BJP MLA पर 120 करोड़ के निर्माणकार्यों में धांधली का आरोप, जिला पंचायत अध्यक्ष ने दी तहरीर

BJP MLA पर 120 करोड़ के निर्माणकार्यों में धांधली का आरोप, जिला पंचायत अध्यक्ष ने दी तहरीर

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बांदा जनपद में सत्ता पक्ष के दो जनप्रतिधिनियों के बीच तकरार मंगलवार को कोतवाली पहुंच गई। जिला पंचायत अध्यक्ष सुनील सिंह पटेल ने भाजपा के सदर विधायक प्रकाशचंद्र द्विवेदी और उनकी पत्नी पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष सरिता द्विवेदी के खिलाफ तहरीर दी है।

रजिस्टर्ड डाक से एसपी को भी शिकायत भेजी। धांधली का आरोप लगाया गया है। आरोप लगाया कि वर्ष-2018 से वर्ष 2020 तक जिला पंचायत के 120 करोड़ के निर्माणकार्यों को अध्यक्ष के बजाए विधायक पति ने कूटरचित हस्ताक्षर कर स्वीकृति दी। इसके अलावा खनिज परिवहन शुल्क वसूली की नीलामी की वित्तीय स्वीकृति और जिला परिषद कृषि महाविद्यालय में 11 लोगों की नियुक्तियां तत्कालीन अध्यक्ष सरिता द्विवेदी के कूटरचित हस्ताक्षरों से की गईं। बताया कि सदर विधायक जिला पंचायत के पदेन सदस्य रहे हैं। अपने पद का दुरुपयोग करते हुए रिश्तेदारों और सहयोगियों को लाभ पहुंचाया। राजनैतिक विरोधियों को परेशान किया।

फॉरेंसिक से कराई जांच में हस्ताक्षर मिले भिन्न

तहरीर में लिखा गया कि हस्ताक्षरों की जांच शिकायत प्राप्त होने पर दो फॉरेंसिक एक्सपर्ट से कराई गई है। बोर्ड बैठक के दौरान उपस्थित पंजिका के हस्ताक्षरों का मिलान, उपरोक्त निर्माण कार्यों की वित्तीय स्वीकृति, बिल भुगतान एवं नियुक्ति पत्रों के हस्ताक्षरों से मिलान कराया गया। फॉरेसिंक विशेषज्ञों ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि उपस्थित पंजिका में किए गए अध्यक्ष के हस्ताक्षर एवं 120 करोड़ रुपये के निर्माण संबंधी पत्रावलियों, बिल भुगतान एवं नियुक्त संबंधी पत्रावलियों में किए गए हस्ताक्षर भिन्न हैं।

डीएम महोबा पर दबाव में एकपक्षीय जांच करने का आरोप

जिला पंचायत अध्यक्ष सुनील सिंह पटेल पर भी छह करोड़ रुपये के गबन के आरोप लगे थे। महोबा डीएम की जांच में ये आरोप सही भी पाए गए थे। इस संबंध में जिला पंचायत अध्यक्ष ने मंगलवार को प्रेसवार्ता कर आरोपों को निराधार बताया। कहा वर्ष 2018-19 से अब तक की विस्तृत जांच कराने की मांग की गई थी। अपर आयुक्त चित्रकूटधाम मंडल ने आदेशित किया था पर समिति ने सदर विधायक के दबाव में विस्तृत जांच नहीं की। षड़यंत्र व राजनीतिक साजिश के तहत कार्रवाई करने का प्रयास किया जा रहा है। क्योंकि पूर्व में 28 दिसंबर की जांच में उन्हें दोषी नहीं माना गया है। सदर विधायक दबाव बनाकर मनमाफिक काम कराने का प्रयास कर रहे हैं। जिले व शासन के अधिकारी मेरे प्रत्यावेदन को अनदेखा कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि 12 जुलाई 2021 को गठित जिला पंचायत बोर्ड की अब तक आयोजित लगभग सभी बैठकों में सदर विधायक उपस्थित रहे। तीन साल तक कोई शिकायत नहीं की। अब ऐसा क्या हो गया कि उन्हें वर्ष 2022-23 की जांच कराने के लिए अपना पत्र प्रेषित करना पड़ा। कहा कि पूर्व अध्यक्ष सरिता द्विवेदी के कार्यकाल वर्ष 2017-18 में 3.66 करोड़, 2018-19 में 1.15 करोड़ 2019-20 में 1.70 करोड़ और 2020-21 में 2.12 करोड़ रुपये की खनिज तहबाजारी की बोली मंजूर की थी, तब किसी ने भी सवाल नहीं उठाया। कहा कि अपने कार्यकाल में तहबाजारी ठेका के लिए पांच बार ई-निविदा आमंत्रित की। शासनादेशानुसार नीलामी समिति की संस्तुति पर स्वीकृति प्रदान की गई। किसी भी प्रकार के अन्यथा लाभ की कोई गुंजाइश नहीं होती है। गबन के आरोप निराधार हैं। आधारहीन शिकायतें करके जिला पंचायत में प्रकाशित निर्माण कार्य के टेंडरों को निरस्त करवा दिया गया है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में कराए जाने वाले विकास कार्य अवरुद्ध हैं।