मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने फिरोज गांधी के ड्राइविंग लाइसेंस को लेकर लगाया प्रश्नचिन्ह

 मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने फिरोज गांधी के ड्राइविंग लाइसेंस को लेकर लगाया प्रश्नचिन्ह

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रिपोर्ट-ओम द्विवेदी(बाबा)
मो-8573856824

रायबरेली में राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार दिनेश सिंह ने फिरोज गांधी के ड्राइविंग लाइसेंस पर प्रश्न चिन्ह लगाए हैं. उन्होंने इसकी वैधता की जांच की भी मांग की है. फिरोज गांधी का यह ड्राइविंग लाइसेंस रायबरेली के रहने वाले विकास सिंह के पास था.

रायबरेली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के हालिया दौरे के दौरान उन्होंने उनके दादा फिरोज गांधी के पुराने ड्राइविंग लाइसेंस को दिया था. अब उस पर सियासी घमासान छिड़ गया है. उत्तर प्रदेश सरकार के राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार दिनेश सिंह ने इस लाइसेंस की वैधता पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसकी जांच की मांग की है. उन्होंने कहा कि यह लाइसेंस रायबरेली के निवासी विकास सिंह ने राहुल गांधी को सौंपा था, लेकिन इसकी असलियत और प्राप्ति के स्रोत की जांच जरूरी है.

दिनेश सिंह ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, "इस ड्राइविंग लाइसेंस की वैधता जांचने के साथ ही यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि इसे सौंपने वाले व्यक्ति के पास यह कहां से आया. क्या राहुल गांधी अपनी विजिट को इवेंट बनाने के लिए खुद ही यह लेकर नहीं आए थे?" मंत्री ने इस घटना को राजनीतिक स्टंट करार देते हुए संदेह जताया कि कहीं यह सब पूर्व नियोजित तो नहीं था.

क्या है पूरा विवाद

यह विवाद तब शुरू हुआ जब राहुल गांधी दो दिवसीय रायबरेली दौरे पर आए थे. इस दौरान रायबरेली प्रीमियर लीग क्रिकेट टूर्नामेंट के उद्घाटन समारोह में विकास सिंह ने मंच पर फिरोज गांधी का यह दशकों पुराना ड्राइविंग लाइसेंस उन्हें सौंपा. लाइसेंस को देखकर राहुल भावुक हो गए और उन्होंने तुरंत इसकी फोटो लेकर अपनी मां सोनिया गांधी और बहन प्रियंका गांधी को भेजा. परिवार ने बताया कि यह लाइसेंस कई साल पहले एक कार्यक्रम के दौरान उनके ससुर को मिला था, जिसे वे अमानत की तरह संभालकर रखे हुए थे.

दिनेश सिंह का राहुल पर निशाना

दिनेश सिंह ने दो दिन पहले राहुल गांधी द्वारा मनरेगा योजना पर आयोजित चौपाल में उठाए गए सवालों का जवाब देने के लिए भी पत्रकार वार्ता बुलाई थी. उन्होंने मनरेगा का नाम बदलने के मुद्दे पर कहा कि योजना से पहले भी इसके अलग-अलग नाम रहे हैं. राहुल गांधी के मोदी सरकार पर गरीबों के अधिकार छीनने के आरोप का जवाब देते हुए मंत्री ने कहा कि राहुल को जानकारी नहीं है कि जीबीबीजी राम जी योजना संशोधन के बाद और मजबूत हुई है. उन्होंने राहुल द्वारा अडानी-अंबानी का नाम लेने पर भी आपत्ति जताई और कहा कि ऐसे बयानों से विकास कार्य प्रभावित नहीं होने चाहिए. रायबरेली में राहुल गांधी के दौरे और मनरेगा चौपाल के बाद बीजेपी और कांग्रेस के बीच तीखी बयानबाजी जारी है. मंत्री दिनेश सिंह की जांच की मांग से अब इस पुराने दस्तावेज की सत्यता पर राजनीतिक बहस छिड़ गई है. स्थानीय स्तर पर यह मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ है, जबकि दोनों दल 2027 के चुनावी समीकरणों को मजबूत करने में जुटे हैं.