बजट का बहाना लेकर गुटखा मसाला खाने वालों को लूट रहे हैं छोटे-बड़े सभी व्यापारी

बजट का बहाना लेकर गुटखा मसाला खाने वालों को लूट रहे हैं छोटे-बड़े सभी व्यापारी

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रिपोर्ट:- ऋषि मिश्रा
मो०न०:-9935593647


बछरावां रायबरेली। केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा जो बजट पेश किया गया है, उसमें गुटखा मसाला पर ज्यादा टैक्स लगाया गया है, परंतु यह है निर्णय 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा। परंतु जैसे ही वित्त मंत्री द्वारा लोकसभा में बजट पेश किया गया, गुटखा निर्माताओं से लेकर छोटे-बड़े व्यापारियों ने लूट का तांडव मचाना शुरू कर दिया। एक छोटे व्यापारी ने बताया की जो कमला पसंद पहले ₹170 का मिलता था, और उसमें 39 पुड़िया होती थी। बड़े व्यापारियों द्वारा पहले उसे 190 का किया गया और फिर 210 रुपए का बेचा जाने लगा। नतीजा यह हुआ कि इसे खरीद कर लाने वाले छोटे व्यापारियों ने भी गुटखा के शौकीन लोगों की जेब पर डाका डालना शुरू कर दिया और कमला पसंद और राजश्री ₹7 का बेचने लगे। इस तरह छोटे व्यापारियों को जब 170 रुपए का था तो ₹5 प्रति पाउच बेचने के बाद ₹25 प्रति पैकेट मिलते थे, क्योंकि पूरे पैकेट की बिक्री पर 195 बनते थे। मौजूदा समय में हालात यह है कि अब 210 का लेकर छोटे व्यापारी एक पैकेट में 65 रुपए का फायदा उठा रहे है। सवाल यह उठता है कि जब अभी बजट के नियम लागू नहीं हुए हैं, उसका टैक्स स्लैब अभिक्रियान्वीत नहीं हुआ है तो आखिर यह लूट क्यों की जा रही है। वैसे भी निर्माता और थोक विक्रेताओं की साठ गांठ से पहले भी टैक्स की चोरी धड़ल्ले से की जा रही थी, होता यह था कि जिस गाड़ी पर गुटखा मसाला से भरे हुए बोरे लादे जाते थे, उस गाड़ी के चालक को एक बील्टी दी जाती थी जो भयंकर रूप से टेप के द्वारा चिपकाए जाती थी और ड्राइवर को यह आदेशित किया जाता था कि अगर रास्ते में कोई अधिकारी मिल जाए तो जैसे भी हो सके भले ही लेन-देन करना पड़े यह बील्टी खुलने ना पाए और होता भी यही था अगर रास्ते में कोई अधिकारी न मिला और वह पैकेट खोला न गया तो व्यापारी के पास माल आने के बाद वह बंद लिफाफा फैक्ट्री में चला जाता था और उस बिके हुए माल को नंबर दो का करार दे दिया जाता था और अगर कहीं किसी अधिकारी ने उस पैकेट को खोल डाला तो वह नंबर एक में हो जाता था। खैर यह व्यापारियों का अपना खेल है, वह जो करते हैं और करते रहेंगे। परंतु सवाल यह उठता है कि जब अभी बजट के प्रावधान लागू नहीं हुए हैं तो ग्राहकों की जेब पर इतना भयंकर डाका क्यों डाला जा रहा है, क्या जिम्मेदार अधिकारी इस ओर ध्यान देने का कष्ट करेंगे?