रायबरेली-ऊंचाहार के सवैया हसन में हो रहा खनन के नियमों पर मिट्टी की मार, जिम्मेदार गाँधी जी के तीन बंदर की,,,,,,?

रायबरेली-ऊंचाहार के सवैया हसन में हो रहा खनन के नियमों पर मिट्टी की मार, जिम्मेदार गाँधी जी के तीन बंदर की,,,,,,?

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       रिपोर्ट-सागर तिवारी

- गंगा एक्सप्रेस वे का ठेकेदार धरती का सीना चीरकर कर रहा लूटमार

ऊंचाहार-रायबरेली - क्षेत्र के हटवा और सवैया हसन गांव के पास गंगा एक्सप्रेस वे के दलाल धरा का सीना चीरकर भूसंपदा की खुलेआम डकैती डाल रहे है । खनन के नियमों पर मिट्टी डालकर 52 बीघे की जमीन को कुआं बना दिया गया है । आगे भी  ये लूटमार जारी हैं, जिससे आसपास की कृषि योग्य भूमि के साथ साथ गांव के जीवन पर भी संकट पैदा हो गया है ।
      गंगा एक्सप्रेस वे के लिए मिट्टी का बड़े पैमाने पर खनन किया जा रहा है । इसके लिए प्रशासन ने नियम तय कर रखे हैं , किंतु खनन में लगे दलालों ने सारे नियमों पर मिट्टी डाल दी है । जिससे ग्रामीण क्षेत्र में जीविका के साथ ग्रामीण जीवन पर भी संकट पैदा हो गया है । 
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16 बीघे की अनुमति लेकर खोद डाला 82 बीघे तालाब खोदने की तैयारी 
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कल्पना कीजिए यदि गांवों के आसपास 82 बीघे क्षेत्रफल में बीस फिट गहरा कुआं खोद दिया जाए तो ग्रामीणों की क्या दशा होगी ? किंतु ये किया जा रहा है । क्षेत्र के सवैया हसन गांव से लेकर हटवा गांव तक करीब चार किमी तक दो टुकड़ों में राजस्व अभिलेखों में तालाब दर्ज है । गंगा एक्सप्रेस वे के लिए इस तालाब से मिट्टी खनन की कुल 14 बीघे की अनुमति ली गई थी । किंतु अब तक करीब 54 बीघे मिट्टी का खनन किया जा चुका है । यह अवैध खनन का सिलसिला जारी है । खनन में न सिर्फ क्षेत्रफल मनमानी की गई है अपितु गहराई में भी मानक को तार तार कर दिया गया है । बताया जा रहा कि तीन फिट गहराई की अनुमति लेकर बीस फिट गहरा कुआं खोद दिया गया है । कुल मिलाकर करीब चार किमी तक कई गांवों के बीच एक नदी बना दी गई है ।
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यह है नियम 
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मिट्टी खनन के लिए प्रशासन ने कुछ नियम तय किए है । शर्तों के अनुसार मिट्टी उठाते समय भूमि का स्वरूप न बदले, निश्चित गहराई से ज्यादा मिट्टी न उठाई जाय, आम रास्ते के आसपास लगे पेड़ों को नुकसान न पहुंचाये तथा पौधारोपण के साथ मिट्टी उठाने के उसे ढका जाय। किंतु धरातल पर एक भी नियम का पालन नहीं किया जा रहा है ।
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ग्रामीण जीवन को बड़ा खतरा 
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जिस तरह बीस फिट गहरे तालाब को चार किमी लंबाई तक खोदा गया है, उससे ग्रामीण जीवन को बड़ा खतरा पैदा हो गया है । बताया जाता है कि बरसात के दिनों में जब पानी का बहाव तेज होगा तो आसपास के खेत इस गहरे कुएं जैसे तालाब में समा जायेगे। यही नहीं गांव के बच्चों के डूबने की भी संभावना बढ़ जायेगी । क्षेत्र के गांव सवैया हसन , सवैया मीरा , सवैया राजे , पैडापुर, हटवा आदि करीब एक दर्जन गांवों का जीवन संकट में आ गया है ।