ऊंचाहार: में पीएम आवास में दादी-पोते का 'खेल' जाने क्यां है पूरी कहानी,,,,❓

ऊंचाहार: में पीएम आवास में दादी-पोते का 'खेल' जाने क्यां है पूरी कहानी,,,,❓

-:विज्ञापन:-



रिपोर्ट-सागर तिवारी

- मास्टरमाइंड की शह पर पीएम आवास बिका, अब 'बिजली चोरी' का भी खुला राज


- अंधेरगर्दी: सरकारी आवास तो बिका ही, अब अवैध बिजली कनेक्शन से विभाग को लग रहा चूना।


- साजिश: 'लखपति' दादी ने पोते को दी जमीन, खुद बनी 'गरीब' और सिस्टम को कर लिया हाईजैक।


- मामला आवास घोटाले से बढ़कर अब हवाला, मनी लॉन्ड्रिंग और बिजली चोरी तक पहुंचा,,,, 


ऊंचाहार -रायबरेली-स्थित नगर पंचायत के वार्ड नंबर 5 (सराय मोहल्ला) में चल रहा फर्जीवाड़ा अब सिर्फ एक पीएम आवास तक सीमित नहीं रह गया है। यहाँ 'दादी-पोते' की जुगलबंदी और एक शातिर 'मास्टरमाइंड' की शह पर कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। 'लखपति' महिला हमीदुन निशा द्वारा पीएम आवास डकारने के मामले की जब गहराई से पड़ताल की गई, तो विदेशी फंडिंग और बिजली चोरी जैसे गंभीर अपराधों का एक पूरा सिंडिकेट बेनकाब हो गया।


- मास्टरमाइंड का 'तिलिस्म' और विदेशी फंडिंग

सूत्रों के मुताबिक, इस पूरे खेल का रिमोट कंट्रोल मोहल्ले के ही एक तथाकथित 'मास्टरमाइंड' के हाथ में है। यह शख्स इतना शातिर है कि विदेशों से संदिग्ध तरीके से मोटी रकम मंगवाता है, लेकिन अपने खाते में नहीं। जांच एजेंसियों की रडार से बचने के लिए यह पैसा मोहल्ले के अलग-अलग गरीब और जरूरतमंद लोगों के खातों में मंगवाया जाता है। इसी 'काले धन' के दम पर यह सिस्टम को खरीदता है और अवैध धंधों को संरक्षण देता है।
गाटा सं. 4201-4202 का सच और दादी-पोते का खेल
आरोप है कि इसी मास्टरमाइंड के इशारे पर हमीदुन निशा (जो गाटा संख्या 4201 और 4202 जैसी बेशकीमती जमीनों की मालकिन हैं) को 'गरीब' दिखाकर पीएम आवास दिलवाया गया। हैरानी की बात यह है कि दादी ने अपनी लाखों की जमीन तो पोते को दान कर दी, लेकिन सरकारी आवास का लाभ खुद ले लिया और फिर उसे अवैध रूप से बेच भी दिया।
'कटिया' डालकर जल रही बिजली, विभाग बेखबर?
इस सिंडिकेट का दुस्साहस देखिए—आवास घोटाले और विदेशी फंडिंग के बाद अब बिजली चोरी का मामला भी सामने आया है। मौके पर यह बात सामने आई है कि जिस अवैध आवास और परिसर का सौदा हुआ है, वहां बिजली का कोई वैध कनेक्शन नहीं है। वहां सरेआम अवैध कनेक्शन (कटिया) डालकर बिजली विभाग को चूना लगाया जा रहा है।
सवाल उठता है कि जिस मोहल्ले में विजिलेंस और लाइनमैन का आना-जाना लगा रहता है, वहां यह अवैध बिजली किसके संरक्षण में जल रही है? क्या बिजली विभाग के कर्मचारी भी इस 'मास्टरमाइंड' के प्रभाव में हैं?
चौतरफा जांच की दरकार: ED, बिजली विभाग और प्रशासन
शिकायतकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों ने अब मामले को लेकर आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। मांग की गई है कि: मास्टरमाइंड द्वारा मंगवाई जा रही विदेशी फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच करें।बिजली विभाग तत्काल छापा मारकर अवैध कनेक्शन पर भारी जुर्माना और बिजली चोरी का मुकदमा दर्ज करे।
जिला प्रशासन: हमीदुन निशा और उनके पोते की संपत्तियों की जांच कर पीएम आवास की रिकवरी और एफआईआर दर्ज कराए।अगर जल्द ही इस 'सफेदपोश मास्टरमाइंड' और उसके सिंडिकेट पर नकेल नहीं कसी गई, तो यह ऊंचाहार में कानून व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन जाएगा।