रायबरेली के महराजगंज के युवक ने संपत्ति छोड़ माथे लगाई संगम की रेत, 25 साल का युवक बना संन्यासी

रायबरेली के महराजगंज के युवक ने संपत्ति छोड़ माथे लगाई संगम की रेत, 25 साल का युवक बना संन्यासी

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रिपोर्ट-ओम द्विवेदी(बाबा)

मो 8573856824

संपत्ति छोड़ माथे लगाई संगम की रेत, 25 साल का युवक बना संन्यासी

रायबरेली के महाराजगंज के अमर कमल रस्तोगी के जीवन में इस साल का पहला दिन यानि पहली जनवरी की तारीख ऐसा बदलाव लेकर आई कि उन्होंने करोड़ों की संपत्ति को ठोकर मार दी। प्रयागराज संगम की रेत पर मन सनातन में ऐसा रमा कि एसी कमरा, बेहतरीन दफ्तर और बाकी सुख सुविधाएं छोड़कर संन्यास की राह को अपना लिया।

गुरु की शरण में पहुंचे और अपना क्षौरकर्म कराकर अब इस ठंड में पुआल के बिस्तर पर ताउम्र जीवन गुजारने का संकल्प ले लिया।

25 साल के अमर कमल रस्तोगी का रायबरेली में जन सेवा केंद्र था। बैंक से जुड़े होने के कारण बैंक अफसरों से अच्छा तालमेल था और जीवन बेहतरीन गुजर रहा था। बड़े होटलों और महंगे रेस्टोरेंट में जाना उनकी दिनचर्या में शामिल था। तीन बहनों में अकेले भाई अमर को माता-पिता का दुलार भी खूब मिल रहा था। बड़ी बहन जन सेवा केंद्र का संचालन करती हैं। दूसरे नंबर की बहन लखनऊ में पंजाब नेशनल बैंक में नौकरी करती हैं। सबसे छोटी बहन अभी पढ़ाई कर रही है। अमर कमल ने अपनी कमाई से रायरबेली मुख्य मार्ग पर चार मंजिला दो मकान बनवाए, जिसकी बाजार कीमत इस वक्त डेढ़ करोड़ से अधिक बताई जा रही है। जीवन में पहली बार एक जनवरी को संगमनगरी आने के बाद अमर कमल रस्तोगी के मन में वैराग्य जागा।

उन्होंने महावीर पांटून पुल पार किया और वैष्णव संत महामंडलेश्वर गोपालदास के संपर्क में आए। फिर क्या था, अमर ने संत से संन्यास लेने की इच्छा जाहिर की। पहले तो उन्होंने मना किया लेकिन जब अमर अपनी बात पर अड़े रहे तो उनका क्षौरकर्म कराकर मूंज का जनेऊ पहना दिया गया और उन्हें संन्यास की दीक्षा भी दे दी गई। संन्यास के बाद नया नाम मिला यश्वनी दास। यश्वनी ने बताया कि उन्होंने अपने बनवाए दोनों मकान माता-पिता को सौंप दिए हैं। स्नातक शिक्षा ग्रहण करने वाले यश्वनी दास ने बताया कि जब संगम तट पहुंचे तो जीवन में बड़ा बदलाव आया।