रायबरेली-विद्यालय बंद होने की असली सच्चाई, पूर्व एनपीआरसीसी और बीईओ की भूमिका पर सवाल!

रायबरेली-विद्यालय बंद होने की असली सच्चाई, पूर्व एनपीआरसीसी और बीईओ की भूमिका पर सवाल!

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रिपोर्ट:- ऋषि मिश्रा
मो०न०:-9935593647

बछरावां रायबरेली। प्राथमिक विद्यालय रामपुर का मामला अब केवल निर्माण या संचालन में अनियमितताओं तक सीमित नहीं रहा है। यह सीधे प्रशासनिक जवाबदेही, पारदर्शिता और सरकारी धन के प्रबंधन पर गंभीर प्रश्न खड़ा कर चुका है। वर्ष 2014 में विद्यालय को विधिवत स्वीकृति मिली, तीन शिक्षकों की नियुक्ति हुई और एसएमसी खाते में धनराशि आवंटित/आहरित की गई। इसके बाद विद्यालय संचालन प्रारंभ हुआ और लगभग दो वर्षों तक अध्ययन कार्य नियमित चला। अचानक शिक्षक को उसके मूल विद्यालय भेज दिया गया, लेकिन विद्यालय बंद करने का कोई लिखित या विधिवत आदेश अभिलेखों में मौजूद नहीं है। ग्रामीणों और स्थानीय सूत्रों का आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया में पूर्व एनपीआरसीसी और पूर्व खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ बछरावां) की भूमिका संदिग्ध रही। शिक्षक को कार्यमुक्त कराना, संचालन रोकना, छात्रों का अन्य विद्यालय में स्थानांतरण कराना और निर्माण कार्य लंबित रखना-ये सभी महत्वपूर्ण निर्णय सीधे इन अधिकारियों के हस्तक्षेप और नियंत्रण में लिए गए होंगे। सूचना के अधिकार के तहत सामने आए दस्तावेज़ों में विरोधाभासी तथ्य भी संदेह को और गहरा करते हैं। एक पत्र में विद्यालय को संचालित बताया गया, तो दूसरे में इसे नियम विरुद्ध करार दिया गया। भूमि विवाद और मानक दूरी के बहाने वास्तविक स्थिति को छिपाने का प्रयास स्पष्ट दिखाई देता है।सबसे गंभीर तथ्य यह है कि निर्माण के लिए आवंटित 10 लाख रुपये से अधिक की राशि अब तक एसएमसी खाते में निष्क्रिय पड़ी है। जबकि वर्षों पहले स्पष्ट निर्देश थे कि यदि निर्माण कार्य न हो, तो धनराशि लौटाई जाए। यह स्थिति सीधे सरकारी धन के दुरुपयोग और प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करती है। ग्रामीणों का आरोप है कि संबंधित अधिकारियों ने बिना आदेश विद्यालय को बंद कराकर बच्चों के भविष्य और सार्वजनिक धन के हित की अनदेखी की। छात्रों का अन्य विद्यालय में स्थानांतरण, निर्माण कार्य लंबित रखना और धनराशि निष्क्रिय रखना इन सभी कड़ियों को सीधे पूर्व एनपीआरसीसी और बीईओ बछरावां की निर्णय प्रक्रिया से जोड़ा जा सकता हो। अब यह स्पष्ट है कि विद्यालय बंद होने की असली सच्चाई और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका केवल उच्चस्तरीय, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच से ही उजागर हो सकती है  ग्रामीणों का कहना है कि जब तक यह जांच पूरी नहीं होती, पूर्व प्रकाशित खबर अधूरी मानी जाएगी और यह मामला प्रशासनिक लापरवाही से कहीं अधिक गंभीर-संरक्षण प्राप्त भ्रष्टाचार का प्रतीक बनकर रहेगा। मुख्य सवाल अब यही है कि पूर्व एनपीआरसीसी और बीईओ द्वारा लिए गए निर्णय, उनके कथन और दस्तावेज़ी साक्ष्य-इनकी जांच से ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि विद्यालय बंद करने की प्रक्रिया वैधानिक थी या बच्चों और सार्वजनिक धन के साथ खेल की गई।