्तमान में उपकेंद्र के पास बमुश्किल डेढ़ बीघा भूमि है । इसके अलावा उपकेंद्र के आसपास करीब दो बीघे भूमि पर दर्जनों मकान बने हुए है।

कई दशक से होती रही सरकारी भूमि की विक्री

बिजली विभाग की सुरक्षित भूमि पर कई दशक से अवैध रूप से कब्जा करके क्रय विक्रय का खेल चलता रहा है। इस जमीन को कई बार खरीदा और बेंचा गया है। बताते है कि बिजली विभाग के एक अवर अभियंता ने भी इसमें खेल किया है। अब जब भूमि की तालाश जारी हुई है तो इस भूमि पर बने दर्जनों भवन कार्रवाई की जद में आ गए हैं। यहीं नहीं पूर्व में यहां तैनात रहे लेखपाल सी के दीक्षित की भूमिका भी जांच के दायरे में है । बताया जाता है कि जब करोड़ों रुपए कीमत की सरकारी भूमि पर कब्जा हो रहा था तब यह लेखपाल मौके पर खड़ा होकर निर्माण करवा रहा था ।

शासन को भेजी गई रिपोर्ट

एसडीएम सिद्धार्थ चौधरी ने बिजली विभाग की भूमि को लेकर एक रिपोर्ट शासन में और बिजली विभाग के अधिकारियों को भेजा है । अब इसमें कार्रवाई को लेकर संभावनाएं बढ़ गई है । सरकारी भूमि को मुक्त कराने के लिए भवनों के ध्वस्तीकरण की संभावना बढ़ गई है । एसडीएम ने बताया कि शासन से निर्देश मिलने के बाद कार्रवाई की जाएगी। अभी तक इसमें शासन से कोई निर्देश नहीं आया है ।