रायबरेली-वानर सेना के देवदूतों ने पेश की इंसानियत की मिसाल, दो मासूम बच्चों की मदद को पहुँची टीम

रायबरेली-वानर सेना के देवदूतों ने पेश की इंसानियत की मिसाल, दो मासूम बच्चों की मदद को पहुँची टीम

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रिपोर्ट-ओम द्विवेदी(बाबा)

मो-8573856824

12 वर्षीय विजय सोनकर अपनी 6 वर्षीय बहन को लेकर पहुँचा था रायबरेली जिला अस्पताल, वानर सेना ने आगे बढ़कर संभाली जिम्मेदारी

रायबरेली। इंसानियत आज भी जिंदा है और इसका उदाहरण रायबरेली में देखने को मिला, जहाँ दो मासूम बच्चों की परेशानी जानकर वानर सेना के देवदूत मदद के लिए आगे आए। प्रतापगढ़ निवासी 12 वर्षीय विजय सोनकर अपनी महज छह साल की छोटी बहन के इलाज के लिए रायबरेली जिला अस्पताल पहुँचा था। कम उम्र में बहन की देखभाल और इलाज की चिंता उठाते इस बच्चे की स्थिति ने संवेदनशील लोगों को झकझोर दिया।

मामले की जानकारी देवेन्द्र के माध्यम से वानर सेना के साथियों तक पहुँची। इसके बाद टीम ने बच्ची के इलाज और देखभाल की जिम्मेदारी में सहयोग का निर्णय लिया। बच्ची को बेहतर उपचार के लिए निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया तथा शुरुआती इलाज और खाने-पीने की व्यवस्था में सहयोग किया गया। इसके बाद बच्चों की मदद के लिए मुहिम चलाकर लोगों से सहयोग की अपील की गई।

अस्पताल पहुँचकर देवदूतों ने बढ़ाया मदद का हाथ

वानर सेना के केपी सिंह, अभिषेक सिंह, बंटी सिंह, गौरव सिंह, उबैद, आलोक, राघवेन्द्र, सचिन भदौरिया, देवेन्द्र सहित अन्य साथियों ने इस मुहिम में सहयोग किया। टीम ने अस्पताल पहुँचकर बच्चों का हाल जाना और उनके परिवार को भरोसा दिलाया कि इस कठिन समय में वे अकेले नहीं हैं।

वानर सेना के जिला अध्यक्ष धीरज सिंह चौहान ने सहयोग करने वाले सभी साथियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि समाज की असली ताकत तब दिखाई देती है, जब किसी अनजान व्यक्ति का दर्द देखकर लोग बिना किसी स्वार्थ के मदद के लिए आगे आते हैं।

इस मुहिम में संरक्षक बृजेश सिंह, अजीत सिंह तथा पदाधिकारियों प्रांशु, बंटी, कुंवर, गौरव और संदीप सहित अन्य साथियों का भी सहयोग रहा।

12 वर्षीय विजय के संघर्ष ने झकझोरा

जिस उम्र में बच्चों के कंधों पर स्कूल के बस्ते होने चाहिए, उस उम्र में विजय अपनी छोटी बहन के इलाज की चिंता कर रहा था। उसकी परिस्थिति समाज के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा करती है कि संकट में फँसे ऐसे बच्चों का सहारा कौन बनेगा?

वानर सेना के साथियों ने अपने प्रयासों से यह संदेश दिया कि समाज में संवेदना और सहयोग की भावना आज भी जीवित है। किसी जरूरतमंद की मदद करना केवल आर्थिक सहयोग देना नहीं, बल्कि उसके भीतर उम्मीद और भरोसा जगाना भी है।

वानर सेना ने लोगों से अपील की कि वे जरूरतमंद परिवारों और बीमार बच्चों की मदद के लिए आगे आएँ, ताकि आर्थिक अभाव किसी बच्चे के इलाज में बाधा न बने।

इंसानियत जिंदाबाद, सेवा का भाव जिंदाबाद!