रायबरेली-लूकचांदपुर में हरे पेड़ों पर वन माफियाओं की कुल्हाड़ी, वन विभाग की निगरानी पर उठे सवाल

रायबरेली-लूकचांदपुर में हरे पेड़ों पर वन माफियाओं की कुल्हाड़ी, वन विभाग की निगरानी पर उठे सवाल

-:विज्ञापन:-

 

रायबरेली-उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जहां एक ओर पर्यावरण संरक्षण के लिए 'पेड़ लगाओ, पेड़ बचाओ' का संदेश दे रहे हैं, वहीं डलमऊ वन क्षेत्र के लूकचांदपुर में कथित रूप से हरे-भरे पेड़ों की अवैध कटान का मामला सामने आ रहा है। लगातार हो रही पेड़ों की कटाई ने वन विभाग की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि क्षेत्र में रात के अंधेरे से लेकर दिन के उजाले तक हरे पेड़ों की कटान की जा रही है। सवाल यह है कि आखिर वन विभाग की निगरानी के बावजूद पेड़ों पर आरी और कुल्हाड़ी कैसे चल रही है? क्या वन माफियाओं को विभागीय कार्रवाई का कोई डर नहीं रह गया है?

इस मामले में वन विभाग में तैनात वनरक्षक राकेश की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप हैं कि क्षेत्र में उनकी मौजूदगी के बावजूद अवैध कटान पर प्रभावी रोक नहीं लग पा रही है। कुछ स्थानीय लोगों ने वनरक्षक पर लकड़ी के ठेकेदारों के साथ मिलीभगत और ठेकेदारी में साझेदारी जैसे गंभीर आरोप भी लगाए हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।

चर्चा यह भी है कि वनरक्षक राकेश के साथ दो कथित निजी सहयोगी या सिक्योरिटी गार्ड क्षेत्र में रहते हैं। सवाल उठता है कि इनकी नियुक्ति किसके आदेश से हुई है और इन्हें किस अधिकार के तहत विभागीय कार्यों में लगाया गया है? क्या इनका कोई आधिकारिक रिकॉर्ड वन विभाग के पास मौजूद है?

सबसे बड़ा सवाल डलमऊ रेंजर की निगरानी व्यवस्था को लेकर है। यदि लूकचांदपुर में लगातार हरे पेड़ों की कटान हो रही है, तो जिम्मेदार कर्मचारियों की जवाबदेही आखिर कौन तय करेगा? क्या वन विभाग के उच्चाधिकारी इस पूरे मामले की जांच कराएंगे?