सबला-समर्थ परियोजना के तहत महिलाओं एवं किशोरियों को कानूनी अधिकारों की जानकारी
रिपोर्ट - अमन श्रीवास्तव
मो - 8052996633
हरचंदपुर, रायबरेली- सबला द्वारा संचालित समर्थ परियोजना के अंतर्गत विकासखंड हरचंदपुर की 8 ग्राम सभाओं में लिंग आधारित हिंसा एवं महिला हिंसा के विरुद्ध कानूनी अधिकारों, सुरक्षा और सहायता सेवाओं को लेकर दो दिवसीय जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन 5 एवं 6 अक्टूबर 2026 को छतैया, टांडा, कासोखास-हुसैनगंज, गुल्लुपुर-पूरे प्रसाद, लालूपुर-पूरे मोती, मुबारकपुर, कठवारा तथा शोरा-पूरे ठकुराइन में किया गया।
कार्यक्रम में महिलाओं एवं किशोरियों को लिंग आधारित हिंसा की पहचान, उनके कानूनी अधिकार, संकट की स्थिति में सहायता प्राप्त करने के तरीके तथा विभिन्न हेल्पलाइन सेवाओं के बारे में जानकारी दी गई। प्रशिक्षण का उद्देश्य महिलाओं एवं किशोरियों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ हिंसा की स्थिति में सही समय पर उचित कदम उठाने के लिए सक्षम बनाना रहा।
प्रशिक्षण के दौरान शिवम् जी, राजेंद्र जी, रंजना एवं ज्योतिमा ने महिलाओं के अधिकारों तथा पारिवारिक विवादों से जुड़े विभिन्न कानूनी पहलुओं पर चर्चा की। प्रतिभागियों को बताया गया कि वैवाहिक विवाद, घरेलू हिंसा या तलाक जैसी परिस्थितियों में किसी भी निर्णय से पहले अपने कानूनी अधिकारों को समझना तथा आवश्यकता पड़ने पर उचित कानूनी सलाह एवं सहायता लेना महत्वपूर्ण है।
गतिविधियों के माध्यम से समझी हिंसा की स्थितियां
प्रशिक्षण को केवल व्याख्यान तक सीमित न रखते हुए प्रतिभागियों को चार समूहों में विभाजित किया गया। प्रत्येक समूह को अलग-अलग हिंसा से जुड़ी परिस्थितियां दी गईं और उनसे पूछा गया कि ऐसी स्थिति में वे हिंसा को किस रूप में पहचानेंगी तथा उससे निपटने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं। इस गतिविधि के माध्यम से प्रतिभागियों की समझ एवं उनके अनुभवों को सामने लाने का प्रयास किया गया।
इसके साथ ही विभिन्न महिला एवं आपातकालीन हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी गतिविधि के माध्यम से दी गई। प्रतिभागियों को अलग-अलग संकट की परिस्थितियां देकर पूछा गया कि ऐसी स्थिति में किस हेल्पलाइन नंबर का उपयोग किया जाना चाहिए। इससे महिलाओं एवं किशोरियों को संकट के समय सही सहायता तक पहुंचने की जानकारी मिली।
संकट की स्थिति में जरूरी सामान पर गतिविधि
प्रशिक्षण में प्रतिभागियों के सामने एक महत्वपूर्ण परिस्थिति रखी गई—यदि किसी महिला को संकट की स्थिति में अपना घर छोड़ना पड़े या उसे घर से निकाल दिया जाए, तो वह अपने साथ कौन-कौन सी आवश्यक वस्तुएं लेकर जाएगी? प्रतिभागियों ने समूह में चर्चा करते हुए आवश्यक दस्तावेज, मोबाइल फोन, पैसे, दवाएं, बच्चों से संबंधित जरूरी सामान एवं अन्य आवश्यक वस्तुओं पर अपने विचार साझा किए। गतिविधि के माध्यम से उन्हें संकट की स्थिति के लिए मानसिक एवं व्यावहारिक रूप से तैयार रहने का संदेश दिया गया।
सखी वन स्टॉप सेंटर की सेवाओं की जानकारी
प्रशिक्षण के दौरान सखी वन स्टॉप सेंटर की सेवाओं पर भी विशेष चर्चा की गई। प्रतिभागियों को बताया गया कि हिंसा से प्रभावित महिलाओं को आवश्यकता के अनुसार एक ही स्थान पर विभिन्न प्रकार की सहायता एवं मार्गदर्शन उपलब्ध कराने में वन स्टॉप सेंटर महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। महिलाओं को यह भी बताया गया कि किसी अन्य स्थान या जिले में कार्य अथवा यात्रा के दौरान यदि उन्हें सुरक्षित सहायता या मार्गदर्शन की आवश्यकता हो, तो उपलब्ध सेवाओं के अनुसार संबंधित सहायता केंद्र से संपर्क किया जा सकता है।
अच्छे-बुरे स्पर्श एवं पारिवारिक संवाद पर चर्चा
कार्यक्रम के दौरान अच्छे एवं बुरे स्पर्श के विषय पर भी चर्चा की गई। प्रतिभागियों को बच्चों एवं किशोरियों के साथ सुरक्षित व्यवहार, असहज स्थिति को पहचानने तथा ऐसी परिस्थिति में भरोसेमंद व्यक्ति से बात करने के महत्व को समझाया गया। इस विषय को परिवार में संवाद, समझ और सामंजस्य से जोड़ते हुए प्रतिभागियों से उनके विचार भी लिए गए।
रोल प्ले और खेलों से बढ़ी सहभागिता
प्रशिक्षण को प्रभावी एवं रोचक बनाने के लिए विभिन्न मुद्दा आधारित रोल प्ले करवाए गए। प्रतिभागियों ने अलग-अलग परिस्थितियों को अभिनय के माध्यम से प्रस्तुत किया, जिससे उन्हें वास्तविक जीवन की परिस्थितियों को समझने और समाधान पर विचार करने का अवसर मिला। इसके अलावा प्रशिक्षण के दौरान विभिन्न मनोरंजक एवं सीखने से जुड़ी खेल गतिविधियां भी कराई गईं, जिनमें महिलाओं एवं किशोरियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
प्रशिक्षणदात्री रंजना एवं ज्योतिमा ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि “हमारे अधिकार बहुत हैं, लेकिन अधिकारों के साथ हमारे कर्तव्य भी जुड़े हुए हैं। यदि हम अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हैं, तो हमें अपने कर्तव्यों को समझना और उनका निर्वहन करना भी आना चाहिए।”
दो दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों ने सक्रिय रूप से सहभागिता की और अपने व्यक्तिगत अनुभव, प्रश्न एवं जिज्ञासाएं साझा कीं। कार्यक्रम के माध्यम से महिलाओं एवं किशोरियों को यह संदेश दिया गया कि हिंसा को सहना समाधान नहीं है; हिंसा की पहचान करना, अपने अधिकारों को समझना और आवश्यकता पड़ने पर उचित सहायता लेना उनकी सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य महिलाओं एवं किशोरियों को लिंग आधारित हिंसा की पहचान, कानूनी अधिकारों, सरकारी सहायता, हेल्पलाइन सेवाओं तथा संकट की स्थिति में उपलब्ध सहायता तंत्र के प्रति जागरूक एवं सक्षम बनाना रहा।
कार्यक्रम को सफल एवं व्यवस्थित रूप से संचालित करने में समर्थ परियोजना की समस्त टीम का महत्वपूर्ण सहयोग रहा।

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