यूपी सरकार के इरादों पर तमाचा है PCS अफसर का इस्तीफा, सिटी मजिस्ट्रेट के फैसले पर बोले शंकराचार्य

यूपी सरकार के इरादों पर तमाचा है PCS अफसर का इस्तीफा, सिटी मजिस्ट्रेट के फैसले पर बोले शंकराचार्य

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रिपोर्ट-ओम द्विवेदी(बाबा)

मो-8573856824

बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री द्वारा लिए गए इस्तीफे के फैसल को शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने सराहा। पीसीएस अफसर के इस्तीफे की खबर सुनकर शंकराचार्य ने कहा कि उन्होंने कितना परिश्रम किया होगा।

उन्होंने पद छोड़ कर अपने आपको ऐसे सरकार से मुक्ति पा ली, जिसने शंकराचार्य का अपमान किया हो, छोटे-छोटे बटुकों का चोटी पकड़ कर खींचा हो, यूजीसी जैसे हिन्दू समाज को बांटने वाला कानून लाया हो। अलंकार ने प्रदेश सरकार के कारनामों से आहत होकर पद छोड़कर सरकार को चेतावनी देते हुए सीटी बजा दी है। अभी तक राजनीतिक पार्टियों की बात कही जा रही थी, अब एक सरकारी अधिकारी का इस्तीफा सरकार के इरादों पर करारा तमाचा है।

शंकराचार्य से मिलने जा सकते हैं डिप्टी सीएम केशव

मौनी अमावस्या के दिन स्नान से रोके जाने के खिलाफ अपने शिविर के बाहर नौवें दिन भी शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती बैठे रहे। अटकलें लगाई जा रही थीं कि रविवार को सूबे के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य शंकराचार्य से मिलने आ सकते हैं। डिप्टी सीएम ने शंकराचार्य से मिलने का कोई कार्यक्रम नहीं होने की बात कहकर अटकलों पर विराम लगा दिया था। डिप्टी सीएम के नहीं आने के सवाल पर शंकराचार्य ने कहा, नहीं आए तो हमने यही कहा कि उन्हें रोका गया होगा, दबाव बनाया गया होगा, यही तो हम कह रहे हैं। हमारा कोई उनसे बातचीत थोड़े हुई है।

शंकराचार्य ने कहा,'हम यहां मुख्यमंत्री या उपमुख्यमंत्री का इंतजार थोड़े ही कर रहे हैं कि उनके आने से हमारा वजूद बढ़ जाएगा। हमारा वजूद सत्य सनातन से है, हिंदुओं से है। हमने तो बस इतना कहा था कि कोई एक अदना सा कर्मचारी भी आ जाता, भूल सुधार कर लेता और भविष्य में ऐसी घटना की पुनरावृत्ति नहीं होगी। इसका लिखित आश्वासन देता, बात खत्म हो जाती, हम उठ जाते, किंतु वह सोच रहे होंगे कि कब तक बैठे रहेंगे, तो हम थकने वाले नहीं हैं और न ही किसी दबाव में उठने वाले हैं। हमारा यहां जितने दिन का कार्यक्रम बना है तब तक हम यहीं बैठेंगे। इस मेले में मसला हल नहीं हुआ तो अगले मेले में भी हम यहीं बैठेंगे।

रामदेव को शंकराचार्य परंपरा का ज्ञान नहीं

शंकराचार्य ने बाबा रामदेव को लेकर एक बार फिर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि रामदेव को शंकराचार्य परंपरा का ज्ञान नहीं है। वह आर्य परंपरा के हैं, ऐसे व्यक्ति को क्षमा ही किया जा सकता है। बार-बार पालकी से जाने की बात कहने वाले यह क्यों नहीं समझते कि गणतंत्र दिवस पर भारत के राष्ट्रपति बग्घी पर ही क्यों चलते हैं, क्या वह बिना बग्घी के नहीं निकल सकते। यह तो एक परंपरा है जो निभाई जा रही है। शंकराचार्य ने कहा, चोटियां केवल ब्राह्मण की नहीं खींची गई है, अपितु चोटियां खींचकर ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र यानी पूरे हिंदू समाज को अपमानित किया गया है। ये हिन्दुओं की विरोधी सरकार है। हम गणतंत्र दिवस मना रहे हैं, लेकिन गण का हाल यह है कि साधु संत पीटे जा रहे हैं। संविधान की शपथ लेने वाले लोगों की ये हरकत है। आखिर ऐसे गणतंत्र मनाने का क्या औचित्य है।