रायबरेली:भू माफियाओं नें ऐसी घुमाई गुगली की योगी बाबा का बुल्डोजर हुआ बोल्ड।

रायबरेली:भू माफियाओं नें ऐसी घुमाई गुगली की योगी बाबा का बुल्डोजर हुआ बोल्ड।

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रिपोर्ट>सागर तिवारी




ऊंचाहर रायबरेली। सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ अपनी सरकार के लिए भू–  माफियाओं पर शिकंजे कसने के चाहे जितने पढ़ते हों लेकिन रायबरेली में इसका कोई असर नही दिख रहा है। उनके सारे दावे हवा हवाई साबित हो रहे हैं। ऊसर, बंजर, खलिहान, तालाब चारागाह पर तो कब्ज़ा आम बात है। लेकिन अब तो खुद राज्य सरकार के नाम दर्ज भूमि भी सुरक्षित नहीं है। राजस्व विभाग के अधिकारी और कर्मचारी भी भूमाफियाओं के साथ सांठ गांठ करके उनका साथ दे रहे हैं। ग्राम प्रधान के शिकायत करने के बाद भी न ही एसडीएम और न ही तहसीलदार ने कब्जेदारी पर कोई कार्यवाही की हो। ग्राम प्रधान ने कार्यवाही न होनी की दशा में धरना प्रदर्शन कीचेतावनी दी है ,दरअसल ऊंचाहार विकास खण्ड की ग्राम पंचायत ऊंचाहार ग्राम प्रधान धनराज यादव का आरोप है कि। भूमि गाटा संख्या 4616, 4618, 4619, 4612, 4608 समेत कई नम्बरों पर दबंग भूमाफियाओं ने जबरन कब्ज़ा करके प्लॉटिंग कर दिया और मोटे दामों में उसे बेंच दिया है।  ग्राम प्रधान धनराज यादव ने बीते माह एसडीएम से शिकायत करते हुए टीम गठित करके पैमाईश के बाद ग्राम सभा की भूमि सुरक्षित करने की मांग की थी। जिसपर आज तक काबिल एसडीएम और तहसीलदार ने कोई कार्यवाही नहीं की है। मामला यहीं नहीं खत्म होता अभी ये भी सुनिए।तहसील क्षेत्र के कन्दरावां ग्राम सभा की भूमि गाटा संख्या 1539 रक्बा 0.1520 हेक्टेयर में से कृपाल पुत्र रघुवर के नाम से खारिज करके करीब 0.016 हेक्टेयर राज्य सरकार के नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज है ।  गौर करिए भूमाफिया कितने शातिर हैं। पहले उन्होंने राज्य सरकार के नाम दर्ज भूमि के पीछे किसी एक भूमि का बैनामा करवाया और उसके बाद सरकार की भूमि बेच डाली। मामला मीडिया की सुर्खियों में छाया तो तत्कालीन लेखपाल हनुमंत प्रसाद ने आईजीआरएस पर की गई शिकायत में अपनी रिपोर्ट आख्या में बताया की प्रश्नगत भूमि मौके पर खाली है। जबकि भू माफियाओं ने सरकारी भूमि को अपनी भूमि बताकर  बकायदे बैनामा कर के बेच डाला है। जिसमें ऊसर की भूमि शामिल है। दरअसल कस्बा निवासी मुस्लिम समुदाय के दबंग भूमाफियाओं का परिवार लम्बा होने के चलते पड़ोस के ही एक दलित शख्स जोखू लाल को गुमराह करके उसके नाम गाटा संख्या 1539/01520 हेक्टेयर में कृपाल पुत्र रघुवर से बैनामा ले लिया। लेकिन जिस भूमि प्लॉटिंग की गई है वह राज्य सरकार के नाम दर्ज है। जबकि विक्रेता कृपाल व क्रेता जोखू लाल की भूमि भूमि बिक्रित भूमि से अलग है। मामला मीडिया की सुर्खियों में छाया तो क्रेता व उसके आकाओं पर जांच की तलवार लटक गई है। इस मामले में भी एसडीएम सिद्धार्थ चौधरी जांच के बाद दोषियों पर कार्यवाही करने का झुमझुना देकर पल्ला झाड़ लिया। मामला यहां भी खत्म नहीं होता अभी तीसरा मामला भी सुनिए। तहसील क्षेत्र के भूमि गाटा संख्या 4207मि0 स्थित ग्राम ऊंचाहार राजस्व अभिलेखों में ऊसर दर्ज़ है। जिसपर समुदाय विशेष के भू माफियाओं ने सरहंगई व दबंगई के बलपर कब्ज़ा करके भवन निर्माण कर लिया है। कस्बे के लोगों ने सामूहिक रूप से इसकी शिकायत तहसील में आयोजित सम्पूर्ण समाधान दिवस में की लेकिन हल्का लेखपाल ने भूमाफियाओं से सांठ गांठ करके शिकायत पर कोई रिपोर्ट आख्या आधिकारियों को नहीं प्रेषित की। लेखपाल के उदासीन रवैए और खाऊ कमाऊ नीति के चलते सरहंगों के हौसलों में चार चान्द लग गया है। कोई भी कार्यवाही न होने से कस्बे के सैंकड़ों लोगों में हल्का लेखपाल व राजस्व अधिकारियों और के प्रति आक्रोश व्याप्त है। लोगों का आरोप है कि हल्का लेखपाल ने भू– माफियाओं से मोटी रकम लेकर मामले से मुंह फेर लिया है। जिससे सरकार को आर्थिक क्षति हो रही है। इस मामले में लेखपाल और एसडीएम सिद्धार्थ चौधरी जांच करके कार्यवाही करने के नाम पर हीला हवाली कर रहे हैं। तो आख़िर कौन संभालेगा भू–माफियाओं द्वारा किए गए अवैध कब्जादरी के खिलाफ ऊंचाहार की कमान। यह अपने आप में एक बड़ा सवाल है। ऊंचाहार ग्राम प्रधान धनराज यादव का कहना है कि एसडीएम और तहसीलदार का यही रवैया रहा तो विवश होकर सरकार के विरुद्ध धरना प्रदर्शन के लिए बाध्य होंगे।