जांच ठप या जानबूझकर विलंब? बछरावां बीईओ कार्यालय प्रकरण में नए सवाल!

जांच ठप या जानबूझकर विलंब? बछरावां बीईओ कार्यालय प्रकरण में नए सवाल!

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रिपोर्ट:- ऋषि मिश्रा
मो०न०:-9935593647

बछरावां रायबरेली। विकास क्षेत्र बछरावां के खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) कार्यालय से जुड़ा विवाद अब प्रशासनिक जवाबदेही की बड़ी परीक्षा बनता जा रहा है। अब तक खबरें कथित भ्रष्टाचार, सेवापुस्तिका गुम होने और वेतन अवरोधन जैसे आरोपों पर केंद्रित थीं, किंतु ताज़ा घटनाक्रम में सबसे बड़ा सवाल स्वयं जांच प्रक्रिया की निष्क्रियता पर उठ रहा है। सूत्रों के अनुसार 20 जनवरी 2026 को गठित जांच समिति को एक माह के भीतर आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे। 12 फरवरी 2026 को संबंधित पक्ष (बीईओ बछरावां) से स्पष्टीकरण भी मांगा गया, उनके द्वारा कोई जवाब देना उचित नहीं समझा गया। समय सीमा बीत जाने के बावजूद जांच की प्रगति को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। इससे पूरे प्रकरण की पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लग गया है। इस बीच राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के जिलाध्यक्ष वीरेंद्र सिंह के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी  को विस्तृत ज्ञापन सौंपकर कार्यालय में व्याप्त कथित अनियमितताओं और लंबित जांच पर तत्काल कार्यवाही की मांग की है। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि कई शिक्षकों की मूल सेवापुस्तिकाएं वर्षों से “गुम” बताई जा रही हैं, जबकि उसी अवधि में वेतनवृद्धि, एसीपी, चयन वेतनमान एवं अन्य सेवा लाभ निर्गत होते रहे। इससे अभिलेखीय व्यवस्था और वित्तीय पारदर्शिता दोनों पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि अनेक शिक्षकों के एसीपी एवं चयन वेतनमान के प्रकरण अनावश्यक रूप से लंबित रखे गए, वेतन अवरोधन किया गया, कुछ मामलों में सेवापुस्तिका में प्रविष्टि किए बिना वेतन कटौती की गई तथा वेतन बहाली आदेश वर्षों तक लागू नहीं किए गए। संगठन का आरोप है कि अपात्र व्यक्ति को चयन वेतनमान का लाभ देकर पात्र शिक्षकों को वंचित रखा गया। इसके अतिरिक्त अवैध संबद्धता, शासकीय धन के संभावित दुरुपयोग और विद्यालय बंदी जैसे मामलों की भी निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। एक शिक्षिका की सेवा पुस्तिका गुम होने की लिखित स्वीकारोक्ति के बावजूद जिम्मेदारों पर कार्यवाही न होना प्रशासनिक शिथिलता का उदाहरण बताया गया है। महासंघ के पदाधिकारियों का कहना है कि न तो उनसे औपचारिक रूप से साक्ष्य मांगे गए और न ही किसी सुनवाई की तिथि की सूचना दी गई। इससे यह आशंका प्रबल हो रही है कि कहीं जांच केवल कागजी औपचारिकता बनकर न रह जाए। हालांकि विभागीय सूत्रों का कहना है कि प्रक्रिया प्रचलन में है और आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं, लेकिन आधिकारिक स्तर पर अब तक कोई स्पष्ट वक्तव्य सामने नहीं आया है। संगठन ने मांग की है कि जांच तत्काल प्रभाव से प्रारंभ कर निर्धारित समयसीमा में पूर्ण कराई जाए तथा अब तक की प्रगति से लिखित रूप में अवगत कराया जाए। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि ठोस कार्यवाही सुनिश्चित नहीं की गई तो उच्चाधिकारियों को अभिलेखीय साक्ष्यों सहित अवगत कराने, विधिक कार्यवाही प्रारंभ करने और कार्यालय पर शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन जैसे कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल पूरा मामला प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही की कसौटी पर खड़ा है, और क्षेत्रीय शिक्षकों की निगाहें जांच समिति की अगली कार्यवाही पर टिकी हैं।