रायबरेली-असत जड़ता और दुःख के भाव से रहित है भगवान राम,,,,,

रायबरेली-असत जड़ता और दुःख के भाव से रहित है भगवान राम,,,,,

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      रिपोर्ट-सागर तिवारी


ऊंचाहार-रायबरेली - भगवान राम का पूरा जीवन असत जड़ता और दुखों से रहित है , वो लीलाओं में दुःखी होते है , सीता की खोज में रोते भी है , उन्हें पूरी अयोध्या से अनुराग भी दिखता है किंतु वास्तव में वो इन सब से परे है । यह विचार ऊंचाहार नगर के कोतवाली रोड पर चल रही राम कथा में कथावाचक वृन्दावन से आई प्रगति पांडेय  ने व्यस्त किए । 
    उन्होंने भगवान शिव और पार्वती के बीच भगवान राम के जीवन को लेकर हुए संवाद की वृतांत सुनाते हुए कहा कि भगवान शिव पार्वती को बताते हैं कि वो हर्ष-विषाद, ज्ञान और अज्ञान विक्षेप अभाव प्राप्ति की इच्छा, ये सब जीव के धर्म हैं। ये तो हमारे प्रभु राम हैं, जो अपने भक्तों को इस भवसागर से पार उतारने के उपाय बताने के लिए अवतरित हुए हैं। वस्तुत: इनके अंदर कभी असत, जड़ता, और दुख का भाव आ ही नहीं सकता है। ये तो जानबूझ कर मनुष्यों जैसी लीला कर रहे हैं। माया, जड़ता और दुख को लीला की पूर्णता के लिए स्वयं स्वीकार करके सब कर रहे हैं। पर पार्वती नहीं मानीं। भगवान समझ गये कि मेरे कहने पर भी यदि पार्वती  मान नहीं रही हैं, तो इसमें तो प्रभु की कोई प्रबल माया कार्य कर रही है। उसके बाद सीता को खोज रहे भगवान राम के सामने पार्वती सीता का रूप धारण कर पहुंच गई । उन्हें देखते ही भगवान राम ने उन्हें प्रणाम किया और कहा कि देवी आप अकेले आई हो , भोलेनाथ को नहीं लाई। भगवान राम के संबोधन से पार्वती का संशय दूर हुआ । कथावाचक ने कहा कि यदि कोई आपके समझाने पर भी न मानें तो या तो हम उसको डांट-फटकार कर अज्ञानी घोषित कर उसका उपहास करने लगते हैं। पर भगवान का भक्त यह नहीं करता है। वह तो किसी के चरित्र में न्यूनता देखकर अपने जीवन के लिए शिक्षा लेता है। उसकी मति के कपाट और भी खुल जाते हैं कि देखें अब हमारे प्रभु इसके जीवन से हमें क्या सिखाना चाहते हैं। ज्ञानी तो वही है, जो संसार में हर व्यक्ति, हर घटना और प्रत्येक परिणाम से कुछ न कुछ सीख लेता है। कथा के दौरान मुख्य यजमान पूर्व प्रधान लालचंद कौशल , पूर्व प्रधान माधुरी कौशल , गया प्रसाद कौशल ,राजेश कुमार अग्रहरि, सिद्धनाथ और लालता प्रसाद आदि मौजूद थे।