रायबरेली-भगवान शिव के अनुष्ठान समापन पर नाजनपुर में हुआ आल्हा गायन

रायबरेली-भगवान शिव के अनुष्ठान समापन पर नाजनपुर में हुआ आल्हा गायन

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     रिपोर्ट-सागर तिवारी


- मछला हरण के प्रसंग में झूमे श्रोता 

ऊंचाहार-रायबरेली - गांवों में आज भी लोक साहित्य का बड़ा महत्व है । भारतीय संस्कृति और हमारे गौरवपूर्ण इतिहास को संजोए लोक साहित्य आज भी गांवों की चौपालों की शान है । मंगलवार को क्षेत्र के नजनपुर गांव के शिवालय पर सावन महीने में भगवान शिव के अनुष्ठान के समापन पर आल्हा गायन का कार्यक्रम आयोजित हुआ । बौद्धिक विचार मंच के संयोजक रती पाल शुक्ल द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या ने लोग शामिल हुए।
         लुप्त हो रहे बिंदेलखंडी लोक साहित्य आल्हा गायन को डलमऊ के सुप्रसिद्ध आल्हा गायक कन्हैयालाल यादव ने प्रस्तुत किया । उन्होंने गायन ने मछला हरण का प्रसंग सुनाया। जिसे सैकड़ों की संख्या में मौजूद ग्रामीणों ने खूब सराहा । गांव के नीलकंठेश्वर शिवालय पर भगवान शिव के रुद्राभिषेक और लघु मृत्युंजय जप के समापन पर आयोजित इस लोक साहित्य के कार्यक्रम में दौलतपुर , गुलरिहा , किरवाहर , पनवारी , नेवादा , मुंडीपुर आदि गांव के लोग एकत्र हुए थे । इस मौके पर आयोजक रतीपाल शुक्ल ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों से आधुनिकता के गुलाबी शोर में सामाजिक एकरूपता से सराबोर समृद्ध आल्हा गायकी परंपरा पर गहरा आघात लगा है। नई पीढ़ी के ऊर्जावान कहे जाने वाले लोग पौराणिक गीतों को भूलते जा रहे हैं और उसके जगह पर फिल्मी गीत के अलावे धूम-धड़ाके जैसे संगीत को अपनी परंपरा अपनाते जा रहे हैं।जो बहुत ही दुर्भाग्य की बात है। इस मौके पर प्रमुख रूप से इंटर कालेज के पूर्व प्रवक्ता शिव करन तिवारी , वरिष्ठ चिकित्सक डा . अमर नाथ त्रिपाठी , अमरेंद्र बहादुर सिंह चच्चू , पूर्व प्रधान दिनेश सिंह , अर्जुन प्रसाद त्रिपाठी , राधेश्याम पाठक , बांके बिहारी मिश्र , राम करन ओझा , दिनेश मिश्र , श्री भगवान शुक्ल आदि मौजूद थे ।