रायबरेली-जांच में खुलने लगे राज तो बदल दिए जांच अधिकारी

रायबरेली-जांच में खुलने लगे राज तो बदल दिए जांच अधिकारी

-:विज्ञापन:-



बछरावां बीईओ प्रकरण में ‘अपरिहार्य कारणों’ पर उठे सवाल



मनमाने तरीके से हटाए गए जांच अधिकारी! क्या बछरावां बीईओ कार्यालय के भ्रष्टाचार पर डाला जा रहा पर्दा?


रिपोर्ट:- ऋषि मिश्रा
मो०न०:-9935593647


बछरावां रायबरेली। विकास क्षेत्र के खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) कार्यालय में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच को लेकर अब गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय द्वारा जारी पत्रांक 13163-64/2025-26, दिनांक 20-01-2026 के माध्यम से इन शिकायतों की जांच के लिए एक समिति गठित की गई थी। आदेश में स्पष्ट रूप से निर्देशित किया गया था कि जांच एक माह के भीतर पूर्ण कर ली जाए। इसके क्रम में जांच समिति ने अपने पत्रांक खंड शिक्षा अधिकारी शिवगढ़- 789/2025-26, दिनांक 12-02-2026 के माध्यम से खंड शिक्षा अधिकारी बछरावां से संबंधित कर्मचारियों से स्पष्टीकरण एवं आख्या प्राप्त करने के लिए पत्र भी जारी किया था। हालांकि निर्धारित समयावधि समाप्त होने के बाद भी जांच प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। न तो जांच को विधिवत प्रारम्भ किया गया और न ही शिकायतकर्ताओं/ संगठन से किसी प्रकार के तथ्य और साक्ष्य लेने का प्रयास किया गया। इससे यह सवाल उठने लगे हैं कि जब इतने गंभीर आरोप सामने आए हैं, तो जांच को आगे बढ़ाने में इतनी शिथिलता और उदासीनता क्यों बरती जा रही है। स्थानीय शिक्षकों और संगठन से जुड़े लोगों का आरोप है कि मामले को जानबूझकर लंबित रखकर वास्तविक तथ्यों को सामने आने से रोका जा रहा है, जो प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है। *मामला उस समय और अधिक संदिग्ध हो गया जब जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने अपने पत्रांक बेसिक/14331-32/2025-26, दिनांक 09-03-2026 के माध्यम से तथाकथित “अपरिहार्य कारणों” का हवाला देते हुए जांच अधिकारी को ही बदल दिया।* इस आदेश के तहत खंड शिक्षा अधिकारी नगर क्षेत्र को जांच समिति से हटाकर उनके स्थान पर खंड शिक्षा अधिकारी सरेनी को शामिल कर दिया गया। यह निर्णय ऐसे समय लिया गया जब दिनांक 27-02-2026 को संगठन द्वारा जांच में हो रही देरी के विरोध में पुनः जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन दिया गया था और उसी दौरान बीईओ नगर क्षेत्र को बुलाकर जांच की प्रगति के बारे में जानकारी ली गई थी। सूत्रों के अनुसारnउस बैठक में बीईओ नगर क्षेत्र ने स्पष्ट रूप से बताया था कि दिनांक 12-02-2026 को बीईओ बछरावां को स्पष्टीकरण हेतु पत्र भेजा गया था, लेकिन 15 दिन बीत जाने के बावजूद भी कोई उत्तर प्राप्त नहीं हुआ। इसके अलावा उन्होंने यह भी अवगत कराया था कि शिकायतों के प्रथम दृष्टया परीक्षण में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं, जिनमें सेवा पुस्तिका जैसे महत्वपूर्ण अभिलेखों का गायब होना, बिना आदेश विभाग द्वारा स्वीकृत विद्यालय को बिना आदेश बंद एवम अनेक वित्तीय अनियमितता करना भी शामिल है। इतने गंभीर आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों के बावजूद बीईओ बछरावां द्वारा स्पष्टीकरण न देना स्वयं में कई सवाल खड़े करता है और यह आशंका भी व्यक्त की जा रही है कि अधीनस्थ कर्मचारियों को पूर्ण संरक्षण दिया जा रहा है। इसी बीच जांच अधिकारी को अचानक बदल दिए जाने से पूरे मामले पर संदेह और गहरा गया है। संगठन से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि जांच के दौरान सामने आ रही जानकारियों के कारण जांच अधिकारी को हटाया गया है, तो यह कदम जांच की निष्पक्षता को प्रभावित करने वाला माना जाएगा। इससे यह संदेश भी जाता है कि कहीं न कहीं बछरावां बीईओ कार्यालय में कथित भ्रष्टाचार के तथ्यों को उजागर होने से रोकने की कोशिश की जा रही है। उल्लेखनीय है कि लगभग तीन माह पूर्व आयोजित समाधान दिवस में भी इन समस्याओं को जिला प्रशासन के समक्ष उठाया गया था। इसके बाद जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय के पत्रांक 11393-97/दिनांक 19-11-2025 द्वारा खंड शिक्षा अधिकारी मुख्यालय, राही और बछरावां को शिकायतों के परीक्षण और आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। लेकिन इन आदेशों के बावजूद अब तक कोई ठोस और प्रभावी कार्रवाई सामने नहीं आई है, जिससे यह धारणा बन रही है कि मामला केवल कागजी आदेशों तक ही सीमित रह गया है। पूरे घटनाक्रम में बार-बार जांच के लिए समय दिया जाना, फिर भी जांच प्रारम्भ न होना, और जब संगठन ने आपत्ति उठाई तो जांच अधिकारी को ही बदल देना इन सभी घटनाओं ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब क्षेत्र में यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर “अपरिहार्य कारणों” का हवाला देकर जांच अधिकारी को मनमाने तरीके से क्यों बदला गया और इसके पीछे वास्तविक कारण क्या हैं। सबसे बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या जांच अधिकारी की ईमानदारी और निष्पक्षता ही उनके लिए भारी पड़ गई? यदि ऐसा है, तो यह केवल एक जांच प्रक्रिया का मामला नहीं बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता, जवाबदेही और व्यवस्था की निष्पक्षता पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करता है। ऐसी स्थिति में शिक्षकों और संगठन से जुड़े लोगों ने मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की जांच किसी उच्च स्तरीय अधिकारी या समिति से कराई जाए, ताकि बछरावां कार्यालय में व्याप्त कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की वास्तविक स्थिति सामने आ सके तथा दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्यवाही सुनिश्चित की जा सके। फिलहाल यह मामला प्रशासनिक व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही की कसौटी पर खड़ा दिखाई दे रहा है।