रायबरेली - जमीनी पड़ताल में नगर पंचायत की अलाव व्यवस्था दिखी ढोल में पोल

रायबरेली - जमीनी पड़ताल में नगर पंचायत की अलाव व्यवस्था दिखी ढोल में पोल

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रिपोर्ट:- ऋषि मिश्रा
मो०न०:- 9935593647

रैन बसेरे के स्थान परिवर्तन का क्या वास्तविक यात्रियों व राहगीरों को मिलेगा लाभ, सवालिया निशान? 

अभी जहां बाहरी लोग आते हैं वहां पर की गई है दोनो समय अलाव की व्यवस्था: अधिशाषी अधिकारी

बछरावां, रायबरेली- क्षेत्र व जनपद में ही नहीं अपितु देश एवं प्रदेश के कई हिस्सों में भयंकर शीतलहर का प्रकोप देखने को मिल रहा है। पिछले तीन दिनों से हो रही भयंकर ठंड की ठिठुरन एवं शीतलहर ने क्षेत्र के लोगों को उनके घरों में कैद कर दिया है। इस समय अलाव ही उनका एकमात्र सहारा है। जो कि शासन प्रशासन के निर्देशों के बावजूद भी जनपद की हाईटेक नगर पंचायत बछरावां के सार्वजनिक स्थानों व चौराहो से नगरवासियो को मुंह चिढ़ाता हुआ नजर आ रहा है। शासन के निर्देश के बावजूद भी नगर पंचायत शासन इस प्रकार की ठिठुरती ठंड को गंभीरता से नहीं ले रहा है। जब नगर पंचायत की अलाव व्यवस्था की जमीनी पड़ताल की गई तो यह पता चला कि पूर्व के वर्षों में नगर पंचायत बछरावा के द्वारा दर्जनों सार्वजनिक स्थानों पर शीतलहर के प्रकोप से पूर्व अलाव की व्यवस्था कर दी जाती थी। परंतु तीन दिनों से चल रही इस भयंकर शीतलहर एवं ठिठुरती ठंड के बावजूद भी नगर पंचायत ने इस पर ध्यान नहीं दिया। विदित हो कि नगर पंचायत के द्वारा नगर पंचायत क्षेत्र में बानगी मंडी चौराहा, चूड़ी मंडी चौराहा, सब्जी मंडी चौराहा, आदि नगर कट के पास, चंद्रा मार्केट के पास, डॉक्टर विजय के क्लीनिक के पास और नगर क्षेत्र के अंतर्गत अन्य कई सार्वजनिक स्थानों पर अलाव की व्यवस्था की जाती थी, जो इस बार पड़ताल के दौरान मौके पर नदारद मिली। वहीं नगर पंचायत के द्वारा कस्बे में स्थित बस स्टॉप, पुराने नगर पंचायत कार्यालय और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रांगण में अलाव की व्यवस्था की तो गई, परंतु कहीं-कहीं लकड़िया गीली रही, जिससे उनमें केवल धुआं ही उठता हुआ नजर आया। बस स्टॉप पर मौजूद लखनऊ जाने वाले यात्री राम सुमेर, रामेश्वर, अमरेंद्र जायसवाल, कीर्ति त्रिपाठी, महिमा पांडे ने बताया कि बस स्टॉप पर जो अलाव की व्यवस्था की गई है, वह जल नहीं रहा है, सिर्फ धुआं निकल रहा है। वही जिन स्थानों पर अलाव की व्यवस्था नहीं की गई, उन स्थानों पर मौजूद लोगों का कहना है कि इससे पूर्व नगर पंचायत के द्वारा ऐसे दर्जनों स्थानो पर आम जनमानस को इस ठिठुरती ठंड में अलाव की व्यवस्था उपलब्ध कराई जाती थी। जो इस बार अभी तक देखने को नहीं मिली है। जिससे स्थानीय नागरिकों में नगर पंचायत शासन प्रशासन के प्रति आक्रोश भी देखने को मिल रहा है। वही नगर पंचायत के द्वारा नगर पंचायत के अंतर्गत कस्बे में स्थित पुराने नगर पंचायत कार्यालय में संचालित होने वाला रैन बसेरा भी अब अपने उक्त स्थान से उठकर 700 मीटर की दूरी पर महाराजगंज रोड पर स्थित "लिवली हुड सेंटर" पर चला गया है। जिसको लेकर भी लोगों में आक्रोश देखा गया और लोग दबी जुबान से यह कहते हुए भी नजर आए कि रैन बसेरे में नगर का आदमी तो जाकर विश्राम करेगा नहीं, जो राहगीर या यात्री देर रात कस्बे में विभिन्न मार्गो से पहुंचेंगे, वहीं रैन बसेरे का प्रयोग करेंगे। लेकिन महाराजगंज रोड पर रैन बसेरा होने के चलते क्या उन यात्रियों को रैन बसेरे की सुविधा उपलब्ध हो पाएगी, जो मुख्य चौराहे के आसपास उपलब्ध हो जाती थी। लोगों का यह भी मानना है कि बस स्टॉप पर भी सारी सुविधाएं मौजूद थी, वहां भी रैन बसेरा बनाया जा सकता था। वहीं उक्त समस्याओं को लेकर जब नगर पंचायत के अधिशाषी अधिकारी राम आशीष वर्मा से उनके सीयूजी नंबर पर दूरभाष के माध्यम से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि अभी अलाव की व्यवस्था उन स्थानों पर की गई है जहां पर बाहर के लोग आते हैं, जब अन्य सार्वजनिक स्थानों का जिक्र उनसे किया गया तो उन्होंने उस बात को स्वीकारते हुए कहा कि जल्द ही वहां भी व्यवस्था हो जाएगी। साथ ही साथ रैन बसेरे के स्थान के स्थानांतरण पर भी उन्होंने हामी भरते हुए उक्त स्थान से उसे 700 मीटर दूर मौजूद होने की बात कही। क्योंकि पुराने नगर पंचायत कार्यालय की बिल्डिंग जर्जर है और वहां पर शौचालय आदि की व्यवस्था भी बड़ी दयनीय हो चुकी है, इस कारण रैन बसेरा अपने पुराने स्थान से नए स्थान पर स्थानांतरित किया गया है। परंतु सवाल यह उठना लाजमी हो जाता है कि क्या बानगी मंडी, सब्जी मंडी, कस्बे की मुख्य मार्केट शिवगढ़ रोड सहित अन्य दर्जन भर स्थानों पर क्या बाहर से लोग नहीं आते हैं, केवल दो या तीन ही स्थानों पर बाहर से लोग आते हैं, जहां पर अधिशाषी अधिकारी महोदय दोनों टाइम अलाव जलाने की बात कहते हुए नजर आए और जो रैन बसेरा कस्बे के मुख्य चौराहे से 700 से 800 मीटर की दूरी पर बनाया गया है, वह अगर मुख्य चौराहे के बस स्टॉप या फिर अन्य किसी नजदीकी स्थान 100 या 200 मीटर की दूरी पर बनाया जाता तो यात्रियों को अत्यधिक सुविधा उपलब्ध होती, जो अब नगर पंचायत के जिम्मेदारों के क्रियाकलापो के कारण नहीं हो पाएंगी। फिलहाल हाईटेक बछरावां नगर पंचायत शासन की व्यवस्थाओं में मौजूद अवस्थाएं ढोल में पोल की कहावत को चरितार्थ करती हुई नजर आ रही है।