रायबरेली-झुलसा रहा है पारा, ऊंचाहार के चिकित्सकों ने दी बड़ी सलाह

रायबरेली-झुलसा रहा है पारा, ऊंचाहार के चिकित्सकों ने दी बड़ी सलाह

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       रिपोर्ट-सागर तिवारी


ऊंचाहार -रायबरेली - आसमान से आग बरस रही है ।गर्मी का मौसम आते ही बीमारियों का प्रकोप भी शुरू हो गया है। मक्खी-मच्छरों की भरमार हो गई है। दिन में चल रही तेज लू के थपेड़े लोगों को बीमार कर रहे हैं। इस मौसम में डायरिया, एलर्जी व आंखों के रोगियों की संख्या बढ़ी है। सेहत विभाग के अधिकारियों का कहना है कि लू के कारण मौसम शुष्क हो जाता है, जिससे मानव शरीर में पानी की कमी हो जाती है। पसीना आने व गर्म हवा लगने से शरीर के अंदर नमी घटने लगती है। लगातार धूप में रहने से भी लू लग सकती है। लू लगने से शरीर की तंत्रिका ठीक तरह से काम करना बंद कर देती है व मरीज को उल्टी, सिरदर्द, कमजोरी, मांसपेशियों में ऐंठन व दर्द महसूस होने लगती है। पशुओं का भी बुरा हाल

इस तपते मौसम में सबसे ज्यादा बुरा हाल बेसहारा पशुओं का है। सुबह आठ बजते ही गर्मी का प्रकोप शुरू हो जाता है, जो देर शाम तक जारी रहता है। इस भयंकर गर्मी में बेजुबान जानवर छाया व पानी के लिए भटकते रहते हैं। पशु पालकों के अनुसार इस भयंकर गर्मी में पशुओं को लू व सीधी धूप से बचाना चाहिए। पशुओं को ज्यादा से ज्यादा पानी पिलाएं व दिन में 3-4 बार नहलाएं। हीट-स्ट्रोक की चपेट में आने वाले पशुओं का योग्य चिकित्सक से उपचार करवाएं।

डा. सुनील चौहान और डा . अख्तर ने दी ये सलाह

ऊंचाहार के वरिष्ठ चिकित्सक डा सुनील चौहान के अनुसार इस मौसम में सिर को ढककर रखें और भूखे पेट धूम में निकलने से बचें।

-दोपहर के समय ज्यादा जरूरी होने पर ही बाहर निकलें। धूप में घूमने वाले प्याज का सेवन अधिक करें और दिन में कम से कम 8-10 लीटर पानी पिएं। नींबू पानी पीने व छाछ का अधिक सेवन करें तथा गरिष्ठ भोजन से परहेज करें।

-एलर्जी की समस्या हो तो दूध में आधा चमच हल्दी मिलाकर पीएं व अलर्जी से बचने के लिए काली मिर्च के 4 से 6 दाने चबाएं। लू लगने के लक्षणों को अनदेखा न करें ।

ऊंचाहार सीएचसी के वरिष्ठ चिकित्सक डा महमूद अख्तर  बताते हैं कि लू के कारण शरीर की कार्यप्रणाली पर प्रभाव पड़ता है, जिससे मृत्यु भी हो सकती है। इसके प्रभाव को कम करने के लिए लू से बचने व लू लगने के लक्षण को अनदेखा नहीं करना चाहिए। अधिक से अधिक पानी पीएं, यदि प्यास न लगी हो तब भी। हल्के रंग के पसीना शोषित करने वाले हल्के वस्त्र पहनें। धूप के चश्मे, छाता, टोपी व चप्पल का प्रयोग करें। यदि खुले में कार्य करते हैं तो सिर, चेहरा, हाथ व पैरों को गीले कपड़े से ढके रहें। छाते का प्रयोग करें, यात्रा करते समय पीने का पानी अपने साथ अवश्य ले जाएं। शरीर में पानी की कमी दूर करने को ओआरएस, घर में बने हुए पेय पदार्थ जैसे लस्सी, चावल का पानी (माड़), नींबू पानी, छाछ का उपयोग करें।