रायबरेली-अतीत के रिश्तों की डोर पर परिवार के सदस्य के लिए सोनिया की भावनात्मक दुहाई

रायबरेली-अतीत के रिश्तों की डोर पर परिवार के सदस्य के लिए सोनिया की भावनात्मक दुहाई

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रिपोर्ट-सागर तिवारी 

- ससुर सास से लेकर अपने राजनैतिक सफर की दिलाई याद



रायबरेली । सोनिया गांधी अब रायबरेली की नहीं रही , 15 साल का उनका रायबरेली से सियासी नाता टूट गया । सियासी रिश्तों की इस डोर को तोड़ते हुए सांसद सोनिया गांधी ने रायबरेली की जनता के नाम एक भावनात्मक चिट्ठी लिखी , जिसमे उन्होंने अपनी पीढ़ियों की दुहाई दी और परिवार की इस परंपरागत सियासी डोर को किसी अगले परिवार के सदस्य के साथ जुड़ने की उम्मीद जताते हुए रायबरेली से निजी चुनावी नाते को अलविदा कह दिया ।
     सोनिया गांधी का पत्र पूरी तरह उसी भावनात्मक लय पर है , जिस भावनात्मक लय के सहारे वह रायबरेली से चुनाव जीतती रही हैं। रायबरेली के जनता की नब्ज को भली भांति समझ चुकी सोनिया ने एक बार फिर उसी भावनात्मक रिश्तों की दुहाई दी , अपनी विवशता बताओ और अपने ससुर फिरोज गांधी से लेकर इंदिरा गांधी तक का जिक्र किया । उन्होंने अपने पत्र में एकबार फिर भावनात्मक पारिवारिक रिश्ता , ससुराल जैसा प्यार , परिवार जैसे शब्दों से रायबरेली के जनमानस के दिलों को झकझोरा साथ ही यह स्पष्ट भी कर दिया कि रायबरेली से उनके ही परिवार का कोई सदस्य अगली बागडोर संभालेगा , और उम्मीद भी जता दी कि उसके साथ भी यही भावनात्मक रिश्ता बना रहेगा ।
    दरअसल सोनिया गांधी जिस रिश्तों की बात हमेशा रायबरेली के लोगों के साथ करती रही है , वह रायबरेली के लोगों को भाता भी खूब है । यही कारण रहा कि 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर के बावजूद रायबरेली की जनता उनके साथ खड़ी थी । चुनाव के बाद रायबरेली के लोगों से उनकी दूरी , तमाम शिकायतों के बावजूद जब चुनाव आता है तो इसी रिश्तों की दुहाई देकर कांग्रेस चुनावी वैतरणी पार हो जाती है । अब जब रायबरेली से वह चुनावी नाता तोड़ रही है तो उन्होंने उसी भावनात्मक रिश्तों की दुहाई देकर अपने परिवार के लिए भावी जमीन भी तैयार कर रही हैं।  इसी सियासी लाभ के उद्देश्य से कांग्रेस की पूरी टीम सोनिया गांधी के पत्र को जमकर वायरल कर रही है , ताकि आम जनमानस तक यह भावनात्मक पत्र और रिश्तों की बात पहुंच जाए । पत्र में यह भी स्पष्ट हो गया है कि रायबरेली से उनकी बेटी प्रियंका या बेटा राहुल उम्मीदवार होंगें। क्योंकि पत्र के अंत में सोनिया ने लिखा है कि  " मुझे पता है कि हर मुश्किल में मुझे और मेरे परिवार को आप भी   हर मुश्किल में वैसे ही संभाल लेंगे , जैसे हमेशा संभालते रहे है ।