दिल्ली में मिला राष्ट्रीय सम्मान, बोले— यह मेरा नहीं, रायबरेली की मिट्टी और वानर सेना के हर देवदूत का सम्मान

दिल्ली में मिला राष्ट्रीय सम्मान, बोले— यह मेरा नहीं, रायबरेली की मिट्टी और वानर सेना के हर देवदूत का सम्मान

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रिपोर्ट-ओम द्विवेदी(बाबा)

मो-8573856824

 

 देश की राजधानी दिल्ली में मिला सम्मान धीरज सिंह चौहान ने कहा है कि केवल मेरा व्यक्तिगत सम्मान नहीं, बल्कि रायबरेली की पावन मिट्टी और वानर सेना के हर उस देवदूत के निस्वार्थ सेवा भाव का सम्मान है, जिसने मानवता की सेवा को अपना धर्म बनाया। सम्मान मिलने के बाद उन्होंने भावुक शब्दों में कहा कि मंच पर भले ही वह अकेले खड़े थे, लेकिन उन्हें हर पल ऐसा महसूस हो रहा था कि वानर सेना का प्रत्येक साथी, हर सहयोगी और हर वह हाथ उनके साथ खड़ा है जिसने किसी ज़रूरतमंद के आँसू पोंछने के लिए अपना समय, श्रम और सहयोग दिया।
उन्होंने कहा कि यह सम्मान उन अनगिनत रातों की मेहनत का परिणाम है, जब वानर सेना के सदस्य किसी गरीब और असहाय की मदद के लिए एकजुट होकर आगे आए। यह उन मुस्कानों का सम्मान है जो किसी जरूरतमंद परिवार की उम्मीद बनकर लौटीं और उन देवदूतों की तपस्या का सम्मान है जिन्होंने बिना किसी स्वार्थ के केवल मानवता की सेवा को अपना उद्देश्य बनाया।
उन्होंने वानर सेना के सभी देवदूतों, सहयोगियों, शुभचिंतकों और रायबरेली की जनता का हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जनता का विश्वास ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि यह सम्मान उनके कदमों को नहीं रोकेगा, बल्कि सेवा, समर्पण और मानवता के मार्ग पर और अधिक ऊर्जा के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देगा। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी वानर सेना समाज के हर जरूरतमंद के साथ उसी निस्वार्थ भावना से खड़ी रहेगी।