रायबरेली-शिव महापुराण की कथा प्रेम सत्य व कल्याण का मार्ग बताती है - सत्यांशु जी महराज

रायबरेली-शिव महापुराण की कथा प्रेम सत्य व कल्याण का मार्ग बताती है - सत्यांशु जी महराज

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रिपोर्ट- सागर तिवारी

शिव' शब्द का अर्थ हैं 'मंगलकारी' या 'शुभ' 

ऊंचाहार , रायबरेली - ऊंचाहार क्षेत्र के गांव कोल्हौर मजरे पट्टी रहस कैथवल में चल रहे शिव महापुराण कथा के छटा दिन कथा वाचक सत्यांशु जी महराज ने भगवान शिव जी कि व्याख्या करते हुए उन्होंने बताया कि हिंदू धर्म के प्रमुख देवताओं में से एक हैं, जिन्हें कल्याणकारी (मंगलकारी), संहारक, और सृजन-संरक्षण-विनाश के चक्र के स्वामी के रूप में जाना जाता है, जो असीम, निराकार ब्रह्म के रूप में संपूर्ण ब्रह्मांड के आधार हैं, जो तपस्या, वैराग्य और आंतरिक शक्ति के प्रतीक हैं, तथा 'शि' (जीवन) और 'व' (परिवर्तन) से मिलकर बने हैं, जो हमें सांसारिक जिम्मेदारियों के साथ आध्यात्मिक संतुलन सिखाते हैं। 'शिव' शब्द का अर्थ है 'मंगलकारी' या 'शुभ'।
'शि' (जीवन देने वाली ऊर्जा) और 'व' (परिवर्तन) से मिलकर यह सृष्टि और बदलाव के देवता हैं। वे अनादि, निराकार, और परम सत्य (ब्रह्म) हैं, जिनका न कोई रूप, शरीर, या गुण है, लेकिन वे हर जगह मौजूद हैं।  
      उन्होंने कहा कि
शिव महापुराण की कथा मनुष्य को प्रेम भक्ति सत्य और कल्याण का मार्ग दिखाती है। जहां भगवान शिव की कथा का गुणगान होता है वहां का हर कंकर शंकर हो जाता है। शिवलिंग पर चढ़ाया गया एक लोटा जल जीवन को सफल बनाता है।
बताया की शिव महापुराण की कथा जीवन में प्रेम सत्य और भगवान के प्रति समर्पण भावना का महत्व बताती है। कथा वाचाक ने शिव महापुराण कथा के माध्यम से शिव भक्ति की व्याख्या की और बताया की जीवन में कैसी भी परेशानी का सामना करना पड़े भगवान शिव को एक लोटा जल दूध दही चढ़ाकर उनसे विनय करे हमारे जीवन की समस्या दूर होगी। उन्होंने सेवा का महत्व बताकर कहा की मंदिर में सफाई करने, मंदिर प्रकाश की व्यवस्था करना भी पुण्य का कार्य है। जीवन में सुख और दुख सबका सामना करना पडेगा। उन्होंने कहा की जिसे भगवान का प्रेम और सानिध्य की प्राप्ति होती वहा बडा भाग्यशाली हैं शिव महापुराण की कथा हमे परमात्मा के करीब लाती है। उन्होंने बताया की गंगा हमारे पाप धोती है तो भगवान शिव हमारे कष्टों का नाश करते हैं। उन्होंने बताया कि हम में से अधिकतर लोग शिव को एक भगवान के रूप में जानते, मानते और पूजते रहे हैं। लेकिन क्या कभी सोचा है कि शिव का मतलब क्या है? शिव कहां से आए? क्या ईश्वर में विश्वास करना चाहिए? लोग अकसर मुझसे पूछते हैं कि उन्हें ईश्वर में विश्वास करना चाहिए या नहीं।
विश्वास की बात इसलिए आती है क्योंकि आप सच्चाई से स्वीकार नहीं करते कि आप नहीं जानते। ‘मैं नहीं जानता’ एक जबर्दस्त संभावना है। मैं आपसे एक सवाल पूछता हूं – ‘क्या आपको विश्वास करते हैं कि आपके दो हाथ हैं, या आप जानते हैं कि आपके पास दो हाथ हैं?’ आपके पास दो हाथ हैं, यह जानने के लिए आपको अपनी बाहें देखने की जरूरत नहीं है, क्योंकि उसे आप अपने अनुभव से जानते हैं। तो फिर ऐसा क्यों है कि हाथों की बात होती है तो आप जानते हैं, मगर ईश्वर के मामले में आप विश्वास करते हैं? क्योंकि आप ईमानदारी से स्वीकार नहीं करना चाहते कि आप नहीं जानते ! जैसे घर को चलाने के लिए घर का एक मुखिया होता है वैसे इस संसार को चलाने वाला एक शिव ही हैं जिसके आगे किसी कि नही चलता हैं इसलिए उन्हे महादेव कहते हैं । इस मौके पर मुख्य यजमान राजा चौरसिया के अलावा यज्ञाचार्य _
आचार्य श्री लालाबाबू जी मुम्बई , 
सागर तिवारी पत्रकार , अंकित गुप्ता पत्रकार,  हरिशरण सिंह, आजाद चौरसिया, सचिन चौरसिया पत्रकार , राघव, अजय पाण्डेय, शिवकेश पाण्डेय, संजय सोनी, दीपू मौर्य, विपिन मौर्य आदि उपस्थित रहे ।