रायबरेली में वर्षों से बदहाली का दंश अब भुगत रही रायबरेली की 25 हजार आबादी

रायबरेली में वर्षों से बदहाली का दंश अब भुगत रही रायबरेली की 25 हजार आबादी
रायबरेली में वर्षों से बदहाली का दंश अब भुगत रही रायबरेली की 25 हजार आबादी

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रिपोर्ट-ओम द्विवेदी(बाबा)

मो-8573856824

रायबरेली-शहर की बड़ी आबादी का क्षेत्र है आइटीआइ। यहां करीब 25 हजार लोग रहते हैं। इस मार्ग पर कई संस्थान भी पड़ते हैं। लेकिन, सड़क वर्षों से खस्ताहाल है। इतने बड़े-बड़े गड्ढे कि हमेशा वाहनों के पलटने का खतरा बना रहता है।

20 जनवरी को स्थानीय सांसद राहुल गांधी को इसी टूटे-फूटे मार्ग से क्रिकेट प्रतियोगिता के शुभारंभ में जाना था, ऐसे में पालिका ने करीब ढाई किलोमीटर की सड़क को समतल करने के चक्कर में बालू से पाट दिया।

उस दिन तो पानी डाल कर धूल-गुबार सब रोक दिया गया था। बाद में ज्यों धूप निकली और हवा चली तो बालू ने लोगों की आंखें लाल कर दीं। सड़क किनारे व्यवसाय प्रभावित होने लगे। घरों तक बालू की किरकिरी पहुंच गई। अब लोग हैरान-परेशान हैं कि आखिर कैसे निजात मिले।

आईटीआई मोड़ से सुलतानपुर हाइवे तक करीब ढाई किलोमीटर लंबा मार्ग वर्षों से बदहाली का दंश झेल रहा है। इस मार्ग से प्रतिदिन हजारों लोगों का आना-जाना होता है। आसपास के मोहल्लों, कालोनियों और ग्रामीण क्षेत्रों को जोड़ने वाला यह रास्ता व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के लिहाज से भी काफी अहम है।

इसके बावजूद वर्षों से सड़क की मरम्मत नहीं कराई गई, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। हाल ही में नगर पालिका की ओर से सड़क के गड्ढों में बालू डलवा दी गई। इससे समस्या का स्थायी समाधान तो नहीं हुआ, उल्टा लोगों की मुश्किलें और बढ़ गईं।

वाहन निकलने के दौरान बालू उड़ने से पूरे इलाके में धूल का गुबार छा जाता है। इससे राहगीरों, दुकानदारों और स्थानीय निवासियों को सांस लेने में दिक्कत हो रही है। सूरज मिश्र का कहना है कि उड़ती बालू और धूल के कारण आंखों में जलन, खांसी, एलर्जी और संक्रमण जैसी बीमारियां फैल रही हैं।

स्कूल जाने वाले बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ रही है। इंटर के छात्र शौर्य शुक्ल का कहना है कि धूल से स्कूल पहुंचने से पहले ड्रेस गंदी हो जाती है। आरपी चौधरी का कहना है कि मार्ग में पानी का छिड़काव तक नही किया जा रहा है।

अनुराग सिंह का कहना है कि इसी मार्ग पर अभयदाता मंदिर, भवानी पेपर मील, डायट बीटीसी प्रशिक्षण केन्द्र, निफ्ट भी पड़ता है । 20 से 25 हजार लोगों का आवागमन होता है, जो इसी धूल के बीच आने जाने को मजबूर हैं। गणेश सिंह का कहना है कि आइटीआइ कालोनी, शिवानगर, पीडब्ल्यूडी, बालापुर, चतुर्भुजपुर के लोगों के घर तक धूल उड़कर जा रही है। इससे घरों की छतों पर धूल से परते पड़ गई हैं।

हरिकेश कुमार का कहना है कि महत्वपूर्ण मार्ग होने के बावजूद बदहाल मार्ग के निर्माण में जिम्मेदार ध्यान नही दें रहे हैं। इसको लेकर कई बार शिकायतें की गई , लेकिन कार्य अभी तक प्रारंभ नही हो सका है। मजबूरी में उन्हें घरों के दरवाजे-खिड़कियां बंद रखनी पड़ रही हैं।

क्षेत्रवासियों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों और जिम्मेदार अधिकारियों ने इस मार्ग की सुध लेना जरूरी नहीं समझा। केवल वीआइपी आगमन के समय अस्थायी इंतजाम कर दिए जाते हैं, जो कुछ ही दिनों में बेअसर हो जाते हैं।

पहला टेंडर ही नहीं लेने आया कोई

नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी स्वर्ण सिंह कहते हैं कि इस मार्ग का दो बार टेंडर हो चुका है। पहला टेंडर कोई लेने ही नहीं आया था। इस बार टेंडर 2 फरवरी को खुलेगा। उन्होंने कहाकि उन्हें ऐसी उम्मीद नहीं थी, कि धूल इतना परेशान करेगी।वह बोले, कि पानी का छिड़काव किया जा रहा है। लोगों की समस्या हर हाल में दूर की जाएगी।