रायबरेली-जांच शून्य, सवाल अनगिनत: क्या बछरावां बीईओ कार्यालय में भ्रष्टाचार को मिल रहा संरक्षण?

रायबरेली-जांच शून्य, सवाल अनगिनत: क्या बछरावां बीईओ कार्यालय में भ्रष्टाचार को मिल रहा संरक्षण?

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जांच समिति की चुप्पी ने बढ़ाए संदेह, शिक्षकों में उबाल



15 मार्च 2026 तक कार्रवाई न हुई तो होगा धरना-प्रदर्शन?


रिपोर्ट:- ऋषि मिश्रा
मो०न०:-9935593647


बछरावां रायबरेली। विकास क्षेत्र बछरावां का बीईओ कार्यालय इन दिनों गंभीर आरोपों के भंवर में फंसा हुआ है। लेकिन इससे भी अधिक चौंकाने वाली बात यह है कि भ्रष्टाचार और अनियमितताओं से जुड़े दस्तावेजी साक्ष्य सामने आने के बावजूद जांच प्रक्रिया लगभग ठप पड़ी हुई है। तय समयसीमा समाप्त हो चुकी है, उच्चाधिकारियों के निर्देश भी जारी हो चुके हैं, फिर भी जांच आगे न बढ़ना पूरे मामले को गहरे संदेह के घेरे में ला खड़ा करता है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या जांच को जानबूझकर ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है? और यदि ऐसा है तो क्या यह पूरे मामले में संलिप्त कर्मचारियों को बचाने की सुनियोजित कोशिश है?शिक्षकों का आरोप है कि भ्रष्टाचार से जुड़े प्रमाणित साक्ष्य और लिखित शिकायतें देने के बावजूद जांच अधिकारी अब तक कोई ठोस कार्यवाही करने में पूरी तरह विफल रहे हैं। हालात ऐसे बन गए हैं कि जिस जांच से सच्चाई सामने आनी चाहिए थी, वही अब प्रशासनिक ढिलाई और टालमटोल का प्रतीक बनती जा रही है।यह स्थिति सीधे-सीधे यह सवाल खड़ा करती है कि क्या बेसिक शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली प्रदेश सरकार की भ्रष्टाचार के प्रति घोषित “जीरो टॉलरेंस” नीति को खुली चुनौती दे रही है।राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के जिलाध्यक्ष वीरेंद्र सिंह का कहना है कि संगठन लगातार जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी से मिलकर बछरावां कार्यालय में व्याप्त कथित अनियमितताओं और लंबित जांच पर तत्काल कार्रवाई की मांग कर रहा है, लेकिन अब तक प्रशासनिक स्तर पर केवल आश्वासन ही दिए गए हैं, कार्यवाही नहीं।उन्होंने आरोप लगाया कि कई शिक्षकों की मूल सेवापुस्तिकाएं वर्षों से “गुम” बताई जा रही हैं, जबकि उसी दौरान वेतनवृद्धि, एसीपी, चयन वेतनमान और अन्य वित्तीय लाभ निर्गत होते रहे। यह स्थिति केवल साधारण लापरवाही नहीं बल्कि पूरी अभिलेखीय व्यवस्था और वित्तीय पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है। श्री सिंह का आरोप है कि कई पात्र शिक्षकों के एसीपी और चयन वेतनमान के मामलों को वर्षों तक जानबूझकर लंबित रखा गया। कुछ शिक्षकों का वेतन रोका गया, कई के वेतन से कटौती तक की गई, लेकिन सेवापुस्तिका में उसका कोई उल्लेख तक नहीं किया गया। सबसे गंभीर आरोप यह है कि कुछ अपात्र व्यक्तियों को चयन वेतनमान का लाभ दिया गया, जबकि पात्र शिक्षक आज भी अपने अधिकारों के लिए भटकने को मजबूर हैं। यदि यह आरोप सत्य सिद्ध होते हैं तो यह पूरे तंत्र की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर गहरी चोट है।इसके अतिरिक्त अवैध संबद्धता, शासकीय धन के संभावित दुरुपयोग और विद्यालय बंदी जैसे मामलों की भी निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। एक शिक्षिका की सेवापुस्तिका गुम होने की लिखित स्वीकारोक्ति के बावजूद अब तक किसी जिम्मेदार अधिकारी पर कार्यवाही न होना भी प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
महासंघ के महामंत्री संजय कन्नौजिया का कहना है कि शिक्षकों ने समाधान दिवस में दस्तावेजी साक्ष्यों सहित शिकायतें प्रस्तुत की थीं, लेकिन जांच समिति द्वारा अब तक कोई वास्तविक जांच न किया जाना पूरे प्रकरण को और अधिक संदिग्ध बना रहा है। उनका कहना है कि जिस जांच से सच्चाई सामने आनी चाहिए थी, वही अब कागजी औपचारिकता बनकर रह गई है।इस पूरे मामले में विभागीय स्तर पर बनी रहस्यमयी चुप्पी ने संदेह को और गहरा कर दिया है। न तो जांच की स्थिति स्पष्ट की जा रही है और न ही कोई जिम्मेदार अधिकारी सामने आकर जवाब देने को तैयार है।ऐसे में अब यह सवाल और तीखा हो गया है कि क्या जांच अधिकारी की निष्क्रियता ही पूरे मामले को दबाने की सबसे बड़ी वजह बन रही है?राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के जिलाध्यक्ष वीरेंद्र सिंह ने साफ चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर निष्पक्ष और पारदर्शी कार्रवाई नहीं हुई तो संगठन पूरे प्रकरण के अभिलेखीय साक्ष्य शासन स्तर तक पहुंचाएगा, विधिक कार्रवाई शुरू करेगा और आवश्यकता पड़ने पर 15 मार्च 2026 को बैठक कर बीएसए कार्यालय के बाहर शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन की रणनीति तय की जाएगी। फिलहाल बछरावां बीईओ कार्यालय का यह मामला अब केवल एक कार्यालय तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह पूरे बेसिक शिक्षा विभाग की पारदर्शिता, जवाबदेही और सरकार की “जीरो टॉलरेंस” नीति की वास्तविक परीक्षा बन गया है।अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी सच्चाई को सामने लाने का साहस दिखाते हैं या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों की धूल में दफन कर दिया जाएगा, और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई के दावे केवल भाषणों और कागजों तक सीमित रह जाएंगे।