रायबरेली-कंस के अत्याचार से लेकर कृष्ण जन्म तक की कथा ने बांधा समां, भजनों पर झूमे श्रोता

रायबरेली-कंस के अत्याचार से लेकर कृष्ण जन्म तक की कथा ने बांधा समां, भजनों पर झूमे श्रोता

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रिपोर्ट-ओम द्विवेदी(बाबा)

मो-8573856824

रायबरेली- विकास क्षेत्र के बरउवा गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में कथा वाचक आचार्य अभिषेकाचार्य महराज ने रविवार को भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की कथा सुनाई। भगवान के जन्म गीतों से श्रोता झूमके लगायें।
कथा वाचक आचार्य अभिषेकाचार्य महराज ने कहा कि द्वापर युग में मथुरा में अत्याचारी राजा कंस का शासन था, कंस खूब उत्पाद मचा रखा है और अपने पिता को बंदी बनाकर बंदीगृह में बंद करकज रखा था। कंस अपनी बहन देवकी से बहुत प्रेम करता था। जब देवकी का विवाह वसुदेव से हुआ, उसके बाद वह अपनी बहन को रथ पर बैठाकर उसके ससुराल छोड़ने के लिए जा रहा था तभी आकाशवाणी हुई - "कंस, देवकी का आठवां पुत्र ही तेरा वध करेगा।" इससे भयभीत कंस ने देवकी और वसुदेव को कारागार में डाल दिया, और उसने देवकी के एक-एक करके उनके सात पुत्रों का वध कर दिया। इसके बाद आठवें पुत्र के जन्म का समय आया।
कथा वाचक ने कहा कि भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि थी, आधी रात का समय। घोर अंधकार और वर्षा हो रही थी। तभी कारागार में दिव्य प्रकाश हुआ और भगवान विष्णु ने देवकी व बासुदेव को चतुर्भुज रूप में दर्शन दिए। उन्होंने कहा - मैं ही तुम्हारे पुत्र के रूप में जन्म ले रहा हूँ। उन्होंने कहा कि फिर वे बालक कृष्ण के रूप में प्रकट हो गए। उसी समय वसुदेव की हथकड़ियां खुल गईं, पहरेदार सो गए और कारागार के दरवाजे स्वयं खुल गए। कथा वाचक ने कहा कि वसुदेव को आदेश मिला कि इस बालक को गोकुल में नंद बाबा के यहाँ छोड़ आओ। वसुदेव टोकरी में कृष्ण को लेकर यमुना की ओर चले। यमुना उफान पर थी, पर जैसे ही कृष्ण के चरणों ने जल को स्पर्श किया, यमुना ने मार्ग दे दिया। शेषनाग ने फन से बालक की वर्षा से रक्षा की। गोकुल में नंद के घर उसी रात यशोदा ने एक कन्या को जन्म दिया था। वसुदेव ने कृष्ण को वहाँ सुलाया और उस कन्या को लेकर मथुरा लौट आए। इसी बीच जब कंस ने उस कन्या को मारना चाहा, तो वह हाथ से छूटकर आकाश में दुर्गा के रूप में प्रकट हुई और बोली - "तेरा वध करने वाला तो गोकुल में सुरक्षित है। इसी दिव्य रात को हर वर्ष जन्माष्टमी के रूप में मनाया जाता है।
इस मौके पर विनोद सिंह , संजय सिंह, राजेन्द्र प्रताप सिंह, धर्मेन्द्र सिंह, ओम प्रकाश सिंह, पवन सिंह, समीर सिंह, शिव कुमार सिंह, रणधीर सिंह, सुनील सिंह, अनिल कुमार, सौरभ सिंह, अमरेश, गौरव, राजेश बहादुर, अनुराग, गिरिजा शंकर सिंह आदि मौजूद रहे।