रायबरेली-रमजान का महीना सब्र और कद्र के हौसलों को बनाता है मजबूत,,,

रायबरेली-रमजान का महीना सब्र और कद्र के हौसलों को बनाता है मजबूत,,,

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 रिपोर्ट-सागर तिवारी 


ऊंचाहार -रायबरेली-रहमतों और बरकतों के रमजान उल मुबारक महीने में मुस्लिम समुदाय के लोगों की दिनचर्या बदल जाती है। इस माह में रोजा रखकर लोग रब की इबादत कर नेकी एवं रब का कुर्ब हासिल करते हैं। रमजान के महीने में मुस्लिम महिलाओं का कामकाज और जिम्मेदारी अधिक बढ़ जाती है। रोजा नमाज एवं रब की इबादत के अलावा घरेलू कार्य संभालने के साथ दोहरी जिम्मेदारी भी रहती है।
        नगर पंचायत की पूर्व चेयरमैन शाहीन सुलतान ऐसी महिला है , जो पिछले कई दशक से रोजे रखकर अल्लाह की इबादत के साथ घर का कामकाज और समाज सेवा भी करती रहती है । रमजान का महत्व बताते हुए उन्होंने कहा कि  रमजान का मतलब सिर्फ भूखे प्यासे रहने भर से नहीं है। संयम व इबादत से जीवन का खाका इस तरह से खीचना है कि ताउम्र रमजान का असर नजर आए। वह चीज जो इस माह में तप, संयम व साधना से अर्जित की है, जीवन में रच बस जाए। इसी का नाम रमजान है। कोई यह सोचे कि रमजान में भूखे प्यासे रह लिए और फर्ज पूरा हो गया, तो यह सोच सही नहीं है। रमजान तो जीवन को सही तरीके से गुजारने का एक प्रशिक्षण है। जैसे आग में तपकर सोना कुंदन बनता है, वैसे ही रमजान में इंसान का व्यक्तित्व व चरित्र निखरता है। उन्होंनेन वैज्ञानिक तौर तरीके के अनुसार बताया कि रोजा रखने से भूख प्यास के कारण शरीर के सारे रोग विकार दूर होते हैं। शारीरिक शुद्धि होती है ।वही कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी से भी इंसान को छुटकारा मिलता है। इसमें जरूरी है मुस्लिम समुदाय के लोगों को प्रत्येक रोजे का महत्व समझते हुए रोजा रखना चाहिए। वहीं दूसरी ओर हर वक्त की नमाज बीमार होने पर भी सोते खड़े बैठे- लेटे पढ़ी जा सकती है। शाहीन सुलतान बताती हैं कि माहे रमजान बारह महीनों में सबसे अधिक पाक तथा मुबारक महीना है। इसमें जो अल्लाह की इबादत करता है, उनके लिए नेकी का सबाब कई गुना बढ़ जाता है। माहे रमजान की इबादत सब्र और कद्र के हौंसलों को मजबूत बनाती है। साथ ही रमजान का महीना बुराइयों से तौबा करके नेकी की राह पर चलने का संदेश देता है। भूख और प्यास को काबू करना आसान है लेकिन हम हाथ, कान, आंख तथा जुबान से कोई गुनाह न करें यह माहे रमजान की सबसे बड़ी सीख है।