रायबरेली- ऊंचाहार नगर पंचायत की ओर से पूरे ननकू में बने मैटेरियल रिकवरी प्रशासन की चुप्पी आखिर क्यों ?

रायबरेली- ऊंचाहार नगर पंचायत की ओर से पूरे ननकू में बने मैटेरियल रिकवरी प्रशासन की चुप्पी आखिर क्यों ?

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रिपोर्ट- सागर तिवारी

ऊंचाहार/रायबरेली- नगर पंचायत की ओर से पूरे ननकू मजरे पट्टी रहस कैथवल में बने मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (MRF) सेंटर के मामले में प्रशासन की चुप्पी बरकरार है। पिछले कई दिनों से मीडिया और ग्रामीणों द्वारा उठाई जा रही शिकायतों के बावजूद, बुधवार तक इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई धरातल पर नजर नहीं आई। नतीजा यह है कि लाखों की मशीनें आज भी जंग खा रही हैं और कर्मचारी खुले में कूड़ा जलाकर पर्यावरण नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं।
आज की स्थिति: समस्या जस की तस बुधवार को भी सेंटर के बाहर कूड़े के अंबार से निकलता जहरीला धुआं आसपास के गांवों की हवा में जहर घोलता रहा। स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रशासन की इस 'ढीली कार्यशैली' से अब उनका धैर्य जवाब दे रहा है।
खाद बनाने वाली महंगी मशीनें सालों से बंद क्यों हैं?
वेतन का औचित्य क्या? जब काम (कूड़ा निस्तारण) वैज्ञानिक पद्धति से नहीं हो रहा, तो तैनात कर्मचारियों को किस बात का मानदेय दिया जा रहा है?प्रदूषण का जिम्मेदार कौन? एनजीटी (NGT) के सख्त नियमों के बावजूद खुले में कूड़ा जलाने पर नगर पंचायत पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? यह एक बड़ा सवाल है। बुधवार को मौके का दौरा करने पर पाया गया कि धुएं के कारण पूरे ननकू और आसपास के इलाकों में बुजुर्गों और बच्चों को  भारी परेशानी हो रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायत के बाद भी उच्च अधिकारियों ने अभी तक मौके का मुआयना नहीं किया है।
"स्थानीय निवासी राजेश कुमार बुधराम और मोहित का कहना है कि हम सिर्फ आश्वासन सुनकर थक चुके हैं। बुधवार भी बीत गया लेकिन कूड़ा जलना बंद नहीं हुआ। ऐसा लगता है कि नगर पंचायत को न तो पर्यावरण की चिंता है और न ही लोगों के स्वास्थ्य की।"स्वच्छ सर्वेक्षण की रैंकिंग में ऊंचे दावे करने वाली नगर पंचायत की इस लापरवाही ने शासन की मंशा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह है कि क्या जिला प्रशासन इस गंभीर लापरवाही का संज्ञान लेकर दोषियों पर कार्रवाई करेगा या फिर यह एमआरएफ सेंटर केवल भ्रष्टाचार और बर्बादी की एक और इमारत बनकर रह जाएगा।