एम्स रायबरेली में एक दुर्लभ जन्मजात स्थिति 'सिटस इनवर्सस टोटैलिस' से पीड़ित मरीज की सफलतापूर्वक की गई लैप्रोस्कोपिक कोलेसिस्टेक्टोमी
रिपोर्ट-ओम द्विवेदी(बाबा)
मो-8573856824
एम्स रायबरेली में एक दुर्लभ जन्मजात स्थिति 'सिटस इनवर्सस टोटैलिस' से पीड़ित मरीज की सफलतापूर्वक की गईलैप्रोस्कोपिक कोलेसिस्टेक्टोमी
एम्स रायबरेली के जनरल सर्जरी विभाग की यूनिट-1 ने एक अत्यंत चुनौतीपूर्ण और दुर्लभ स्थिति वाले मरीज की सफल लैप्रोस्कोपिक (दुर्बीन) सर्जरी कर महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। पूरे विजय सिंह, रगाँव, लालगंज की रहने वाली 46 वर्षीय महिला को पित्त की थैली में पथरी (Cholelithiasis) की समस्या थी। जांच के दौरान पता चला कि मरीज को एक दुर्लभ जन्मजात स्थिति 'सिटस इनवर्सस टोटैलिस' है। इस स्थिति में शरीर के अंदर मौजूद महत्वपूर्ण अंग अपनी सामान्य स्थिति के विपरीत दिशा में होते हैं। सरल शब्दों में कहें तो मरीज के शरीर के अंदर के अंग आईने में दिखने वाली तस्वीर की तरह उल्टी दिशा में स्थित थे।
ऐसे मरीज में सामान्य लैप्रोस्कोपिक ऑपरेशन करना सर्जन के लिए काफी चुनौतीपूर्ण होता है, क्योंकि शरीर के अंगों की स्थिति सामान्य मरीजों से पूरी तरह अलग होती है। ऑपरेशन के दौरान सर्जिकल उपकरणों और लैप्रोस्कोपिक पोर्ट की स्थिति भी सामान्य से विपरीत दिशा में रखनी पड़ती है। इसके कारण सर्जन को सामान्य से बिल्कुल अलग तरीके और दिशा में काम करना पड़ता है।
इस चुनौतीपूर्ण परिस्थिति के बावजूद, एम्स रायबरेली के जनरल सर्जरी विभाग की यूनिट-1 के डॉ. नीरज कुमार श्रीवास्तव के द्वारा की गई ।सर्जिकल टीम में डॉ. प्रणभ कुशवाहा, डॉ. अमृतांशु सौरभ और डॉ. शिरीष कुमार शामिल,डॉ. योगेश (सीनियर रेजिडेंट) और डॉ. हिमांशु (जूनियर रेजिडेंट) शामिल रहे। टीम ने मरीज की शरीर की असामान्य संरचना को ध्यान में रखते हुए पोर्ट और उपकरणों की स्थिति को विपरीत दिशा में व्यवस्थित किया और सफलतापूर्वक लैप्रोस्कोपिक कोलेसिस्टेक्टॉमी (दुरबीन द्वारा पित्त की थैली निकालने की सर्जरी) की। एनेस्थीसिया टीम के डॉ. अनिल, डॉ. निलंबरा (सीनियर रेजिडेंट) और डॉ. अपेक्षा (जूनियर रेजिडेंट) और नर्सिंग ऑफिसर जुबैर ने भी ऑपरेशन को सफलतापूर्वक पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इस उपलब्धि पर एम्स रायबरेली की निदेशक डॉ. अमिता जैन ने यूनिट-1 और पूरी सर्जिकल टीम को बधाई दी। उन्होंने टीम के समर्पण, तकनीकी दक्षता और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में सुरक्षित तरीके से ऑपरेशन करने की क्षमता की सराहना की। इस अवसर पर डॉ. अमिता जैन ने कहा कि एम्स रायबरेली का जनरल सर्जरी विभाग भविष्य में भी कठिन और जटिल मरीजों में आधुनिक मिनिमली इनवेसिव सर्जरी करने के लिए हमेशा तैयार रहेगा। इसका उद्देश्य अधिक से अधिक मरीजों को छोटे चीरे, कम दर्द और तेजी से स्वस्थ होने वाली आधुनिक सर्जरी का लाभ देना तथा जहाँ संभव हो, ओपन सर्जरी से जुड़े जोखिमों को कम से कम करना है। यह सफल ऑपरेशन एम्स रायबरेली में उपलब्ध आधुनिक सर्जिकल सुविधाओं और जनरल सर्जरी विभाग की विशेषज्ञता का एक और उदाहरण है। दुर्लभ और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी मरीजों को आधुनिक, सुरक्षित और कम चीरे वाली सर्जरी उपलब्ध कराने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है।

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