ऊंचाहार:नवोन्मेषी और प्रेरक वातावरण ने बनाया माय ग्लोबल स्कूल,,,

ऊंचाहार:नवोन्मेषी और प्रेरक वातावरण ने बनाया माय ग्लोबल स्कूल,,,

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  रिपोर्ट-सागर तिवारी 

- स्थापना दिवस पर मासूमों की कला ने दिखा दी खूबसूरत दुनिया की तस्वीर

ऊंचाहार , रायबरेली । मेहनत और लगन से किया गया एक छोटा सा प्रयास आज ऊंचाहार में नया मुकाम हासिल कर लिया । नवोन्मेषी और प्रेरक वातावरण ने माय छोटा स्कूल को ग्लोबल स्कूल में न सिर्फ स्थापित किया अपितु पूरे क्षेत्र में नाम भी पैदा किया है । नगर के गायत्री नगर मुहल्ले में चल रहे इस स्कूल का रविवार को स्थापना दिवस था , जिसमें नन्हे बच्चों के हुनर ने हर किसी को दांतों तले उंगलियां दबाने को विवश कर दिया । 
     इस विद्यालय की शुरुआत माय छोटा स्कूल के रूप  में हुई । यहां पर  एक ऐसा नवोन्मेषी, पोषणकारी और प्रेरक वातावरण प्रदान किया ,जहाँ बच्चे ने आत्मनिर्भरता, आत्मविश्वास और स्वयं तथा अपने आसपास की दुनिया के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण को  विकसित किया । इनका  पाठ्यक्रम बच्चों को ऐसे अनुभवों से जोड़ने के लिए बनाया गया है जो भाषा, साक्षरता, संगीत, शारीरिक गतिविधि, कला और सामाजिकता को बढ़ावा देता रहा । खेल के माध्यम से विकास के सभी क्षेत्रों को प्रोत्साहित किया गया ।
        कार्यक्रम के दौरान अयांश, आव्या, विवान, राघव, अनाया, वनिष्का और राध्या ने अपनी कला और हुनर का शानदार प्रदर्शन किया। इन बच्चों की रचनात्मकता और आत्मविश्वास ने वहां मौजूद सभी का दिल जीत लिया।
     समारोह का मुख्य आकर्षण बच्चों द्वारा अपने हाथों से बनाए गए मॉडल्स और प्रोजेक्ट्स रहे। प्रदर्शनी में अंश मौर्य, शाश्वत मौर्य, सुदिक्षा, ओम, प्रिशा गुप्ता, आदित्री, इज़हान, गौरी भदौरिया, आर्या यादव, गौरी मिश्रा, तनिष्का, आद्या, अनुराधा, त्रिशा, अव्यान, मायशा, क्रिदय, आरुण्या, आदित्य, अनमोल, दिशांत और कनक ने अपनी उत्कृष्ट प्रतिभा का प्रदर्शन किया। बच्चों की इस मेहनत और उनके इनोवेटिव आइडियाज को देखकर हर कोई हैरान था।

*अभिभावकों के मनोरंजन के लिए आयोजित हुए गेम्स*

फाउन्डर्स डे को और भी खास बनाने के लिए स्कूल प्रबंधन द्वारा अभिभावकों के मनोरंजन का भी पूरा ध्यान रखा गया। पेरेंट्स के लिए विशेष रूप से कई रोमांचक गेम्स आयोजित किए गए, जिनका सभी ने भरपूर आनंद उठाया। इन खेलों ने माहौल में और भी खुशियाँ भर दीं।
इस खास मौके पर भारी संख्या में उपस्थित अभिभावकों ने बच्चों के हुनर और एक-एक प्रोजेक्ट को बारीकी से देखा। अभिभावकों ने न केवल बच्चों की जमकर तारीफ की, बल्कि लिखित रूप में अपना सकारात्मक फीडबैक भी दिया। अभिभावकों द्वारा मिली इस शाबाशी और प्रशंसा से बच्चों के चेहरे खिल उठे और उनका आत्मविश्वास कई गुना बढ़ गया।कार्यक्रम के अंत में स्कूल प्रबंधन ने सभी अभिभावकों का आभार व्यक्त किया और बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की