रायबरेली - पुनर्जागरण के चौथे चरण के सबसे बड़े प्रवक्ता थे आचार्य द्विवेदी

रायबरेली - पुनर्जागरण के चौथे चरण के सबसे बड़े प्रवक्ता थे आचार्य द्विवेदी

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रिपोर्ट - अमन श्रीवास्तव 
मो - 8115983620

87वीं पुण्यतिथि पर जन्मग्राम दौलतपुर और मोक्ष स्थान रायबरेली में श्रद्धा से याद किए गए युग प्रवर्तक साहित्यकार: महावीर प्रसाद द्विवेदी

हिंदी प्रेमियों ने आचार्य द्विवेदी की प्रतिमाओं पर अर्पित की पुष्पांजलि 

रायबरेली- 87वीं पुण्यतिथि पर हिंदी के युग प्रवर्तक,राष्ट्रभाषा हिंदी को नई दिशा देने वाले महान साहित्यकार आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी जन्मस्थान दौलतपुर एवं मोक्षस्थान रायबरेली में श्रद्धा से याद किए गए।राही ब्लॉक परिसर एवं दौलतपुर स्थित प्रतिमाओं पर पुष्पांजलि के बाद आयोजित श्रद्धांजलि सभाओं में उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व की चर्चा की गई।वक्ताओं ने कहा कि आचार्य द्विवेदी भारतीय पुनर्जागरण के चौथे चरण के सबसे बड़े प्रवक्ता थे।उनकी बनाई खड़ी बोली हिंदी स्वाधीनता आंदोलन की भाषा बनी।1919 में महात्मा गांधी ने हिंदी के महत्व को स्वीकार करते हुए स्वाधीनता आंदोलन की संपर्क भाषा के रूप में हिंदी को ही स्वीकार किया।आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी स्मृति न्यास की ओर से वरिष्ठ नागरिक युगुल किशोर तिवारी की अध्यक्षता में राही ब्लॉक सभागार में आयोजित संगोष्ठी में पूर्व प्राचार्य प्रो. आदर्श कुमार ने कहा कि आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी ने हिंदी भाषा को केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं बनाया,बल्कि उसे सामाजिक चेतना और राष्ट्रीय जागरण का सशक्त औजार बनाया।द्विवेदी जी ने भाषा की शुद्धता,विचारों की स्पष्टता और नैतिक मूल्यों को साहित्य की आधारशिला बनाया,जो आज भी मार्गदर्शक हैं।प्रोफेसर उदयभान सिंह ने कहा कि आचार्य द्विवेदी का संपूर्ण जीवन साधना,अनुशासन और राष्ट्रसेवा को समर्पित रहा।वर्तमान पीढ़ी को उनके साहित्य से भाषा के साथ-साथ जीवन मूल्यों की भी प्रेरणा लेनी चाहिए।हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. बद्री दत्त मिश्रा ने कहा कि ‘सरस्वती’ पत्रिका के संपादन के माध्यम से आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी ने हिंदी नवजागरण की मजबूत नींव रखी।भारतीय पुनर्जागरण के चतुर्थ चरण के वह सबसे बड़े प्रवक्ता हैं।उन्होंने हिंदी साहित्य को संगठित स्वरूप प्रदान किया और लेखकों को सामाजिक उत्तरदायित्व से जोड़ा।सेंट्रल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश तिवारी ने कहा कि आचार्य द्विवेदी का चिंतन सत्य,नैतिकता और राष्ट्रहित पर आधारित था,जो आज के सामाजिक परिदृश्य में अत्यंत प्रासंगिक है।डॉ संतोष पांडेय ने कहा कि आचार्य द्विवेदी ने साहित्यिक अनुशासन स्थापित कर बोलियों में बंटी हिंदी भाषा को खड़ी बोली का रूप प्रदान किया।संयोजक गौरव अवस्थी ने आचार्य द्विवेदी की स्मृतियों के संबंध में भविष्य की रूपरेखा प्रस्तुत की।इस अवसर पर ब्लॉक प्रमुख राही धर्मेंद्र बहादुर यादव,सेंट्रल बार के महामंत्री योगेंद्र दीक्षित,लक्ष्मीकांत शुक्ला,बार एसोसिएशन पूर्व अध्यक्ष शिवकुमार शुक्ल,श्रीमती दीपा तिवारी,राजीव भार्गव ने भी संबोधित किया।कवि दुर्गा शंकर वर्मा दुर्गेश एवं आचार्य सूर्य प्रसाद शर्मा निशिहर ने कविता के माध्यम से श्रद्धांजलि दी।संचालन शंकर प्रसाद मिश्र एवं सभी का आभार समिति के अध्यक्ष विनोद शुक्ला ने व्यक्त किया।इस मौके पर बैंक कर्मचारी नेता विनोद शुक्ला,संरक्षक रघुनाथ प्रसाद द्विवेदी,ठाकुर प्रसाद सिंह,शैलेंद्र सिंह,बृजेश सिंह,धर्मेंद्र तिवारी,करुणा शंकर मिश्र,क्षमता मिश्रा,रागिनी सिंह,कु. वैशाली सिंह,प्रिया पांडेय,लंबू बाजपेई,चंद्रमणि बाजपेई,सुधीर द्विवेदी,अमर द्विवेदी,पप्पू सिंह,राकेश कक्कड़,विनोद श्रीवास्तव,शशिकांत अवस्थी,रामबाबू मिश्रा,राजेश द्विवेदी,कृष्ण मनोहर मिश्र,विक्रम सिंह,शिवम मिश्र आदि मौजूद रहे।

पुण्यतिथि पर दौलतपुर में भी प्रतिमा पर पुष्पांजलि

रायबरेली।आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी राष्ट्रीय स्मारक समिति की ओर से दौलतपुर स्थित आचार्य द्विवेदी की प्रतिमा पर आचार्य विनय शुक्ला,राम बहादुर सिंह,केशव बाजपेई,गुड्डू शुक्ला,अरुण मिश्रा,रामजी मिश्र,जनक कुमार मिश्र,नन्हकऊ पाल आदि ने माल्यार्पण करके उनके दिखाए रास्ते पर चलने और स्मृतियों को जीवंत रखने का संकल्प लिया।