नौकरी जाती देख बिगड़ी नर्स की तबीयत, मांगती रही माफी फिर भी नहीं पसीजे मंत्री, कार्रवाई के बाद छोड़ा अस्पताल
जल शक्ति राज्यमंत्री रामकेश निषाद के सामने कुर्सी छोड़ कर खड़ी नहीं होने पर जिला महिला अस्पताल की संविदा स्टाफ नर्स की नौकरी संकट में आ गई। नर्स खुद को हृदय रोगी बताकर माफी मांगती रही, लेकिन मंत्री जी नहीं पसीजे।
सीएमएस ने देर रात नर्स की संबद्धता खत्म कर मूल तैनाती स्थल के लिए कार्यमुक्त कर दिया। अग्रिम आदेश तक वेतन रोकने व संविदा खत्म करने के लिए सीएमओ और जिला स्वास्थ्य समिति को संस्तुति पत्र भी भेज दिया। मंत्री तीन घंटे तक अस्पताल में रहे और कार्रवाई होने के बाद ही गए। वहीं नौकरी खतरे में देख नर्स की तबीयत बिगड़ गई, उसका जिला अस्पताल में इलाज किया गया।
यह है मामला
मंत्री गुरुवार रात करीब 10 बजे जिला अस्पताल में भर्ती एक मरीज को देखने गए थे। लौटते वक्त गंछा गांव के संतराम निषाद ने जिला महिला अस्पताल में प्रसव के लिए भर्ती पत्नी अभिलाषा के इलाज में मदद कराने के लिए आग्रह किया तो मंत्री महिला अस्पताल में स्टाफ नर्स के कक्ष में पहुंच गए।
कुर्सी से खड़ी नहीं हुई तो मंत्री हुए आगबबूला
उन्होंने नर्स चंद्रप्रभा को परिचय देकर पूछा, कौन डाक्टर ड्यूटी पर हैं? नर्स ने डाक्टर की जानकारी देने के साथ संतराम से कहा कि उन्होंने मरीज देखा तो है, मगर इस दौरान वह कुर्सी से खड़ी नहीं हुई। मंत्री इस पर आगबबूला हो गए। सीएमओ व सीएमएस को बुलाकर नर्स की सेवा समाप्त करने को कहा।
औचक निरीक्षण के लिए गया था। तीमारदारों के आरोपों पर जब वस्तुस्थिति समझने के लिए गया तो नर्स ने अभद्र व्यवहार किया। इसे लेकर सीएमओ और सीएमएस से कार्रवाई के लिए कहा गया है।
-रामकेश निषाद, जल शक्ति राज्यमंत्री।
सीएमएस ने रात में ही कक्ष खुलवाया
सीएमओ डाॅ. अनिल कुमार श्रीवास्तव व सीएमएस डाॅ. सुनीता सिंह ने गलती मान ली, मगर मंत्री कार्रवाई पर अड़ गए। मंत्री का रुख देख सीएमएस ने रात में ही अपना कक्ष खुलवाया।
नर्स ने भी मंत्री से माफी मांगते हुए कहा कि अक्सर तीमारदार आकर बड़ा पद बताते हुए उन पर दबाव बनाते हैं, इसलिए वह समझ नहीं सकी। दोबारा गलती नहीं होगी, मगर मंत्री तब भी नहीं पसीजे।
सीएमएस द्वारा नर्स की संबद्धता खत्म करने, वेतन रोकने और संविदा समाप्ति के लिए स्वास्थ्य समिति को पत्र अग्रसारित किए जाने के बाद ही मंत्री अस्पताल से हटे।

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