बछरावां होली विवाद: पीड़ितों के दर्द व कराह पर भारी पड़तीं दिखाई दी वोट बैंक की राजनीति

बछरावां होली विवाद: पीड़ितों के दर्द व कराह पर भारी पड़तीं दिखाई दी वोट बैंक की राजनीति

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पीड़ितों का साथ ही नहीं, हाल चाल भी नहीं लेने पहुंचे क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि, बन चुका है चर्चा का विषय! 

रिपोर्ट:- ऋषि मिश्रा
मो०न०:- 9935593647

बछरावां रायबरेली। बीते गुरुवार को थाना क्षेत्र के अंतर्गत कस्बे के जगन पुलिया के पास होली खेलने के जश्न के दौरान गैर समुदाय के द्वारा हिंदू पक्ष पर किए गए जानलेवा एवं आत्मघाती हमले में शासन एवं प्रशासन पूरी मुस्तैदी के साथ खड़ा हुआ दिखाई दिया, वहीं जनपद के विभिन्न हिंदू संगठनों ने आम जनमानस एवं पीड़ितों के साथ स्थानीय थाने पहुंचकर थाने का घेराव करते हुए शासन प्रशासन से अपनी मांगों के अनुरूप दोषियों पर कार्यवाही कर उन्हें गिरफ्तार करने के साथ-साथ कठोर सजा दिलाने की बात कही। जिस पर शासन प्रशासन द्वारा तत्काल संज्ञान लेते हुए मुकदमा पंजीकृत कर आगे की कार्यवाही शुरू की गई। इस मामले में जहां विभिन्न हिंदू संगठन पीड़ितों के साथ आगे आते दिखाई दिए, वहीं भाई-भाई के विवाद सहित तमाम छोटे-मोटे विवादों में हस्ताक्षेप करने वाले क्षेत्र के तमाम ऐसे जनप्रतिनिधि जो अपने आपको चुनाव के समय आपका हितैषी बताते हुए थकते नजर नही आते हैं, वह इस गंभीर मामले में साथ देने की तो छोड़े, अपितु घटना के बाद पीड़ितों का हाल चाल जानने के लिए भी नहीं पहुंचे। जिस बात की चर्चा क्षेत्र में शुक्रवार को बड़ी तेजी के साथ सुनाई दे रही है। क्षेत्रीय लोग दबी जुबान से यह कहते हुए भी नजर आ रहे हैं कि चुनाव के समय वोट मांगने वाले यही क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि अपने आपको आपका हितैषी बताते हुए सुख-दुख में साथ खड़े होने की बात कहते हुए नजर आते हैं, लेकिन इस गंभीर मामले में जब हम हिंदुओं को उनकी जरूरत थी तो वह अपनी वोट बैंक की राजनीति पर उत्पन्न होने वाले खतरे का अंदेशा लगाकर अपने घरों में कैद थे, न ही वह हिंदू पक्ष का साथ देने के लिए शासन प्रशासन से बात करने पहुंचे, न ही उन्होंने उक्त घटना में घायल हुए हिंदू पक्ष के घायलो, पीड़ितों एवं उनके परिजनों का हाल-चाल जानना उचित समझा। साथ ही साथ क्षेत्रीय लोग यह भी कहते हुए नजर आ रहे हैं कि कहीं न कहीं इस घटना में क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों के करीबियों की भी संलिप्तता है, जिसके कारण वह अपने स्वार्थ को देखते हुए अपने घरों में कैद है। फिलहाल लोगों के जहन में यह सवाल जरूर उठ रहा है कि क्षेत्र के छोटे-छोटे मामलों में दखल देने वाले क्षेत्र के तमाम जनप्रतिनिधि हिंदू पक्ष के इस गंभीर मामले में उनका साथ देने के लिए क्यों नहीं पहुंचे, जो की एक ही यक्ष प्रश्न बना हुआ है?