रायबरेली - राजामऊ में हुआ कृषक पाठशाला का आयोजन

रायबरेली - राजामऊ में हुआ कृषक पाठशाला का आयोजन

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रिपोर्ट:-ऋषि मिश्रा
मो०न०:-9935593647

दलहन व तिलहनी फसलों की ओर अग्रसर हो किसान: आशीष साहू 

बछरावां, रायबरेली- धान व गेहूं की परंपरागत फसलों से हटकर किसानों को चाहिए की नकद आय के लिए वह दलहनी तथा तिलहनी फसलों की ओर ध्यान देने का प्रयास करें, क्योंकि यह वह फसले हैं जो, किसानों को ऊंची कीमत दिलाने में सक्षम होती हैं। इसी के साथ सरकार के द्वारा चलाई जा रही बीमा योजनाओं का भी लाभ लेने का प्रयास करें। यह विचार हैं एडीयो कृषि आशीष साहू ने राजामऊ में आयोजित कृषक पाठशाला के दौरान उपस्थित किसानों को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश तथा केंद्र की सरकार किसानो के उत्थान के लिए लगातार प्रयासरत हैं। फसलों की सिंचाई के लिए सोलर पंप स्थापित करें ताकि उन्हें डीजल तथा बिजली के बिल से राहत मिल सके। सरकार द्वारा सोलर पंप लगवाने पर किसान को अनुदान भी दिया जाता है। दलहनी व तिलहनी फसलों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह कम लागत में पैदा होती हैं और बेहतर मूल्य प्रदान करती हैं। श्री साहू द्वारा इन फसलों की बुवाई तथा देखभाल संबंधी तकनीकी जानकारी भी प्रदान की गई। वीटीएम सत्य प्रकाश द्वारा फसलों में लगने वाले विभिन्न रोगों के संबंध में व्यापक प्रकाश डाला गया। वीटीएम प्रदीप नारायण द्वारा फसलों की लाइन से बुवाई तथा किसानों को फॉर्म रजिस्ट्री करवाने हेतु प्रेरित किया गया। क्षेत्र के प्रगतिशील किसान सत्य प्रकाश मिश्रा द्वारा कृषकों को उर्वरक के पीछे न भागकर जैविक तथा कंपोस्ट खाद की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित किया गया। उन्होंने कहा कि आज हम अधिक उपज तो जरूर ले रहे हैं, परंतु भोजन को लगातार बेस्वाद बना रहे हैं, कभी जमाना था जब हम उर्वरकों से खेती नहीं करते थे हमारे खेत उपजाऊ और स्वादिष्ट अन्न प्रदान करते थे। आज हमारा भोजन स्वाद हीन हो गया है, उन्होंने कहा कि हम पारंपरिक खेती के पीछे भागते हैं, परंतु इसके विपरीत अगर हम मोटे अनाज की ओर एक कदम बढ़ाने का प्रयास करें तो वह हमारे लिए कम लागत में ज्यादा लाभ देने वाला प्रयास साबित होगा। श्री मिश्र ने कहा की उर्वरक के प्रयोग से हमारी भूमि लगातार छरण की ओर जा रही है। अगर हमने अति शीघ्र अपनी पुरानी परिपाटी कंपोस्ट खाद की तरफ कदम न बढ़ाया तो वह दिन दूर नहीं होगा जबकि हमारे खेत बंजर नजर आएंगे और "सुजलाम सुफलाम सश्य श्यामलम" हमारी धरती मां हमारे कृत्यों पर कराहती हुई नजर आएगी। इस मौके पर उपस्थित किसानों द्वारा सत्य प्रकाश मिश्रा के फार्म पर बगैर उर्वरक का प्रयोग किए हुए उपजाई जा रही फसलों का भी अवलोकन किया गया। कृषक पाठशाला के दौरान कृषक रामनरेश, अंकेश, प्रेम शंकर सहित भारी संख्या में क्षेत्र के किसान मौजूद रहे।