ऊंचाहार में पर्यावरण पर प्रहार: बिना टेंडर नहर विभाग के कटे 74 पेड़, सरकारी राजस्व को लाखों की चपत

ऊंचाहार में पर्यावरण पर प्रहार: बिना टेंडर नहर विभाग के कटे 74 पेड़, सरकारी राजस्व को लाखों की चपत

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   रिपोर्ट-सागर तिवारी 




ऊंचाहार/रायबरेली: तहसील क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण के दावों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। मनीरामपुर स्थित एनटीपीसी इलाहाबाद ब्रांच क्रॉस रेगुलेटर गेट के पास लकड़ी माफियाओं ने बड़ी निर्भीकता के साथ 74 हरे-भरे सफेदा (यूकेलिप्टस) के पेड़ों पर आरा चलाकर उन्हें जमींदोज कर दिया।
इस पूरे प्रकरण में सबसे गंभीर बात यह है कि यह कटान बिना किसी सरकारी प्रक्रिया और बिना किसी टेंडर के किया गया है। जानकारों के अनुसार, इन पेड़ों की बाज़ारी कीमत लगभग 30 लाख रुपये है। बिना किसी नीलामी या विभागीय स्वीकृति के इतने बड़े पैमाने पर सरकारी संपत्ति का किया गया यह अवैध कटान सीधे तौर पर राजस्व की बड़ी चोरी है। नियमों को ताक पर रखकर किए गए इस कार्य से सरकार को लाखों का 'चूना' लगाया गया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जब स्थानीय स्तर पर हलचल बढ़ी, तब प्रशासन भी हरकत में आया। इस संबंध में जिलेदार ने बताया कि ग्रामीणों से अवैध कटान की सूचना मिलने पर उन्होंने तत्काल मौके का मुआयना किया। जिलेदार के अनुसार, उन्होंने घटना स्थल पर जाकर विस्तृत जांच की है और इस अवैध कटान के संबंध में अपनी लिखित रिपोर्ट संबंधित उच्चाधिकारियों को भेज दी है।
हैरानी की बात यह है कि मुख्य मार्ग के पास इतनी बड़ी तादाद में पेड़ों का कटान हो गया, लेकिन जिम्मेदार विभाग को समय रहते इसकी भनक तक नहीं लगी। ग्रामीणों का आरोप है कि बिना मिलीभगत के इतनी बड़ी सरकारी संपत्ति की लूट संभव नहीं है। एक तरफ सरकार वृक्षारोपण पर करोड़ों खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर ऊंचाहार में फल-फूल रहे "लकड़ी माफिया" के आगे तंत्र नतमस्तक नजर आ रहा है। अब देखना यह है कि जिलेदार की रिपोर्ट के बाद प्रशासन इन दोषियों पर क्या ठोस कार्रवाई करता है।