ऊंचाहार में अधर्म पर धर्म और बुराई पर अच्छाई की विजय का पर्व 'होलिका दहन' श्रद्धा वा हर्षोल्लास के साथ मनाया गया

ऊंचाहार में अधर्म पर धर्म और बुराई पर अच्छाई की विजय का पर्व 'होलिका दहन' श्रद्धा वा हर्षोल्लास के साथ मनाया गया

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रिपोर्ट-सागर तिवारी 

ऊंचाहार (रायबरेली): अधर्म पर धर्म और बुराई पर अच्छाई की विजय का पर्व 'होलिका दहन' ऊंचाहार के कलवारन टोला (वार्ड नंबर 02) में अत्यंत श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। नगर वासियों के सामूहिक सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में देर रात 1:00 बजे शुभ मुहूर्त पर होलिका प्रज्ज्वलित की गई।
भक्ति और विश्वास की विजय
आयोजन के दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं को होलिका दहन की अलौकिक पौराणिक कथा सुनाई गई। वक्ताओं ने बताया कि किस प्रकार परम भक्त प्रहलाद को मारने के उद्देश्य से अहंकारी हिरण्यकशिपु ने अपनी बहन होलिका का सहारा लिया था। होलिका, जिसे अग्नि से न जलने का वरदान प्राप्त था, प्रहलाद को गोद में लेकर चिता पर बैठ गई। परंतु, ईश्वर की असीम कृपा से भक्त प्रहलाद सुरक्षित बच निकले और होलिका का अहंकार अग्नि में भस्म हो गया। यह कथा आज भी हमें सिखाती है कि ईश्वर पर अटूट विश्वास रखने वालों की कभी हार नहीं होती।
नगर वासियों का रहा विशेष सहयोग
इस कार्यक्रम को सफल बनाने में स्थानीय निवासियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इस अवसर पर मुख्य रूप से श्री अशोक श्रीवास्तव, विकास, दिनेश, स्नेह, साहिल, और विजय समेत बड़ी संख्या में वार्ड के लोग उपस्थित रहे। सभी ने एक-दूसरे को पर्व की शुभकामनाएं दीं और समाज में भाईचारा बनाए रखने का संदेश दिया। आधी रात के बाद भी लोगों का उत्साह कम नहीं हुआ और पूरा वातावरण 'भक्त प्रहलाद की जय' के नारों से गुंजायमान रहा।