रथ पर बैठकर स्नान करना गलत, हम खुद...मौनी अमावस्या पर हुए विवाद पर बोले जगद्गुरु रामभद्राचार्य

रथ पर बैठकर स्नान करना गलत, हम खुद...मौनी अमावस्या पर हुए विवाद पर बोले जगद्गुरु रामभद्राचार्य

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अमावस्या पर स्नान को लेकर उपजे विवाद पर जगद्गुरु रामभद्राचार्य महाराज का बयान सामने आया है. उन्होंने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा रथ पर बैठकर स्नान करने को शास्त्रों के विरुद्ध बताया और इस पर कड़ा ऐतराज जताया है.

रामभद्राचार्य ने कहा कि वह जानें और सरकार जाने, लेकिन उन्हें रथ में बैठकर स्नान करने नहीं जाना चाहिए था. यह आचरण शास्त्रसम्मत नहीं है. उन्होंने स्पष्ट किया कि धर्म में परंपरा और शास्त्रों का पालन सर्वाेपरि होता है और जो भी व्यक्ति शास्त्रों के विरुद्ध कार्य करता है, उसे उसका फल अवश्य भोगना पड़ता है.

उन्होंने कहा कि वे स्वयं और उनके अनुयायी हमेशा पैदल चलकर ही स्नान के लिए जाते हैं, क्योंकि यही शास्त्रों में वर्णित विधि है. उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा, "जो शास्त्र के विरुद्ध करेगा, उसे न सुख मिलेगा, न शांति मिलेगी और न ही उसे सद्गति प्राप्त होगी."

मणिकर्णिका घाट की मूर्तियों को लेकर क्या बोले रामभद्राचार्य

इसके साथ ही जगद्गुरु रामभद्राचार्य महाराज ने काशी के मणिकर्णिका घाट में मूर्तियों को लेकर चल रही चर्चाओं पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि स्थापित और प्रमाणित मूर्तियों को किसी भी स्थिति में नहीं तोड़ा जाना चाहिए. वहीं उन्होंने कहा कि उन्होंने स्वयं इसकी पड़ताल करवाई है और यह स्पष्ट हो चुका है कि कोई भी प्रमाणित मूर्ति नहीं तोड़ी गई है.

बता दें कि प्रयागराज के माघ मेले में मौनी अमावस्या पर ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और प्रशासन के बीच भारी विवाद हो गया. भीड़ के दबाव के कारण रोके जाने और अनुयायियों के साथ हुई धक्का मुक्की से नाराज शंकराचार्य बिना स्नान किए वापस लौट आए और धरने पर बैठ गए.