चंदौसी में पति के टुकड़े करने वाली रूबी ने पुलिस को दी चुनौती
चंदौसी। जिस शातिराना अंदाज में रूबी ने अपने ही पति की हत्या को अंजाम दिया, उसी बेखौफी के साथ उसने पुलिस को दोष सिद्ध करने की खुली चुनौती भी दे डाली। पुलिस के अनुसार, जेल ले जाते समय रूबी ने कहा कि अभी तो तुमने मुझे पकड़ लिया है, लेकिन कोर्ट में मेरे खिलाफ कुछ भी साबित नहीं कर पाओगे।
उसका कहना था कि पुलिस को अभी शव के केवल कुछ हिस्से ही मिले हैं, पूरी बाडी तो मिली ही नहीं है। न सिर बरामद हुआ है और न ही हाथ-पांव। ऐसे में पुलिस कैसे साबित करेगी कि ये अवशेष राहुल के ही हैं। रूबी ने यह भी कहा कि पुलिस चाहे जितनी कोशिश कर ले, उसका सिर कभी नहीं ढूंढ़ पाएगी और जब तक सिर नहीं मिलता, तब तक उसका जुर्म सिद्ध नहीं किया जा सकता।
उधर, स्वयं पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार विश्नोई भी गंगा में फेंके गए अंगों के मिलने की संभावना न के बराबर मान रहे हैं। जांच के दौरान पुलिस रूबी, गौरव और टैक्सी चालक को घटनास्थल पर ले गई और अंगों की तलाश का प्रयास भी किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। पुलिस का कहना है कि घटना को एक माह से अधिक समय बीत चुका है, ऐसे में अंगों के जलीय जीवों द्वारा खा लिए जाने या पानी के बहाव में बह जाने की पूरी संभावना है।
हालांकि पुलिस का दावा है कि मामले में उसके पास पर्याप्त और मजबूत साक्ष्य मौजूद हैं। पुष्टि के लिए डीएनए जांच का सहारा भी लिया जा रहा है। शव से एकत्र किए गए डीएनए का मिलान बच्चों के डीएनए से कराया जा रहा है। कोतवाली प्रभारी अनुज कुमार तोमर ने बताया कि केस को मजबूत करने के लिए पुलिस के पास भौतिक और इलेक्ट्रानिक दोनों तरह के पर्याप्त साक्ष्य हैं। डीएनए रिपोर्ट आते ही इन पर अंतिम मुहर लग जाएगी।
22 नवंबर को देहरादून से पति का कमरा कराया था खाली
कोतवाली प्रभारी अनुज कुमार तोमर ने बताया कि राहुल अपना माल देहरादून तक सप्लाई करता था। इसी सिलसिले में उसका वहां आना-जाना रहता था। बार-बार होटल या धर्मशाला का किराया न देना पड़े, इसलिए उसने वहां एक कमरा किराये पर ले रखा था। बीते 22 नवंबर को रूबी देहरादून गई थी और वहां से पति के कमरे का सारा सामान समेट कर ले आई थी। उसका कहना था कि कमरे का किराया बेवजह चढ़ रहा था। इस घटनाक्रम से पुलिस का शक और गहरा हो गया कि रूबी ने पहले से सोची-समझी साजिश के तहत अपने पति की हत्या की थी।

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