भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष को गिरफ्तार करने पहुंची यूपी पुलिस, फिर हुआ कुछ ऐसा कि वारंट होने पर भी लौटना पड़ा खाली हाथ
भाजपा दक्षिण जिला के पूर्व जिलाध्यक्ष और वर्तमान में ग्रामीण जिले के प्रभारी राधेश्याम पांडेय को लखनऊ पुलिस गिरफ्तार करने उनके घर पहुंचे। वह वर्ष 2005 में महंगाई, भ्रष्टाचार के विरोध में युवा मोर्चा द्वारा विधान भवन के सामने आयोजित धरने में शामिल हुए थे।
जिस समय लखनऊ की पुलिस ने उनके घर पर छापा मारा, राधेश्याम पांडेय क्षेत्रीय कार्यालय में स्थित ग्रामीण जिले के कक्ष में बैठक कर रहे थे। फोन पर उनसे बात कर टीम लौट गई। राधेश्याम पांडेय ने 12 दिसंबर को कोर्ट में पहुंचने की बात कही है। पुलिस के पास उनके अलावा एक और नेता का गैर जमानती वारंट था।
शनिवार शाम को लखनऊ की पुलिस नौबस्ता थाना पहुंची। उन्होंने कार्यवाहक थाना प्रभारी जमाल अहमद से बात की। टीम के पास यशोदा नगर निवासी और भाजपा नेता राधेश्याम पांडेय के नाम का गिरफ्तारी आदेश था। पुलिस के साथ वह उनके घर पहुंचे तो उनके बेटे राज वल्लभ पांडेय ने बताया कि वह घर पर नहीं हैं। पुलिस की उनसे फोन पर बात कराई गई तो वह पार्टी कार्यालय में बैठक कर रहे थे।
इस संबंध में राधेश्याम पांडेय ने बताया कि उन्होंने पुलिस से कहा कि या तो वह कार्यालय आ जाएं, या वह घर आ जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि 2005 के धरने में उन लोगों की गिरप्तारी की गई थी। इसमें 15 दिन बाद उन लोगों को जमानत पर छोड़ दिया था। इसमें उन पर सेवन सीएलए भी लगाया गया था। जमानत पर छूटने के बाद आज तक उन्हें कोई सूचना पेश होने को लेकर नहीं मिली।
उनके मुताबिक, बातचीत के बाद पुलिस लौट गई और उन्होंने 12 दिसंबर को कोर्ट पहुंचने का आश्वासन दिया। इस मामले में वर्तमान में भाजपा दक्षिण जिला उपाध्यक्ष सुरेन्द्र सिंह चौहान उर्फ राजन चौहान और पूर्व पार्षद धर्मनाथ मिश्रा पर भी मुकदमे हुए थे। राजन चौहान का घर भी पुलिस ने पूछा था। हालांकि दोनों ने बताया कि उनके यहां पुलिस नहीं आई है।
वहीं नौबस्ता के कार्यवाहक थाना प्रभारी जमाल अहमद ने बताया कि लखनऊ पुलिस के पास राधेश्याम पांडेय के अलावा एक और का गिरफ्तारी वारंट भी था।

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