रायबरेली-सऊदी अरब देश में मृत हुए युवक का शव 16 दिन बाद पैतृक घर पहुंचने पर परिजनों में मचा कोहराम

रायबरेली-सऊदी अरब देश में मृत हुए युवक का शव 16 दिन बाद पैतृक घर पहुंचने पर परिजनों में मचा  कोहराम

-:विज्ञापन:-


रिपोर्ट-सागर तिवारी 



ऊंचाहार-रायबरेली-सात समंदर पार सऊदी अरब देश में मृत हुए युवक का शव 16 दिन बाद उसके पैतृक घर पहुंचने पर परिजनों में कोहराम मच गया, जिसके बाद परिजनों द्वारा शव का अंतिम संस्कार किया गया है।
गौरतलब है कि क्षेत्र के किशुनदासपुर गांव निवासी द्वारिका प्रसाद का बेटा रतन कुमार तीन वर्ष पूर्व रोजी रोटी की तलाश में अरबी देश सऊदी गया हुआ था, जहां वो दमाम रास्ता नूरा रहीमा जुबैल शहर के मेहान ह्यूमन रिसोर्सेज कम्पनी में मजदूरी का कार्य करने लगा,जिसके बाद से वो घर वापस नहीं लौटा, इसी माह 12 तारीख को उसकी मौत हो गई, दूसरे दिन उसके साथियों ने परिजनों को युवक के मौत की सूचना दी तो परिजन उसके शव घर लाने के लिए बेहाल हो गये, पिता द्वारिका मां राधे रानी भाई रिंकू रोहित व गणेश बहन सुषमा व कुशमा सभी को बस ये था कि रतन का शव घर आये, वहीं जानकारी होने पर पीड़ित परिवार के घर क्षेत्रीय विधायक डॉ मनोज कुमार पांडेय व राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार दिनेश प्रताप सिंह पहुंचे और मदद का आश्वासन दिया।
जिसके बाद समाचार के माध्यम से ये जानकारी क्षेत्र के कजियाना गाँव निवासी व कुवैत देश में भारतीय दूतावास के प्रतिनिधि नफीस इदरीसी को हुई तो वो पीड़ित परिवार के घर पहुंचे और मदद की प्रक्रिया शुरू कर दी, जिसमें उन्होंने अपने साथ मुंबई की रहने वाली अंतरराष्ट्रीय समाजसेवी शाहीन सैय्यद की मदद ली, आख़िरकार सोमवार की सुबह रतन का शव अरब देश सऊदी से हवाई जहाज के माध्यम से लखनऊ हवाई अड्डा पहुंचा, जिसके बाद परिजनों द्वारा उसे निजी वाहन से घर लाया गया, शव घर पहुंचने पर परिजनों में कोहराम मच गया, मां राधे रानी का कहना है कि तीन वर्षों से रतन घर नहीं आया था, दिसम्बर के महीने में बहन कुशमा की शादी थी,जिसको लेकर उसे सितंबर महीने में घर आना था, जिसके बाद परिजनों द्वारा क्षेत्र के गोकना घाट पर शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
मृतक के भाई रिंकू का कहना है कि नफीस इदरीसी व शाहीन सैय्यद के अथक प्रयास से उसके भाई का शव उसके घर आया नहीं तो हमारे परिवार ने तो उम्मीद ही छोड़ दी थी।
वहीं नफीस इदरीसी ने जानकारी देते हुए बताया कि हम कुवैत में भारतीय दूतावास के प्रतिनिधित्व के साथ साथ धर्म व जाति से उठकर समाजसेवा पर ज्यादा विश्वास रखते है ,इस मुहिम में अंतरराष्ट्रीय समाजसेविका शाहीन सैय्यद ने मदद की तब जाकर रतन का शव उसके पैतृक घर पहुंचा है।