रायबरेली-ऊंचाहार के कंदरावा में फर्जी दस्तावेज के आधार पर दलित की भूमि खरीदने का मामला,,,,,,?

रायबरेली-ऊंचाहार के कंदरावा में फर्जी दस्तावेज के आधार पर दलित की भूमि खरीदने का मामला,,,,,,?

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रिपोर्ट-सागर तिवारी 


 अधिकारियों ने फर्जीवाड़े की पुष्टि की पर पुलिस को नहीं मिला साक्ष्य ,लगा दी अंतिम रिपोर्ट 

ऊंचाहार-रायबरेली, औने पौने दाम पर किसानों की जमीन खरीदकर प्लाटिंग करने वाले भूमाफियाओं का रसूख केवल रजिस्ट्री ऑफिस तक ही नहीं पुलिस विभाग ने भी सिर चढ़कर बोलता है । दलित की भूमि खरीद में डीएम के फर्जी हस्ताक्षर से कूट रचित दस्तावेज प्रस्तुत करने के मामले में अधिकारी प्रपत्र को फर्जी बता रहे थे , इसके बावजूद पुलिस ने इस मुकदमे में साक्ष्य न मिलने की बात कहकर अंतिम रिपोर्ट लगा दी । अब मामला न्यायालय और अधिकारियों के पास पहुंचा है तो मामले में पुनः जांच और कार्रवाई शुरू होने जा रही है ।
   मामला क्षेत्र के गांव पूरे गुलाब मजरे कंदरावा का है । गांव के अनुसूचित जाति के निवासी महराजदीन गांव की भूमि संख्या 4282 ख के सहखतेदार थे । उनसे इस जमीन का सौदा ऊंचाहार कस्बा निवासी अलमदार ने किया , और निबंधन कार्यालय में दलित की भूमि विक्रय का डीएम द्वारा निर्गत फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत करके जमीन का बैनामा करा लिया । यही नहीं भूमाफिया ने इस जमीन की बिना किसी नियम का पालन किए प्लाटिंग की , और भूमि के काफी भाग की विक्री भी कर दी । मामले में सन 2021 में इस भूमि की दूसरी खातेदार रामकली ने शिकायत की । ऊंचाहार कस्बा निवासी मीसम हैदर ने जिलाधिकारी द्वारा निर्गत दलित की भूमि विक्रय के अनुमति पत्र के बारे में सूचना का अधिकार के तहत जानकारी तो पूरे मामले का खुलासा हो गया । पता चला कि भूमि विक्रय अनुमति पत्र संख्या 109/ डीएलआरसी - अनु/ 08 दिनांक 28 फरवरी 2008 फर्जी पाया गया । जांच में पता चला कि यह अंकन अभिलेखों में है ही नहीं। यह अनुमति पत्र फर्जी तरीके से डीएम के फर्जी हस्ताक्षर करके कूट रचित तैयार किया गया है । इसके बाद कोतवाली में भूमाफिया आलमदार के विरुद्ध संगीन धाराओं में अभियोग पंजीकृत किया गया । मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस भी इस खेल में शामिल हो गई । सूचना का अधिकार के तहत विभिन्न स्तर से अधिकारियों ने अनुमति पत्र को फर्जी और कूट रचित बताते हुए जारी पत्र के बावजूद विवेचक उपनिरीक्षक रामराज कुशवाहा को साक्ष्य नहीं मिल सके , और उन्होंने मामले में साक्ष्य के अभाव में अंतिम रिपोर्ट लगा दी । 
    पुलिस के खेल की जानकारी मिलने पर पीड़ित पक्ष ने न्यायालय की शरण ली और न्यायालय में सारे साक्ष्य प्रस्तुत किए , उसके बाद न्यायालय ने पुलिस की अंतिम रिपोर्ट को अस्वीकार कर दिया है । अब मामले में नए सिरे से जांच और कार्रवाई शुरू हुई है । पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों से इसमें तत्काल गिरफ्तारी और भूमि बैनामे की निरस्त करने की मांग की गई है । मामला पुनः जांच के दायरे में आने से हड़कंप मचा हुआ है।